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बाल दिवस-काल दिवस
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Sun, 15 Nov 2015 01:25 AM IST
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शनिवार को देश जब चाचा नेहरू की याद में बाल दिवस मना रहा था, बच्चों को दुलरा रहा था, शहर के दो बड़े सरकारी अस्पतालों उर्सला और हैलट के डॉक्टरों ने ‘काल दिवस’ मनाया, एक बच्चे को काल के मुंह में धकेल कर।
बच्चा संवेदनहीन डॉक्टरों की वजह से मौत के मुंह में चला गया। उसे उर्सला से हैलट, हैलट इमरजेंसी से बाल रोग, बाल रोग से हड्डी रोग विभाग दौड़ाया जाता रहा और रोते-बिलखते परिजन इधर से उधर भागते रहे। किसी डॉक्टर ने हाथ नहीं रखा और रखा तब, जब उसकी मौत हो चुकी थी। हर बार की तरह जिम्मेदार जांच की बात कह रहे हैं पर जांच का अंजाम सबको पता है।
मछुआ नगर नवाबगंज निवासी रामकिशन ने बताया कि दिवाली के दिन उसका बेटा अरुण (8) पेड़ से गिर गया था। शुक्रवार रात दिक्कत बढ़ी तो शनिवार सुबह उर्सला लेकर पहुंचे। यहां उसे भर्ती कर लिया गया।
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दोपहर बाद हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने हैलट रेफर कर दिया। करीब 3:30 बजे अरुण को लेकर हैलट इमरजेंसी पहुंचे तो सर्जरी वार्ड में भेज दिया गया। वहां डॉक्टरों ने कम उम्र बताकर बाल रोग अस्पताल भेज दिया। परिजन अरुण को गोद में लेकर बाल रोग अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने इमरजेंसी के हड्डी रोग वार्ड रेफर कर दिया।
हड्डी रोग में डॉक्टरों ने अरुण को देखा सीटी स्कैन कराने को कहा। परिजन उसे सीटी स्कैन के लिए ले ही जा रहे थे कि उसकी सांसे थम गईं। डॉक्टरों की लापरवाही से बेटा खोने पर आक्रोशित परिजनों ने हैलट इमरजेंसी के सामने शव रखकर हंगामा किया। सूचना पर हैलट चौकी पुलिस पहुंची और परिजनों को शांत कराया।
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बच्चा संवेदनहीन डॉक्टरों की वजह से मौत के मुंह में चला गया। उसे उर्सला से हैलट, हैलट इमरजेंसी से बाल रोग, बाल रोग से हड्डी रोग विभाग दौड़ाया जाता रहा और रोते-बिलखते परिजन इधर से उधर भागते रहे। किसी डॉक्टर ने हाथ नहीं रखा और रखा तब, जब उसकी मौत हो चुकी थी। हर बार की तरह जिम्मेदार जांच की बात कह रहे हैं पर जांच का अंजाम सबको पता है।
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मछुआ नगर नवाबगंज निवासी रामकिशन ने बताया कि दिवाली के दिन उसका बेटा अरुण (8) पेड़ से गिर गया था। शुक्रवार रात दिक्कत बढ़ी तो शनिवार सुबह उर्सला लेकर पहुंचे। यहां उसे भर्ती कर लिया गया।
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दोपहर बाद हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने हैलट रेफर कर दिया। करीब 3:30 बजे अरुण को लेकर हैलट इमरजेंसी पहुंचे तो सर्जरी वार्ड में भेज दिया गया। वहां डॉक्टरों ने कम उम्र बताकर बाल रोग अस्पताल भेज दिया। परिजन अरुण को गोद में लेकर बाल रोग अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने इमरजेंसी के हड्डी रोग वार्ड रेफर कर दिया।
हड्डी रोग में डॉक्टरों ने अरुण को देखा सीटी स्कैन कराने को कहा। परिजन उसे सीटी स्कैन के लिए ले ही जा रहे थे कि उसकी सांसे थम गईं। डॉक्टरों की लापरवाही से बेटा खोने पर आक्रोशित परिजनों ने हैलट इमरजेंसी के सामने शव रखकर हंगामा किया। सूचना पर हैलट चौकी पुलिस पहुंची और परिजनों को शांत कराया।