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नक्सलियों को असलहे बेचने का मामला: देश विरोधी गतिविधियों में शामिल पांच दोषी हैं जमानत पर बाहर
Wed, 16 Mar 2022 11:44 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 16 Mar 2022 11:44 AM IST
सार
एटीएस कानपुर यूनिट ने 2013 में गिरोह का पर्दाफाश किया था। तब 9 आरोपियों को जेल भेजा था। जिनमें से रमजान अली, कल्लू शर्मा, जुनैद, विमल व एक अन्य को दस-दस साल की सजा सुनाई गई थी। ये सभी 9-9 साल की सजा पूरी कर चुके हैं। वर्तमान में ये जमानत पर जेल से बाहर हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर नक्सलियों को असलहे बेचने के मामले में गिरफ्तार किया गया दसवां आरोपी कुर्बान अली को एटीएस ने जेल भेज दिया है। इस मामले में पहले जेल गए 9 आरोपी दोषी साबित हो चुके हैं। जिनमें से पांच 9-9 साल की सजा काटकर जमानत पर रिहा हैं।
इनको दस-दस साल की सजा मिली है। वहीं अन्य चार दोषी उम्र कैद की सजा काट रहे हैं। एटीएस कानपुर यूनिट ने 2013 में गिरोह का पर्दाफाश किया था। तब 9 आरोपियों को जेल भेजा था। जिनमें से रमजान अली, कल्लू शर्मा, जुनैद, विमल व एक अन्य को दस-दस साल की सजा सुनाई गई थी।
ये सभी 9-9 साल की सजा पूरी कर चुके हैं। वर्तमान में ये जमानत पर जेल से बाहर हैं। इसके अलावा खालिद, सरदार गुरचरन सिंह व उनका लड़का अमित पाल सिंह और एक अन्य को उम्र कैद हुई थी। ये चारों अभी भी जेल में हैं। अब केवल कुर्बान अली के मामले का लखनऊ एटीएस कोर्ट में ट्रायल चलेगा।
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इनको दस-दस साल की सजा मिली है। वहीं अन्य चार दोषी उम्र कैद की सजा काट रहे हैं। एटीएस कानपुर यूनिट ने 2013 में गिरोह का पर्दाफाश किया था। तब 9 आरोपियों को जेल भेजा था। जिनमें से रमजान अली, कल्लू शर्मा, जुनैद, विमल व एक अन्य को दस-दस साल की सजा सुनाई गई थी।
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ये सभी 9-9 साल की सजा पूरी कर चुके हैं। वर्तमान में ये जमानत पर जेल से बाहर हैं। इसके अलावा खालिद, सरदार गुरचरन सिंह व उनका लड़का अमित पाल सिंह और एक अन्य को उम्र कैद हुई थी। ये चारों अभी भी जेल में हैं। अब केवल कुर्बान अली के मामले का लखनऊ एटीएस कोर्ट में ट्रायल चलेगा।
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कुर्बान ने नहीं खोली जुबान
जेल भेजने से पहले एटीएस ने कई घंटे तक कुर्बान अली से पूछताछ की। एटीएस सूत्रों के मुताबिक वह पूरा ठीकरा अपने भाई रमजान अली पर फोड़ता रहा। उसका कहना था कि असलहे उसके भाई बनाते थे। वह गन हाउस में साफ सफाई अन्य काम करता था। अफसरों ने ये भी पूछा कि आखिर इतने साल तक किसने पनाह दी तो उसने किसी का नाम नहीं बताया।
परिवार को ले जाने वाला था सूरत
सूत्रों के मुताबिक कुर्बान अली ने कई वर्षों तक गुजरात में मजदूरी की। उसके ससुराल वालों ने उसकी काफी मदद की। वह अपने मोबाइल से कभी भी परिवार वालों से बातचीत नहीं करता था। यही वजह है कि ट्रेस करने में इतना वक्त लगा। मजदूरी करने के बाद उसने दर्जी का काम शुरू किया। अब वह कुछ ही दिनों में परिवार को भी वहीं ले जाने वाला था।
जेल भेजने से पहले एटीएस ने कई घंटे तक कुर्बान अली से पूछताछ की। एटीएस सूत्रों के मुताबिक वह पूरा ठीकरा अपने भाई रमजान अली पर फोड़ता रहा। उसका कहना था कि असलहे उसके भाई बनाते थे। वह गन हाउस में साफ सफाई अन्य काम करता था। अफसरों ने ये भी पूछा कि आखिर इतने साल तक किसने पनाह दी तो उसने किसी का नाम नहीं बताया।
परिवार को ले जाने वाला था सूरत
सूत्रों के मुताबिक कुर्बान अली ने कई वर्षों तक गुजरात में मजदूरी की। उसके ससुराल वालों ने उसकी काफी मदद की। वह अपने मोबाइल से कभी भी परिवार वालों से बातचीत नहीं करता था। यही वजह है कि ट्रेस करने में इतना वक्त लगा। मजदूरी करने के बाद उसने दर्जी का काम शुरू किया। अब वह कुछ ही दिनों में परिवार को भी वहीं ले जाने वाला था।