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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Chitrakoot 2009 clash with police case relief to 19 people including former MP and MLA court acquitted them

UP: 2009 में पुलिस से झड़प का मामला, पूर्व सांसद व विधायक सहित 19 लोगों को राहत, एडीजे कोर्ट ने किया दोषमुक्त

Wed, 11 Jun 2025 01:17 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 11 Jun 2025 01:17 PM IST
सार

Chitrakoot News: 2009 के आंदोलन के दौरान पुलिस से झड़प के मामले में पूर्व सांसद व विधायक सहित 19 लोगों को राहत मिली है। दरअसल, एडीजे कोर्ट ने सभी को दोषमुक्त किया है। बता दें कि आरोपियों को 2023 में एक-एक साल की सजा सुनाई गई थी।

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Chitrakoot 2009 clash with police case relief to 19 people including former MP and MLA court acquitted them
कोर्ट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चित्रकूट जिले में न्यायपालिका से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। वर्ष 2009 में आंदोलन के दौरान पुलिस से हुई झड़प के मामले में अपर जिला न्यायाधीश (एडीजे) अनुराग कुरील की अदालत ने पूर्व सांसद आर.के. सिंह पटेल, पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल, नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता समेत कुल 19 लोगों को दोषमुक्त करार दिया है।

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इससे पूर्व वर्ष 2023 में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) कोर्ट ने सभी 19 आरोपियों को एक-एक वर्ष की सजा सुनाई थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान एडीजे कोर्ट ने सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त घोषित कर दिया। गौरतलब है कि 2009 में जिले में किसी स्थानीय मुद्दे को लेकर जोरदार आंदोलन हुआ था।

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2023 में सीजेएम कोर्ट ने सुना दी थी सजा
इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई थी, जिसमें धारा 147, 148, 353, 332, 504, 506 सहित अन्य धाराएं लगाई गई थीं। पूर्व सांसद व विधायक के साथ-साथ नगर के कई प्रमुख लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। केस की सुनवाई वर्षों तक चली और वर्ष 2023 में सीजेएम कोर्ट ने सजा सुना दी थी।

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अब आगे की रणनीति पर भी नजर
दोषमुक्त होने के बाद अब इन जनप्रतिनिधियों और समर्थकों ने न्यायपालिका का आभार जताया है। उन्होंने इसे सच्चाई की जीत बताया है और कहा कि यह राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा था, जिसमें आज न्याय ने उन्हें बरी किया। कानूनी जानकारों के मुताबिक अगर शासन पक्ष इस फैसले से असहमत होता है, तो वह हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। हालांकि मौजूदा स्थिति में यह फैसला सभी आरोपियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

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