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सपा का गढ़ ध्वस्त करने वाली भाजपा के सामने अबकी बार ये चुनौतियां

Sat, 23 Feb 2019 08:00 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 23 Feb 2019 08:00 AM IST
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challenges before BJP in lok sabha election 2019 in etawah
भाजपा के लिए चुनौती
अब यह तय हो गया है कि इटावा जिले की लोकसभा सीट से सपा का प्रत्याशी ही चुनावी मैदान में होगा। प्रत्याशी भले ही समाजवादी पार्टी से होगा, लेकिन उसे बसपा का भी पूर्ण समर्थन हासिल होगा। इटावा लोकसभा की सुरक्षित सीट फिलहाल भाजपा के कब्जे में है।
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अब गठबंधन प्रत्याशी से मुकाबला होने पर जातीय एवं राजनीतिक समीकरण बदलने के पूरे आसार हैं। 2014 के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो भाजपा प्रत्याशी अशोक दोहरे को जितने वोट मिले हैं। उनकी संख्या सपा व बसपा को मिले वोटों से कम है।
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हालांकि इस बार चुनाव में शिवपाल सिंह यादव सपा से अलग हैं और जिले में उनकी पकड़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जीत का सेहरा गठबंधन, प्रसपा व कांग्रेस के सिर बंधेगा या फिर भाजपा अपनी जीत दोहराएगी। समूचे राजनीतिक परिदृश्य में चुनौती सिर्फ भाजपा के लिए है।
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सपा का गढ़ भी ध्वस्त हो गया था

2014 के लोकसभा चुनाव में पूरे देश में मोदी लहर चली और उसमें सपा का गढ़ भी ध्वस्त हो गया था। यूपी में अखिलेश सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी का भी लाभ भाजपा को मिला था। जिले की लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी अशोक दोहरे 439646 वोट लेकर जीते थे। दो लाख 66 हजार 700 वोट लेकर सपा के प्रेमदास कठेरिया दूसरे नंबर पर और एक लाख 92 हजार 804 वोट के साथ बसपा के अजय पाल सिंह तीसरे स्थान पर आए थे। जाहिर है कि भाजपा लगभग पौने दो लाख वोटों के भारी भरकम अंतर जीती थी। 

बगैर गठबंधन की नजर से देखें तो इस अंतर पाटना आसान नहीं था। लेकिन सपा और बसपा के मिले वोटों को मिलाकर गौर करें तो वोटों की संख्या 459504 पर पहुंचती है। यानी भाजपा प्रत्याशी को सपा-बसपा को संयुक्त रूप से मिले वोटों में करीब 20 हजार वोट कम मिले थे। मौजूदा गठबंधन इसी आंकड़े का आधार है। 

प्रसपा को भाजपा से फंडिंग हो रही है- सपा

जिले में सपा और बसपा के गठबंधन को भाजपा से ज्यादा प्रसपा से चुनौती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सपा का गढ़ रहे इटावा में प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की लोगों की बीच पैठ काफी गहरी मानी जाती है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा जिले की तीन में दो इटावा व भरथना में कब्जा जमाने में सफल रही थी। लेकिन जसवंतनगर सीट पर शिवपाल सिंह यादव ने अपना कब्जा बरकरार रखा था। आगामी लोकसभा चुनाव में जिले की सीट पर चुनावी बिसात बिछना अभी बाकी है। हालांकि सभी प्रमुख पार्टियों को अपनी जीत पर पूरा भरोसा भी है। 

प्रसपा से तो कहीं कोई दिक्कत है ही नहीं। क्षेत्र के आम आदमी के संज्ञान में है कि इन्हें भाजपा से फंडिंग हो रही है। बीजेपी ने सपा बसपा गठबंधन रोकने के लिए इनको लगाया है। आम आदमी जान रहा है कि ये लोग हराने के लिए खड़े हुए हैं। लोग समझ रहे हैं कि यदि प्रसपा का मंसूबा सपा को हराने का है तो बीजेपी ही जीतेगी। पिछली बार तो लहर चल गई थी। हमारे के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी थी। इसका लाभ बीजेपी को मिला था। इस बार बीजेपी के खिलाफ है। - गोपाल यादव, सपा जिलाध्यक्ष 

बसपा खुद भाजपा का साथ ले चुकी है- प्रसपा

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कह रखा है कि यूपी की सभी सीटों पर पूरी मजबूती के साथ चुनाव लडे़ंगे। सिर्फ उस सीट पर प्रसपा का प्रत्याशी नहीं होगा, जहां से नेता जी मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ेंगे। प्रसपा के बारे में जो लोग यह कहते हैं कि वह भाजपा की मदद के लिए है वह खुद का अतीत नहीं देखते। बसपा खुद भाजपा का साथ ले चुकी है। सांप्रदायिकता के खिलाफ प्रसपा ही है, जो पूरी मजबूती से संघर्ष कर रही है।  - सुनील यादव,  प्रसपा जिलाध्यक्ष

 

जब सपा और बसपा अलग रहते हुए चुनाव लड़ी थी तब भी बसपा को काफी वोट मिले थे। अब तो गठबंधन में तो भाजपा कहीं दिखाई भी नहीं देगी। गोरखपुर व फूलपुर के उपचुनाव में गठबंधन का असर सबने देख लिया है। अब भाजपा चाहे मंदिर बनवाए या मस्जिद बनवाए कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। प्रसपा का भी कोई असर नहीं पड़ने वाला है। भाजपा के बारे में सभी जानते हैं कि वह किन किन लोगों को कहां कहां प्रलोभन देती है। - वीपी सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष

यह गठबंधन नरेंद्र मोदी के डर से बना है- भाजपा

गठबंधन का कोई असर नहीं होगा। पीएम मोदी ने बगैर किसी भेदभाव के जिस तरह से गरीब वर्ग के लिए योजनाएं चलाईं और उनका लाभ मिला। उसे देखते हुए साफ है कि 2014 में बीजेपी प्रत्याशी को जितने वोट मिले थे। इस बार उससे कहीं ज्यादा मिलेंगे। हर कोई जानता है कि एक दूसरे के खिलाफ लड़ने वाले लोगों ने यह गठबंधन ही नरेंद्र मोदी के डर से बना है। इसलिए गठबंधन रहे या न रहे, यूपी में भाजपा की जीतेगी। - कृपा नारायन तिवारी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष 



कांग्रेस पूरी ताकत से लड़ेगी चुनाव


जिले की सीट पर कांग्रेस व भाजपा दो राष्ट्रीय पार्टी और क्षेत्रीय पार्टी के तौर पर सपा बसपा के गठबंधन प्रत्याशी में सीधा मुकाबला होगा। कांग्रेस हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह यूपी में सभी सीटों पर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगे। जहां तक प्रसपा का सवाल है तो यह उनका पहला चुनाव होगा। जनता इस पार्टी पर कितना भरोसा करती है यह देखना बाकी है। उदयभान सिंह यादव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष

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