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पुलिस हिरासत से हिस्ट्रीशीटर को भगाने का मामला: भाजपा नेता व अधिवक्ता समेत तीन की जमानत अर्जी खारिज

Mon, 07 Jun 2021 02:59 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 07 Jun 2021 02:59 PM IST
सार

अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने सीएमएम कोर्ट में तीनों की जमानत अर्जी पर पक्ष रखा लेकिन आपराधिक इतिहास और अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने नारायण भदौरिया, गोपाल शरण व रॉकी यादव तीनों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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case of Dispute between BJP workers and police, bail application of advocates narayan bhadauria and gopal sharan rejected
पुलिस पर हमला कर अपराधी को भगाने का मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुलिस हिरासत से हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह को भगाने के मामले में आरोपियों नारायण सिंह भदौरिया, गोपाल शरण सिंह चौहान व रॉकी यादव की जमानत सोमवार को निचली अदालत ने खारिज कर दी। इसके बाद आननफानन में सेशन कोर्ट मेें अर्जी लगाई गई, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होगी। उधर, सुनवाई को लेकर कचहरी में दिनभर आपाधापी का माहौल रहा।
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नारेबाजी और हंगामा होता रहा। कोरोना काल के चलते कचहरी में सामान्य कामकाज बंद हैं। इसलिए डेढ़ माह से कचहरी में सन्नाटा है, लेकिन नौबस्ता के एक गेस्ट हाउस के बाहर हुई इस घटना में दो वकीलों की गिरफ्तारी के बाद कचहरी का माहौल गरमा गया है। वर्चुअल माध्यम से अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने आरोपी वकील नारायण सिंह भदौरिया, गोपाल शरण सिंह चौहान व एक अन्य रॉकी यादव की ओर से जमानत पर बहस की।
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कहा कि उन्हें गलत फंसाया गया है। कार्यक्रम स्थल के बाहर कुछ लोग झगड़ा कर रहे थे, जिनका बीच-बचाव कराया गया। हिस्ट्रीशीटर से उनका कोई लेनादेना नहीं है। वहीं अभियोजन ने उन पर हिस्ट्रीशीटर को भगाने और पुलिस पर हमले का आरोप लगाया। बताया कि नारायण सिंह के खिलाफ पांच और गोपाल शरण के खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रभारी एसीएमएम तृतीय शैलेंद्र यादव ने तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। वहीं एक अन्य आरोपी रणधीर तोमर उर्फ नीशू का आपराधिक इतिहास मंगाने का आदेश दिया। जमानत खारिज होने की सूचना मिलते ही वकीलों में आक्रोश फैल गया। कचहरी में घूम-घूमकर पुलिस-प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए। 

यह था मामला
नौबस्ता स्थित आकर्षण गेस्ट हाउस में दो जून की दोपहर भाजपा के पूर्व दक्षिण जिला मंत्री नारायण सिंह भदौरिया की जन्मदिन पार्टी थी। इसमें पार्टी नेताओं के साथ कई अधिवक्ता भी मौजूद थे। पार्टी में बर्रा थाने का हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह भी पहुंचा था, जिसकी खबर पुलिस को लग गई। नौबस्ता पुलिस ने दबिश देकर मनोज को गिरफ्तार कर लिया और जीप में बैठाकर थाने ले जाने लगी।
 

इसी बीच कुछ लोगों ने धक्का-मुक्की व मारपीट कर मनोज को भगा दिया था। नौबस्ता पुलिस ने नारायण सिंह समेत नौ नामजद व 8-10 अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, 7 सीएलए आदि में रिपोर्ट दर्ज की थी। अगले दिन मनोज सिंह को नौबस्ता से, जबकि आरोपी नारायण सिंह, गोपाल शरण चौहान व रॉकी यादव को नोएडा से गिरफ्तार किया गया था।

रात में मिल सकी थी रिमांड
नारायण सिंह और गोपाल शरण अधिवक्ता हैं। शनिवार को पुलिस को इन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना था। दिनभर अधिवक्ताओं का हुजूम कचहरी के बाहर इकट्ठा रहने और अनहोनी की आशंका के मद्देनजर पुलिस ने रात लगभग नौ बजे दोनों को रिमांड मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया था। जहां तीनों की जमानत अर्जी भी दाखिल कर दी गई थी लेकिन आपराधिक इतिहास मंगाने के नाम पर अभियोजन ने समय मांगा था। इस पर कोर्ट ने सोमवार की तारीख नियत कर दी थी।

भारी पुलिस बल तैनात
अधिवक्ता की जमानत पर सुनवाई और कचहरी में अचानक बढ़ी वकीलों की भीड़ का फायदा उठाकर कुछ अराजकतत्व उपद्रव कर सकते हैं। पुलिस को खुफिया तंत्र से मिली इस सूचना के बाद कचहरी के आसपास सुबह से ही भारी फोर्स तैनात कर दिया गया था। 
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