{"_id":"5d10dc938ebc3e2b1e6681a0","slug":"case-file-against-accused-for-scam-in-cooperative-society","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सहकारी समिति में लाखाें के घोटाले में 8 पर केस, तत्कालीन अध्यक्ष सचिव और अधिकारियों पर भी गिरी गाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सहकारी समिति में लाखाें के घोटाले में 8 पर केस, तत्कालीन अध्यक्ष सचिव और अधिकारियों पर भी गिरी गाज
Mon, 24 Jun 2019 07:53 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
यूपी डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 24 Jun 2019 07:53 PM IST
विज्ञापन
घोटाला
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्रुखाबाद में किसान सेवा सहकारी समिति दक्षिणी व उसकी मिनी बैंक (निक्षेप केंद्र) में 77 लाख रुपये घोटाले की जांच में पुष्टि हुई है। अपर जिला सहकारी अधिकारी (एडीसीओ) ने जांच कर तहरीर दी। उच्चाधिकारियों के आदेश पर सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव समेत अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज हो गया है।
किसान सेवा सहकारी समिति दक्षिणी में 23 जनवरी 2006 से 4 सितंबर 2018 तक श्याम सिंह प्रबंध निदेशक रहे। समिति में घोटाला प्रकाश में आने के बाद सितंबर में ही उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद सहायक आयुक्त सहकारिता के आदेश पर जांच शुरू की गई। एडीसीओ विनोद कटियार ने जांच की तो पता चला कि एक अप्रैल 2010 से मार्च 2012 तक छोड़कर 21 जून 2006 से लेकर 4 सितंबर 2018 तक की कैशबुक व अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख श्याम सिंह ने गायब कर दिए हैं। उनके नष्ट होने की आशंका है।
विज्ञापन
किसान सेवा सहकारी समिति दक्षिणी में 23 जनवरी 2006 से 4 सितंबर 2018 तक श्याम सिंह प्रबंध निदेशक रहे। समिति में घोटाला प्रकाश में आने के बाद सितंबर में ही उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद सहायक आयुक्त सहकारिता के आदेश पर जांच शुरू की गई। एडीसीओ विनोद कटियार ने जांच की तो पता चला कि एक अप्रैल 2010 से मार्च 2012 तक छोड़कर 21 जून 2006 से लेकर 4 सितंबर 2018 तक की कैशबुक व अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख श्याम सिंह ने गायब कर दिए हैं। उनके नष्ट होने की आशंका है।
विज्ञापन
श्याम सिंह ने अभिलेखों में तिथियां बदल कर दर्ज की हैं तथा पूर्ण अंकन नहीं किया गया है। निक्षेप केंद्र यानी मिनी बैंक में 56,97,969 रुपये का गबन किया गया है। इसमें श्याम सिंह के साथ पूर्व कैशियर लज्जाराम भी दोषी हैं। साथ ही समिति में 13,87,544 रुपये की खाद की बिक्री कर गबन कर लिया गया है। तत्कालीन अध्यक्ष अरविंद यादव के पुत्र अतुलकांत की नियम विरुद्ध नियुक्ति दर्शाकर 2,11,860 रुपये वेतन के रूप में निकालकर घोटाला किया गया।
अध्यक्ष व श्याम सिंह ने मिलकर समिति परिसर में खड़े 1.80 लाख रुपये के पेड़ कटवाकर बेच लिए। अध्यक्ष अरविंद सिंह यादव के भाई दिलीप सिंह एक्स कैडर चयन कराने में दोषी पाए गए। पूर्व कैशियर लज्जाराम निबंधकों के आदेशों के विपरीत श्याम सिंह व अतुलकांत को सेवा विस्तार देकर 3 लाख 24 हजार की क्षति पहुंचाने में दोषी हैं।
अध्यक्ष व श्याम सिंह ने मिलकर समिति परिसर में खड़े 1.80 लाख रुपये के पेड़ कटवाकर बेच लिए। अध्यक्ष अरविंद सिंह यादव के भाई दिलीप सिंह एक्स कैडर चयन कराने में दोषी पाए गए। पूर्व कैशियर लज्जाराम निबंधकों के आदेशों के विपरीत श्याम सिंह व अतुलकांत को सेवा विस्तार देकर 3 लाख 24 हजार की क्षति पहुंचाने में दोषी हैं।
तत्कालीन सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता फर्रुखाबाद संतोष सिंह यादव एवं सचिव महाप्रबंधन जिला सहकारी बैंक फर्रुखाबाद सुनील कुमार श्रीवास्तव को अवैधानिक तरीके से श्याम सिंह को कैडर सचिव चयन करने में दोषी पाया है। इससे अधिकारियों के संरक्षण में भारी रकम गबन की गई। तत्कालीन उपायुक्त एवं उपनिबंधक कानपुर मंडल हीरालाल यादव अवैधानिक नियुक्त करने के सहयोग देने में दोषी हैं।
जांच के बाद एडीसीओ विनोद कटियार ने 13 फरवरी 2019 को कोतवाली में तहरीर दी थी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद पिछले संपूर्ण समाधान दिवस में वर्तमान अध्यक्ष सुशील राजपूत डीएम से मिले थे। डीएम ने कोतवाल को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अध्यक्ष कुछ नेताओं के साथ फर्रुखाबाद में एआर कोऑपरेटिव और फिर एएसपी से मिले तब कार्रवाई हुई।
पुलिस ने एडीसीओ की तहरीर पर पूर्व प्रबंध निदेशक श्याम सिंह, पूर्व कैशियर लज्जाराम, पूर्व अध्यक्ष अरविंद यादव उनके पुत्र अतुलकांत सिंह, भाई दिलीप सिंह, तत्कालीन सहायक आयुक्त संतोष सिंह, महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक सुनील कुमार, तत्कालीन उपायुक्त कानपुर हीरालाल यादव के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन, अभिलेख गायब करने जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
जांच के बाद एडीसीओ विनोद कटियार ने 13 फरवरी 2019 को कोतवाली में तहरीर दी थी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद पिछले संपूर्ण समाधान दिवस में वर्तमान अध्यक्ष सुशील राजपूत डीएम से मिले थे। डीएम ने कोतवाल को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अध्यक्ष कुछ नेताओं के साथ फर्रुखाबाद में एआर कोऑपरेटिव और फिर एएसपी से मिले तब कार्रवाई हुई।
पुलिस ने एडीसीओ की तहरीर पर पूर्व प्रबंध निदेशक श्याम सिंह, पूर्व कैशियर लज्जाराम, पूर्व अध्यक्ष अरविंद यादव उनके पुत्र अतुलकांत सिंह, भाई दिलीप सिंह, तत्कालीन सहायक आयुक्त संतोष सिंह, महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक सुनील कुमार, तत्कालीन उपायुक्त कानपुर हीरालाल यादव के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन, अभिलेख गायब करने जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।