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दारा सिंह की रिहाई के लिए ट्विटर पर अभियान: 'योद्धा दारा सिंह को रिहा करो' के साथ पूरे दिन सैकड़ों लोगों ने किए ट्वीट
Wed, 13 Oct 2021 10:41 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, औरैया
अमर उजाला नेटवर्क, औरैया
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 13 Oct 2021 10:41 AM IST
सार
आस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस एवं उनके दो छोटे-छोटे बेटे को भीड़ द्वारा जलाकर हत्या करने के मामले में साल 2000 से आजीवन कारावास की सजा काट रहे दारा सिंह को रिहा करने की मांग मंगलवार को सोशल मीडिया पर उठी। योद्धा दारा सिंह को रिहा करो के साथ पूरे दिन सैकड़ों लोगों ने ट्वीट किए
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दारा सिंह की रिहाई के लिए ट्विटर पर अभियान
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
उड़ीसा के क्योंझर में हुए ग्राहम स्टेंस एवं उनके दो छोटे-छोटे बच्चों की भीड़ द्वारा कार में जलाकर हत्या करने के मामले में औरैया निवासी दारा सिंह आजीवन कारावास काट रहा है। वर्ष 2000 से आजीवन कारावास की सजा काट रहे दारा सिंह को रिहा करने की मांग ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर जोर पकड़ा।
'हैज टैग हिंदू योद्धा दारा सिंह को रिहा करो' के साथ पूरे दिन सैकड़ों लोगों ने ट्विटर पर मांग करते रहे। वर्ष 1999 में 22 जनवरी को उड़ीसा के क्योंझर में आस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस एवं उनके दो छोटे-छोटे बेटे कार में सो रहे थे। रात में भीड़ ने कार में आग लगा दी थी। इससे तीनों की जलकर मौत हो गई थी।
इस मामले में औरैया के ककोर निवासी रविंद्र कुमार उर्फ दारा सिंह को भीड़ की अगुवाई करने में मुख्य आरोपी बनाया गया था। वर्ष 2000 में दारा सिंह को जेल हुई थी। इसके बाद सीबीआई अदालत ने वर्ष 2003 में फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में ओडिशा उच्च न्यायालय ने वर्ष 2005 में उम्र कैद में परिवर्तित कर दिया था।
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वर्ष 2011 में उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखा था। वर्ष 2000 से लगातार दारा सिंह क्योंझर की जेल में बंद है। मंगलवार को ट्विटर पर दारा सिंह को रिहा करने की मांग ने जोर पकड़ा। सैकड़ों लोगों ने दारा सिंह को रिहा करने की मांग की। हालांकि ट्विटर पर इस मांग के समर्थन में औरैया जिले के इक्का-दुक्का लोगों के ही सम्मिलित होने की जानकारी मिली है।
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'हैज टैग हिंदू योद्धा दारा सिंह को रिहा करो' के साथ पूरे दिन सैकड़ों लोगों ने ट्विटर पर मांग करते रहे। वर्ष 1999 में 22 जनवरी को उड़ीसा के क्योंझर में आस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस एवं उनके दो छोटे-छोटे बेटे कार में सो रहे थे। रात में भीड़ ने कार में आग लगा दी थी। इससे तीनों की जलकर मौत हो गई थी।
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इस मामले में औरैया के ककोर निवासी रविंद्र कुमार उर्फ दारा सिंह को भीड़ की अगुवाई करने में मुख्य आरोपी बनाया गया था। वर्ष 2000 में दारा सिंह को जेल हुई थी। इसके बाद सीबीआई अदालत ने वर्ष 2003 में फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में ओडिशा उच्च न्यायालय ने वर्ष 2005 में उम्र कैद में परिवर्तित कर दिया था।
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वर्ष 2011 में उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखा था। वर्ष 2000 से लगातार दारा सिंह क्योंझर की जेल में बंद है। मंगलवार को ट्विटर पर दारा सिंह को रिहा करने की मांग ने जोर पकड़ा। सैकड़ों लोगों ने दारा सिंह को रिहा करने की मांग की। हालांकि ट्विटर पर इस मांग के समर्थन में औरैया जिले के इक्का-दुक्का लोगों के ही सम्मिलित होने की जानकारी मिली है।
मांग करने वालों ने लिखा कि उम्र कैद की सजा 20 वर्षों में पूरी हो जाती है। दारा सिंह को माता-पिता की मौत के बावजूद एक दिन के लिए भी पैरोल पर रिहा नहीं किया गया। अब उन्हें जेल से रिहा किया जाए।
16 वर्ष बाद पिता की अस्थियां की प्रवाह
दारा सिंह के ककोर निवासी भाई अरविंद कुमार पाल ने बताया कि उनके पिता मिहीलाल की मौत वर्ष 2005 में एवं माता राजरानी की मौत वर्ष 2012 में हुई थी। मौत के बाद भाई को पैरोल पर रिहा करने की मांग की थी। परंतु उन्हें पैरोल पर भी रिहा नहीं किया गया। भाई के रिहा होने के इंतजार में माता-पिता की अस्थियां विसर्जन के लिए रखीं थीं।
बताया कि मेरी बेटी शादी लायक है। इसलिए जानकारों से राय ली तो बताया कि जब तक माता-पिता की अस्थियां विसर्जित नहीं हो जाती। तब तक मांगलिक कार्य शुरू नहीं होंगे। इसलिए 15 दिन पहले माता-पिता की अस्थियां विसर्जित की गईं। बताया कि प्रधानमंत्री से लेकर उड़ीसा के राज्यपाल को रिहा करने की मांग संबंधी पत्र भेजे गए।
16 वर्ष बाद पिता की अस्थियां की प्रवाह
दारा सिंह के ककोर निवासी भाई अरविंद कुमार पाल ने बताया कि उनके पिता मिहीलाल की मौत वर्ष 2005 में एवं माता राजरानी की मौत वर्ष 2012 में हुई थी। मौत के बाद भाई को पैरोल पर रिहा करने की मांग की थी। परंतु उन्हें पैरोल पर भी रिहा नहीं किया गया। भाई के रिहा होने के इंतजार में माता-पिता की अस्थियां विसर्जन के लिए रखीं थीं।
बताया कि मेरी बेटी शादी लायक है। इसलिए जानकारों से राय ली तो बताया कि जब तक माता-पिता की अस्थियां विसर्जित नहीं हो जाती। तब तक मांगलिक कार्य शुरू नहीं होंगे। इसलिए 15 दिन पहले माता-पिता की अस्थियां विसर्जित की गईं। बताया कि प्रधानमंत्री से लेकर उड़ीसा के राज्यपाल को रिहा करने की मांग संबंधी पत्र भेजे गए।