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कॉर्डियक ‘अटैक’ ऑन रोड
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Sat, 05 Dec 2015 02:18 AM IST
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लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान (कॉर्डियोलॉजी) के कुछ डॉक्टरों ने अपनी लूट-खसोट की पोल खुलने पर शुक्रवार को दबाव बनाने के लिए अस्पताल के कर्मचारियों और तीमारदारों को समझा कर-हड़काकर सड़क पर उतारा और अति व्यस्त जीटी रोड पर जाम लगवा दिया।
पोल खोलने पर ‘अमर उजाला’ के खिलाफ नारेबाजी की। जाम से सैकड़ों वाहनों के अलावा कई एंबुलेंस भी फंस गईं और कई मरीजों की जान पर बन आई। एंबुलेंस में एक मरीज की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसके परिजन सड़क पर उतर कर रोने लगे।
तब क्षेत्रीय लोगों ने एंबुलेंस से मरीज को स्ट्रेचर सहित उठाकर सड़क पार कराई फिर जाली के ऊपर से स्ट्रेचर फंदाकर बमुश्किल मरीज को कॉर्डियोलॉजी पहुंचाया लेकिन वहां स्टाफ और डॉक्टर गायब होने से उसे काफी देर तक उपचार नहीं मिला। इसी तरह सारा स्टाफ सड़क पर उतर आने से भर्ती सैकड़ों मरीजों की तीमारदारी भी घंटों रुकी रही।
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जाम लगाने वाले डॉ. राकेश वर्मा का पक्ष ले रहे थे जिन पर अनियमितता के गंभीर आरोप लगे हैं और इसके प्रमाण भी हैं। जाम लगाने वालों की पहचान डॉ. वर्मा के ऑफिस में काम करने वाले ठेकेदार के गुर्गों, करोड़पति बन चुके यहां के टेक्नीशियनों के बाहरी साथियों, कुछ मेडिकल स्टोर्स के कर्मचारियों के रूप में हुई है। प्रशासन इन पर कड़ी कार्रवाई की बात कह रहा है।
दरअसल, अमर उजाला ने कॉर्डियोलॉजी में डॉक्टरों की मनमानी, मरीजों से लूट-खसोट, भ्रष्टाचार पर अभियान चलाया हुआ है। इससे कुछ डॉक्टर बौखला गए हैं। शुक्रवार सुबह तकरीबन 11 बजे कुछ लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर सड़क जाम कर दी। वह डॉ. राकेश वर्मा के समर्थन में जाम लगाने की बात कह रहे थे और कॉर्डियोलॉजी के संबंध में छप रही खबरों को नकारात्मक पत्रकारिता बता रहे थे।
इनमें से कई ऐसे भी थे जिन्हें नकारात्मक और सकारात्मक की समझ भी नहीं थी। जीटी रोड पर जाम लगने से देखते ही देखते वाहनों की कतार लग गई। जाम की सूचना पर एसीएम राजेंद्र त्रिपाठी और सीओ नजीराबाद मौके पर पहुंचे। एसीएम ने जाम लगाने वालों से ज्ञापन मांगा तो वह बगलें झांकने लगे। एसीएम ने 10 मिनट इंतजार भी किया लेकिन जब कोई नहीं आया तो उन्होंने सभी को फटकार लगाई तो सभी भाग खड़े हुए।
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पोल खोलने पर ‘अमर उजाला’ के खिलाफ नारेबाजी की। जाम से सैकड़ों वाहनों के अलावा कई एंबुलेंस भी फंस गईं और कई मरीजों की जान पर बन आई। एंबुलेंस में एक मरीज की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसके परिजन सड़क पर उतर कर रोने लगे।
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तब क्षेत्रीय लोगों ने एंबुलेंस से मरीज को स्ट्रेचर सहित उठाकर सड़क पार कराई फिर जाली के ऊपर से स्ट्रेचर फंदाकर बमुश्किल मरीज को कॉर्डियोलॉजी पहुंचाया लेकिन वहां स्टाफ और डॉक्टर गायब होने से उसे काफी देर तक उपचार नहीं मिला। इसी तरह सारा स्टाफ सड़क पर उतर आने से भर्ती सैकड़ों मरीजों की तीमारदारी भी घंटों रुकी रही।
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जाम लगाने वाले डॉ. राकेश वर्मा का पक्ष ले रहे थे जिन पर अनियमितता के गंभीर आरोप लगे हैं और इसके प्रमाण भी हैं। जाम लगाने वालों की पहचान डॉ. वर्मा के ऑफिस में काम करने वाले ठेकेदार के गुर्गों, करोड़पति बन चुके यहां के टेक्नीशियनों के बाहरी साथियों, कुछ मेडिकल स्टोर्स के कर्मचारियों के रूप में हुई है। प्रशासन इन पर कड़ी कार्रवाई की बात कह रहा है।
दरअसल, अमर उजाला ने कॉर्डियोलॉजी में डॉक्टरों की मनमानी, मरीजों से लूट-खसोट, भ्रष्टाचार पर अभियान चलाया हुआ है। इससे कुछ डॉक्टर बौखला गए हैं। शुक्रवार सुबह तकरीबन 11 बजे कुछ लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर सड़क जाम कर दी। वह डॉ. राकेश वर्मा के समर्थन में जाम लगाने की बात कह रहे थे और कॉर्डियोलॉजी के संबंध में छप रही खबरों को नकारात्मक पत्रकारिता बता रहे थे।
इनमें से कई ऐसे भी थे जिन्हें नकारात्मक और सकारात्मक की समझ भी नहीं थी। जीटी रोड पर जाम लगने से देखते ही देखते वाहनों की कतार लग गई। जाम की सूचना पर एसीएम राजेंद्र त्रिपाठी और सीओ नजीराबाद मौके पर पहुंचे। एसीएम ने जाम लगाने वालों से ज्ञापन मांगा तो वह बगलें झांकने लगे। एसीएम ने 10 मिनट इंतजार भी किया लेकिन जब कोई नहीं आया तो उन्होंने सभी को फटकार लगाई तो सभी भाग खड़े हुए।