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बिल्डर्स व ज्वैलर्स की बेनामी संपत्तियां मिलीं

Fri, 15 Jul 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Fri, 15 Jul 2016 01:19 AM IST
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Builders and jewelers had assets Anonymous
Labourers found Gold jewelry during desilting tank in vellore - फोटो : demo
कानपुर। एनआरआई सिटी, रघुनाथ इंटरनेशनल, सर पान मसाला के मालिक ओपी अग्रवाल व लाला पुरुषोत्तम दास ज्वैलर्स के प्रोपराइटर पुरुषोत्तम दास गुप्ता के यहां आयकर अधिकारियों की जांच बीते 40 घंटे से जारी है। गुरुवार को छापेमारी का दायरा बढ़कर शहर में 35 व देश भर में करीब सौ ठिकानों तक पहुंच गया।  यहां बड़े पैमाने पर बेनामी प्रॉपर्टी, नकदी, ज्वैलरी मिली है। अंडमान निकोबार द्वीप समूह में भी रियल एस्टेट व पान मसाला कारोबार होने की सूचना पर वहां भी कई टीमों ने एक साथ छापामारी की।
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प्रधान आयकर निदेशक (जांच) विनय कृष्ण झा के निर्देश पर संयुक्त आयकर निदेशक अमरेश कुमार तिवारी की अगुवाई में छापामारी की जा रही है। अभियान में 300 से अधिक अधिकारी शामिल हैं। सौ अधिकारियों की टीम सिर्फ शहर में ही काम कर रही है। जांच के दौरान कड़ी जुड़ने पर गुरुवार को शहर में दोनों कारोबारियों के 10 और ठिकानों पर रेड हुई।  इसी तरह दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, गोवा, हरिद्वार के बाद अंडमान निकोबार तक कारोबार फैला होने की पुष्टि हुई। इन शहरों में गुरुवार को करीब 30 और ठिकाने जांच के दायरे में आए। हर जगह कुछ न कुछ बेनामी संपत्ति सामने आई है। कई जगह कैश और ज्वैलरी मिली है। दस्तावेजों से इनका मिलान किया जा रहा है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि जांच का दायरा बड़ा होने की वजह से कुल अघोषित संपत्ति का आकलन नहीं हो पाया है। पुरुषोत्तम दास ज्वैलर्स के यहां स्टॉक और दस्तावेज में व्यापक अंतर पाया गया। कच्चे पर्चों पर बिलिंग सामने आई है। छापामार टीमों का नेतृत्व सहायक आयकर आयुक्त केके मिश्रा, डॉ. सौरभ आनंद एवं उप आयकर आयुक्त वेद प्रकाश कर रहे हैं।
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कीमत करोड़ों की, दिखा रहे कौड़ियों में
कानपुर। हाई प्रोफाइल लोगों के लिए करोड़ों की कीमत के लग्जरी फ्लैट बना रहे बिल्डर्स कागजों में इनकी कीमत कौड़ियों में दिखा रहे हैं। छोटे फ्लैटों में 50 फीसदी तक ब्लैक मनी ली जा रही है। यानी फ्लैट की वास्तविक कीमत यदि एक करोड़ रुपये है तो कागजों में इसे 50 से 60 लाख रुपये कीमत का ही दिखाया जा रहा है। बाकी रकम नकद ली जा रही है, जिसका कोई रिकार्ड नहीं मिलता। आयकर विभाग की जांच में यह ट्रेंड सामने आया है। बिल्डरों की इस कारस्तानी से न सिर्फ करोड़ों रुपये टैक्स की चोरी हो रही है बल्कि सैकड़ों करोड़ रुपये कालाधन भी तैयार हो रहा है। आयकर अधिकारियों की जांच में अब फ्लैटों की संख्या और विभिन्न शहरों में सर्किल रेट और बाजार रेट के हिसाब से कालाधन का आकलन किया जाएगा।
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खरीदारों पर भी कसेगा शिकंजा
विभागीय सूत्रों का कहना है कि बिल्डरों के यहां छापामारी के दौरान अब उन लोगों का रिकार्ड भी लिया जाएगा जिन्होंने फ्लैट खरीदे हैं। यदि फ्लैट की वास्तवित कीमत से दी गई कीमत कम पाई जाएगी तो उन पर भी शिकंजा कसा जाएगा। शहर में ऐसे लोगों की संख्या 50 हजार से ऊपर है।

मंदी का दौर, तो कैसे चल रहे प्रोजेक्ट
आयकर अधिकारियों का कहना है कि रियल एस्टेट कारोबार में मंदी की बात कही जा रही है। बावजूद इसके हर बिल्डर के कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। यानी फ्लैट बिक नहीं रहे फिर भी बिल्डिंगें खड़ी हो रही हैं। इस बात की जांच की जा रही है कि एक प्रोजेक्ट से कितनी कमाई हुई और कीतनी कीमत का प्रोजेक्ट शुरू किया गया। 
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