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Kanpur News: राज्य स्तरीय बैठक में तय होगी क्रोमियम निस्तारण की रणनीति
Fri, 19 Sep 2025 01:09 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 19 Sep 2025 01:09 AM IST
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फोटो-22-खानचंदपुर मटियामऊ मार्ग पर डंप स्थल। संवाद
रनियां (कानपुर देहात)। खानचंद्रपुर में डंप क्रोमियम के निस्तारण व भूजल शुद्ध करने पर कई तरह के शोध किए जा चुके हैं। इस समस्या को पूरी तरह कैसे खत्म किया जाए अब इस पर रूपरेखा बन रही है। इसी माह ऑनलाइन राज्य स्तरीय बैठक होगी। इसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ दिल्ली आईआईटी की रामानुजन फैकल्टी के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसमें बिंदुवार चर्चा की जाएगी।
राज्यस्तरीय बैठक में डंप स्थल के चारों ओर बाउंड्री, द्वितीय और तृतीय चरण में होने वाला कार्य और आईआईटी दिल्ली के रामानुजन फैकल्टी के वैज्ञानिकों द्वारा अब तक किए शोध व उसके फायदों पर चर्चा होगी। जिसमें यह भी तय किया जाएगा कि क्रोमियम को किस तरह खत्म कर भूजल शुद्ध किया जाए। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी मनोज कुमार चौरसिया ने बताया कि ऑनलाइन होने वाली राज्यस्तरीय बैठक में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा, उत्तर प्रदेश प्रदूषण बोर्ड के सेक्रेटरी, जिले से एडीएम प्रशासन और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शामिल होंगे।
बताया कि बैठक इसी माह होनी है। इसकी तैयारी चल रही है। बता दें कि खानचंद्रपुर में क्रोमियम से दूषित हुए भूजल को शुद्ध करने के लिए आईआईटी दिल्ली की रामानुजन फैकल्टी के विशेषज्ञ डॉ. पंकज गुप्ता ने जमीन मांगी थी। इसके लिए विभाग को पत्राचार भी किया था। अब यह तय किया जाना है कि भूजल शुद्ध करने के लिए किस तरह काम किया जाए।
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ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी से शुद्ध किया था भूजल
आईआईटी दिल्ली की रामानुजन फैकल्टी के वैज्ञानिकों ने पिछले साल ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी से शिवनाथ पुरवा गांव के दीपू यादव की जमीन पर क्रोमियम युक्त पानी को शुद्ध करने का काम किया था। जिसमें उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट के तहत 60-60 फीट गहरी बोरिंग कर उससे निकले पानी को सवा बीघा बंजर खेत में डाला गया। इस खेत में उगाई गई बिटवर साइनोडाइन टाइका नामक जैविक घास ने क्रोमियम युक्त पानी से क्रोमियम को सोखकर उसे उपजाऊ बनाया। इसको लेकर एनजीटी इसको लेकर सजग है। रामानुजन फैकल्टी के प्रोफेसर पंकज कुमार गुप्ता ने क्रोमियम डंप स्थल में इसी प्रकार से काम करने की आगे के लिए अनुमति क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी मनोज कुमार चौरसिया से मांगी थी। इसके लिए उन्होंने जगह मांगी थी।
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केंद्रीय भूगर्भ अधिकरण विभाग जांचेगा मरकरी और क्रोमियम
एनजीटी के अनुसार क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से डंप स्थल में किस सतह तक मरकरी और क्रोमियम पहुंच गया है। इसकी जांच केंद्रीय भूगर्भ अधिकरण विभाग के अधिकारी करेंगे। उन्हें क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मनोज कुमार ने डेढ़ माह पहले चिट्ठी लिखकर भेजी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि अभी तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।
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राज्यस्तरीय बैठक में डंप स्थल के चारों ओर बाउंड्री, द्वितीय और तृतीय चरण में होने वाला कार्य और आईआईटी दिल्ली के रामानुजन फैकल्टी के वैज्ञानिकों द्वारा अब तक किए शोध व उसके फायदों पर चर्चा होगी। जिसमें यह भी तय किया जाएगा कि क्रोमियम को किस तरह खत्म कर भूजल शुद्ध किया जाए। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी मनोज कुमार चौरसिया ने बताया कि ऑनलाइन होने वाली राज्यस्तरीय बैठक में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा, उत्तर प्रदेश प्रदूषण बोर्ड के सेक्रेटरी, जिले से एडीएम प्रशासन और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शामिल होंगे।
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बताया कि बैठक इसी माह होनी है। इसकी तैयारी चल रही है। बता दें कि खानचंद्रपुर में क्रोमियम से दूषित हुए भूजल को शुद्ध करने के लिए आईआईटी दिल्ली की रामानुजन फैकल्टी के विशेषज्ञ डॉ. पंकज गुप्ता ने जमीन मांगी थी। इसके लिए विभाग को पत्राचार भी किया था। अब यह तय किया जाना है कि भूजल शुद्ध करने के लिए किस तरह काम किया जाए।
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ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी से शुद्ध किया था भूजल
आईआईटी दिल्ली की रामानुजन फैकल्टी के वैज्ञानिकों ने पिछले साल ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी से शिवनाथ पुरवा गांव के दीपू यादव की जमीन पर क्रोमियम युक्त पानी को शुद्ध करने का काम किया था। जिसमें उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट के तहत 60-60 फीट गहरी बोरिंग कर उससे निकले पानी को सवा बीघा बंजर खेत में डाला गया। इस खेत में उगाई गई बिटवर साइनोडाइन टाइका नामक जैविक घास ने क्रोमियम युक्त पानी से क्रोमियम को सोखकर उसे उपजाऊ बनाया। इसको लेकर एनजीटी इसको लेकर सजग है। रामानुजन फैकल्टी के प्रोफेसर पंकज कुमार गुप्ता ने क्रोमियम डंप स्थल में इसी प्रकार से काम करने की आगे के लिए अनुमति क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी मनोज कुमार चौरसिया से मांगी थी। इसके लिए उन्होंने जगह मांगी थी।
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केंद्रीय भूगर्भ अधिकरण विभाग जांचेगा मरकरी और क्रोमियम
एनजीटी के अनुसार क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से डंप स्थल में किस सतह तक मरकरी और क्रोमियम पहुंच गया है। इसकी जांच केंद्रीय भूगर्भ अधिकरण विभाग के अधिकारी करेंगे। उन्हें क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मनोज कुमार ने डेढ़ माह पहले चिट्ठी लिखकर भेजी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि अभी तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।