फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Case of rape of four-year-old innocent in Banda, court's decision in 24 days

चार वर्षीय मासूम से दुष्कर्म का मामला: 24 दिन में कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 21 साल के दोषी को 22 साल की जेल

Fri, 30 Sep 2022 03:05 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 30 Sep 2022 03:05 PM IST
सार

नरैनी थाना क्षेत्र में चार साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला किया है।  आरोपी को 22 साल की सजा सुनाई है और  20 हजार जुर्माना भी किया है। बता दें कि आरोप पत्र दाखिल होने के 24 दिन में फैसला सुनाया गया है।

विज्ञापन
Case of rape of four-year-old innocent in Banda, court's decision in 24 days
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

बांदा जिले मे चार साल की बच्ची से दुष्कर्म में दोषी 21 वर्षीय युवक को अदालत ने 22 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अन्य धाराओं में भी जेल और जुर्माना किया है। पॉक्सो अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला महज 24 दिन में आया है।

विज्ञापन

नरैनी कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 22 जुलाई की शाम करीब चार बजे चार वर्षीय बेटी घर के बाहर खेल रही थी। आरोपी फरीद उसे टॉफी दिलाने के बहाने अपने घर ले गया और दुष्कर्म किया। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध पॉक्सो और दुष्कर्म सहित कई संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी।
विज्ञापन

आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इस केस में अभियोजन की ओर से पांच गवाह पेश किए गए।  गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अनु सक्सेना ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनी। पत्रावलियों का अवलोकन किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

आरोपी फरीद को दुष्कर्म का दोषी पाते हुए 22 साल जेल की सजा सुनाई। 20 हजार रुपये जुर्माना किया। पाक्सो एक्ट में भी दोषी को 22 साल की जेल और 20 हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया। सभी सजाएं साथ चलेंगी। जुर्माने की आधी रकम पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं। फैसले के दौरान आरोपी फरीद अदालत में मौजूद था।

समाज में ऐसे कृत्यों के लिए माफी नहीं दी जा सकती 
बांदा विशेष लोक अभियोजक कमल सिंह गौतम ने इस मामले की पैरवी की। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में पहले कभी 24 दिनों में निर्णय नहीं हो पाया है। बचाव पक्ष की दलीलों के दौरान अदालत ने कहा कि किसी मासूम से दुष्कर्म करना बहुत ही घिनौना कृत्य है। समाज में ऐसे कृत्यों के लिए माफी नहीं दी जा सकती है।

निर्णय आने पर परिजनों ने किया शोर-शराबा
गुरुवार को निर्णय सुनाए जाने के दौरान दोषी फरीद के परिजन भी अदालत में उपस्थित थे। विशेष न्यायाधीश के निर्णय सुनाते ही परिजनों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। दोषी फरीद ने भी आदेश पत्र में हस्ताक्षर बनाने से मना कर दिया। न्यायाधीश से फरियाद सुनने की अपील की। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप पर दोषी ने हस्ताक्षर बनाए। परिजन भी शांत हो गए।

अदालत में ऐसे चली सुनवाई

  • 5 सितंबर : अदालत में चार्ज बना।
  • 9 सितंबर : पिता और बालिका के बयान दर्ज किए गए।
  • 10 सितंबर : नरैनी सीएचसी महिला डॉक्टर के बयान हुए।
  • 15 सितंबर : विवेचना अधिकारी नरैनी कोतवाली इंस्पेक्टर मनोज शुक्ला के बयान दर्ज हुए।
  • 16 सितंबर : एफआईआर लेखक के बयान लिए गए।

  • 17 सितंबर : आरोपी फरीद के बयान हुए।
  • 18 सितंबर : अदालत में अभियोजन की बहस हुई। बचाव पक्ष की गवाही पूरी हुई।
  • 23 सितंबर : अदालत में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस पूरी हुई।
  • 29 सितंबर : विशेष न्यायाधीश ने सजा सुनाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed