सपा का गढ़ ध्वस्त करने वाली भाजपा के सामने अबकी बार ये चुनौतियां
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अब गठबंधन प्रत्याशी से मुकाबला होने पर जातीय एवं राजनीतिक समीकरण बदलने के पूरे आसार हैं। 2014 के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो भाजपा प्रत्याशी अशोक दोहरे को जितने वोट मिले हैं। उनकी संख्या सपा व बसपा को मिले वोटों से कम है।
हालांकि इस बार चुनाव में शिवपाल सिंह यादव सपा से अलग हैं और जिले में उनकी पकड़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जीत का सेहरा गठबंधन, प्रसपा व कांग्रेस के सिर बंधेगा या फिर भाजपा अपनी जीत दोहराएगी। समूचे राजनीतिक परिदृश्य में चुनौती सिर्फ भाजपा के लिए है।
सपा का गढ़ भी ध्वस्त हो गया था
बगैर गठबंधन की नजर से देखें तो इस अंतर पाटना आसान नहीं था। लेकिन सपा और बसपा के मिले वोटों को मिलाकर गौर करें तो वोटों की संख्या 459504 पर पहुंचती है। यानी भाजपा प्रत्याशी को सपा-बसपा को संयुक्त रूप से मिले वोटों में करीब 20 हजार वोट कम मिले थे। मौजूदा गठबंधन इसी आंकड़े का आधार है।
प्रसपा को भाजपा से फंडिंग हो रही है- सपा
प्रसपा से तो कहीं कोई दिक्कत है ही नहीं। क्षेत्र के आम आदमी के संज्ञान में है कि इन्हें भाजपा से फंडिंग हो रही है। बीजेपी ने सपा बसपा गठबंधन रोकने के लिए इनको लगाया है। आम आदमी जान रहा है कि ये लोग हराने के लिए खड़े हुए हैं। लोग समझ रहे हैं कि यदि प्रसपा का मंसूबा सपा को हराने का है तो बीजेपी ही जीतेगी। पिछली बार तो लहर चल गई थी। हमारे के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी थी। इसका लाभ बीजेपी को मिला था। इस बार बीजेपी के खिलाफ है। - गोपाल यादव, सपा जिलाध्यक्ष
बसपा खुद भाजपा का साथ ले चुकी है- प्रसपा
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कह रखा है कि यूपी की सभी सीटों पर पूरी मजबूती के साथ चुनाव लडे़ंगे। सिर्फ उस सीट पर प्रसपा का प्रत्याशी नहीं होगा, जहां से नेता जी मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ेंगे। प्रसपा के बारे में जो लोग यह कहते हैं कि वह भाजपा की मदद के लिए है वह खुद का अतीत नहीं देखते। बसपा खुद भाजपा का साथ ले चुकी है। सांप्रदायिकता के खिलाफ प्रसपा ही है, जो पूरी मजबूती से संघर्ष कर रही है। - सुनील यादव, प्रसपा जिलाध्यक्ष
जब सपा और बसपा अलग रहते हुए चुनाव लड़ी थी तब भी बसपा को काफी वोट मिले थे। अब तो गठबंधन में तो भाजपा कहीं दिखाई भी नहीं देगी। गोरखपुर व फूलपुर के उपचुनाव में गठबंधन का असर सबने देख लिया है। अब भाजपा चाहे मंदिर बनवाए या मस्जिद बनवाए कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। प्रसपा का भी कोई असर नहीं पड़ने वाला है। भाजपा के बारे में सभी जानते हैं कि वह किन किन लोगों को कहां कहां प्रलोभन देती है। - वीपी सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष
यह गठबंधन नरेंद्र मोदी के डर से बना है- भाजपा
गठबंधन का कोई असर नहीं होगा। पीएम मोदी ने बगैर किसी भेदभाव के जिस तरह से गरीब वर्ग के लिए योजनाएं चलाईं और उनका लाभ मिला। उसे देखते हुए साफ है कि 2014 में बीजेपी प्रत्याशी को जितने वोट मिले थे। इस बार उससे कहीं ज्यादा मिलेंगे। हर कोई जानता है कि एक दूसरे के खिलाफ लड़ने वाले लोगों ने यह गठबंधन ही नरेंद्र मोदी के डर से बना है। इसलिए गठबंधन रहे या न रहे, यूपी में भाजपा की जीतेगी। - कृपा नारायन तिवारी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष
कांग्रेस पूरी ताकत से लड़ेगी चुनाव
जिले की सीट पर कांग्रेस व भाजपा दो राष्ट्रीय पार्टी और क्षेत्रीय पार्टी के तौर पर सपा बसपा के गठबंधन प्रत्याशी में सीधा मुकाबला होगा। कांग्रेस हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह यूपी में सभी सीटों पर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगे। जहां तक प्रसपा का सवाल है तो यह उनका पहला चुनाव होगा। जनता इस पार्टी पर कितना भरोसा करती है यह देखना बाकी है। उदयभान सिंह यादव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष