इस शख्स से है बुंदेलखंड को ढेरों उम्मीदें, पढ़िए ये कैसे बना मोदी-शाह का खास
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साधारण कार्यकर्ता की तरह रहते हैं स्वतंत्रदेव
त्याग और समर्पण स्वतंत्रदेव की सबसे बड़ी ताकत
स्वतंत्रदेव सिंह के साथ ही छात्र जीवन से राजनीति शुरू करने वाले नवनिर्वाचित माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन कहते हैं कि स्वतंत्रदेव सिंह आज जहां तक पहुंचे है उसके पीछे उनका त्याग पार्टी के प्रति समपर्ण और बेतहाशा मेहनत है। परिवारवाद से दूर से जमीनी नेता, अच्छे वक्ता तथा मंच संचालक, प्रदेश के संगठन पर मजबूत पकड़ यही सब काबिलियत पर्दे के पीछे रहने वाले स्वतंत्रदेव सिंह मजबूत नेता बनाती है।
रैलियों की सफलता ने बनाया मोदी-शाह का करीबी
लोकसभा चुनाव के पहले और वर्तमान विधानसभा चुनाव के समय पीएम की सभी 22 रैलियों को सफल कराने के लिए स्वतंत्रदेव सिंह एक सप्ताह पहले से ही रैली वाले जिले में डेरा डाल देते थे, छोटे कार्यकर्ताओं में उत्साह और ऊर्जा का संचार करते हुए रैली को किसी भी तरह सफल कराके ही अगले मिशन के लिए निकलते थे।
प्रदेश सदस्यता अभियान के प्रभारी रहे
स्वतंत्रदेव सिंह 2014 में प्रदेश में बीजेपी सदस्यता अभियान के प्रभारी बनाए गए थे। जिसमें प्रदेश भर से एक करोड़ से ज्यादा नये सदस्य बनाकर स्वतंत्रदेव सिंह ने अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया था।
गांव-किसान के विकास का सपना है मन में
स्वतंत्रदेव सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश के गांव,गरीब,किसान विद्यार्थियों का विकास कर एक विकसित प्रदेश बनाने का सपना उनके मन में हैं, जिसे पूरा करने के लिए ही वो राजनीतिक सफर तय कर रहे हैं।
राजनैतिक सफर
1988-89- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ए.बी.वी.पी.) में संगठन मन्त्री के रूप में कार्य भार ग्रहण किया।
1991- भाजपा कानपुर के युवा शाखा के मोर्चा प्रभारी थे।
1994- बुन्देलखण्ड के युवा मोर्चा के प्रभारी के रूप में विशुद्ध राजनीतिज्ञ के रूप में राजनीति में पदापर्ण किया।
1996- युवा मोर्चा का महामन्त्री नियुक्त किया।
1998- दोबारा भाजपा युवा मोर्चा का महामन्त्री बनाया गया।
2001- भाजपा के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी बने।
2004- विधान परिषद के सदस्य चुने गये व प्रदेश महामन्त्री भी बनाये गये।
2004 से 2014 तक दो बार महामन्त्री
2010- प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए।
2012- फिर महामंत्री बने अभी भी हैं।