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बजट ः कानपुर सफाचट
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Tue, 01 Mar 2016 01:08 AM IST
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इस बजट से उद्योगों को भी झटका लगा है। दरअसल, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने कंपनी प्रारूप के अंतर्गत काम कर रहे उद्यमों पर आयकर की स्लैब का प्रावधान व्यक्ति करदाताओं की तरह करने की मांग की थी। इसके अलावा आंतरिक रिसर्च एवं डेवलपमेंट पर हुए खर्च में आयकर छूट मांगी गई थी। अभी तक उन्हीं उद्योगों को यह छूट दी जाती है जो निर्माण इकाइयां हैं। उन इकाइयों को भी छूट मिलने की मांग थी जो प्रोसेसिंग के जरिए निर्माण करती हैं। इसके अलावा प्लांट एवं मशीनरी पर डेप्रिसिएशन की दर 15 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी की करने, हानि के मामले में आयकर रिटर्न दाखिल करने में वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक की देरी को माफ करने, बीते वर्षों के मुनाफे से वर्तमान नुकसान की भरपाई का भी प्रावधान की मांग की गई थी। इसी तरह नगद भुगतान की सीमा को 20 हजार से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये करने की मांग की थी। इनमें से एक भी मांग पूरी नहीं हुई। इससे उद्योग जगत में निराशा है।
लाल इमली को चलाने के लिए कपड़ा मंत्रालय के प्रयास भी धरे रह गए। रिवाइवल प्लान स्वीकृत करने के बावजूद बजट में धनराशि का प्रावधान नहीं किया गया। माना जा रहा है कि बजट में यदि इसकी घोषणा नहीं हुई तो अभी भी लाल इमली में उत्पादन शुरू होने पर आशंका है। बता दें कि बजट में मिल के लिए बजट का प्रावधान कराने के लिए ही कपड़ा मंत्रालय ने आनन फानन में रिवाइवल प्लान को स्वीकृति दी थी। सूती मिल मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष बीएम त्रिपाठी ने कहा कि बजट में मिल के लिए धनराशि न मिलने से निराशा हाथ लगी है।
व्यापारी वर्ग को भी इस बजट से खासी उम्मीदें थी। खासकर खुदरा व्यापारियों को। ऑनलाइन कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए नियामक आयोग बनाने की सरकार से गुहार की गई थी। इसी तरह से सरकार से नगद खरीद पर पैन कार्ड अनिवार्यता की सीमा पांच लाख करने, खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम में संशोधन कर इसे सरल बनाने, जीएसटी में उत्पादक या विदेशों से आयात पर प्रथम बिंदु पर टैक्स लगाने, व्यापारियों के लिए दुर्घटना बीमा और पेंशन की व्यवस्था करने, व्यापारी कल्याण आयोग का गठन करने की मांग की गई थी। इनमें से कोई भी मांग पूरी नहीं हुई। आयकर की सीमा न बढ़ाए जाने से भी नाराजगी है।
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लाल इमली को चलाने के लिए कपड़ा मंत्रालय के प्रयास भी धरे रह गए। रिवाइवल प्लान स्वीकृत करने के बावजूद बजट में धनराशि का प्रावधान नहीं किया गया। माना जा रहा है कि बजट में यदि इसकी घोषणा नहीं हुई तो अभी भी लाल इमली में उत्पादन शुरू होने पर आशंका है। बता दें कि बजट में मिल के लिए बजट का प्रावधान कराने के लिए ही कपड़ा मंत्रालय ने आनन फानन में रिवाइवल प्लान को स्वीकृति दी थी। सूती मिल मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष बीएम त्रिपाठी ने कहा कि बजट में मिल के लिए धनराशि न मिलने से निराशा हाथ लगी है।
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व्यापारी वर्ग को भी इस बजट से खासी उम्मीदें थी। खासकर खुदरा व्यापारियों को। ऑनलाइन कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए नियामक आयोग बनाने की सरकार से गुहार की गई थी। इसी तरह से सरकार से नगद खरीद पर पैन कार्ड अनिवार्यता की सीमा पांच लाख करने, खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम में संशोधन कर इसे सरल बनाने, जीएसटी में उत्पादक या विदेशों से आयात पर प्रथम बिंदु पर टैक्स लगाने, व्यापारियों के लिए दुर्घटना बीमा और पेंशन की व्यवस्था करने, व्यापारी कल्याण आयोग का गठन करने की मांग की गई थी। इनमें से कोई भी मांग पूरी नहीं हुई। आयकर की सीमा न बढ़ाए जाने से भी नाराजगी है।
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