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किडनी कांड में दिल्ली के पीएसआरआई हॉस्पिटल का सीईओ गिरफ्तार, एसपी ने किया बड़ा खुलासा

Sat, 08 Jun 2019 07:33 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 08 Jun 2019 07:33 PM IST
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CEO of PSRI hospital in police custody brought to Kanpur
पीएसआरआई अस्पताल के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला

किडनी कांड में कानपुर क्राइम ब्रांच ने दिल्ली के पीएसआरआई (पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट) हॉस्पिटल के सीईओ (चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) डॉक्टर दीपक शुक्ला को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। जांच टीम ने शुक्रवार को डॉ. शुक्ला को हॉस्पिटल से हिरासत में लिया था। साक्ष्यों को जुटाने और पूछताछ करने के बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की।

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एसपी क्राइम राजेश यादव के मुताबिक जांच में चार डोनरों के दस्तावेज मिले थे। इसमें लखनऊ का शोएब उर्फ शीबू, वरदान चंद्र, रईस और राजेश गुप्ता शामिल हैं। रईस के लिवर व अन्य तीनों की किडनी का सौदा हुआ था। सत्यापन में इन सभी के दस्तावेज फर्जी पाए गए। प्रत्येक दस्तावेज पर डॉक्टर दीपक शुक्ला के हस्ताक्षर थे। पीएसआरआई हॉस्पिटल में डोनर-रिसीवर की जांचों के साथ ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया हुई जिसके पूरे साक्ष्य पुलिस ने जुटाए। एसपी के मुताबिक इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर दीपक शुक्ला को गिरफ्तार किया गया। 
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कमेटी के हैं हेड दीपक   
किडनी-लिवर के ट्रांसप्लांट के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक कमेटी होती है। इसका मुखिया जिलाधिकारी होता है। इसकेअलावा कमेटी में सीएमओ, डिप्टी सीएमओ सहित तीन से पांच डॉक्टरों का पैनल भी होता है। डोनर-रिसीवर की जांच और दस्तावेज लेकर कमेटी सत्यापन करवाती है।
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एसपी ने बताया कि चूंकि पीएसआरआई में एक साल में 25 से अधिक ट्रांसप्लांट के केस होते थे, इसलिए हॉस्पिटल स्तर पर एक कमेटी बनाई गई थी जिसमें डॉक्टर दीपक हेड हैं। एसपी क्राइम राजेश ने बताया कि जब अंगों के ट्रांसप्लांट की कमेटी की मीटिंग होती थी तो वह खुद मौजूद रहते थे। वही सभी फाइलों को पास करते थे। यहां पर भी दीपक शुक्ला की भूमिका के सुबूत मिले।

हैरानी की बात ये है कि डॉक्टर दीपक ने ही सभी सवाल पूछे

एसपी क्राइम राजेश के मुताबिक कमेटी की मीटिंग की पूरी वीडियोग्राफी कराई जाती है। जांच में वीडियोग्राफी भी देखी गई जिसमें डोनर और रिसीवर से कमेटी के सामने सवाल जवाब किए गए। हैरानी की बात ये है कि डॉक्टर दीपक ने ही सभी सवाल पूछे। अन्य सदस्य महज खानापूरी करते हुए बैठे रहे। इससे पुलिस का कहना है कि यह पूरी तरह से सुनियोजित रहता था।

शुक्रवार को पुलिस ने पीएसआरआई हॉस्पिटल जाकर डॉक्टर दीपक से पूछताछ की थी। पूछताछ की बात कहकर ही उनको लेकर कानपुर आई। डॉक्टर दीपक का कहना था कि वह पुलिस की जांच में मदद करने के लिए आए हैं। शाम को पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी दिखाकर कोर्ट में पेश कर दिया।

बर्रा पुलिस ने 17 फरवरी को किडनी कांड का खुलासा किया था। अभी तक दस आरोपी जेल जा चुके हैं। इसमें पश्चिम बंगाल का टी राजकुमार, लखीमपुर का गौरव मिश्रा, जयपुर का शैलेश सक्सेना, लखनऊ का सबूर अहमद, विक्की और शमशाद अली के साथ श्याम तिवारी उर्फ श्याम मोहन, राजा उर्फ मोहम्मद उमर, रामू पांडेय, गुलाम जुनैद अहमद खान को जेल भेजा जा चुका है। मामले की जांच क्राइम ब्रंाच कर रही है।

दिसंबर 2018 में किदवई नगर निवासी संगीता नाम की महिला को नौकरी दिलाने का झांसा देकर इलाकाई निवासी श्याम तिवारी, कर्रही के मोहित निगम और हमीरपुर मौदहा के जुनैद दिल्ली ले गए थ। यहां पर अपने साथी पश्चिम बंगाल निवासी टी राजकुमार, लखीमपुर निवासी गौरव मिश्रा के साथ मिलकर उसकी किडनी का सौदा कर दिया। भनक लगने के बाद संगीता भागकर कानपुर आई थी। 29 जनवरी को उन्होंने बर्रा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। उसके बाद पुलिस ने स्टिंग कर आरोपियों को गिरफ्तार किया।

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