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Kanpur News: क्रोमियम जांच में बजट बना रोड़ा, तीन माह से 180 लोगों की रिपोर्ट का इंतजार
Fri, 25 Sep 2026 01:47 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 25 Sep 2026 01:47 AM IST
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कानपुर देहात। क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र के लोगों में क्रोमियम के असर का पता लगाने और सेहत का ध्यान रखने के लिए करवाई जा रही रक्त व पेशाब की जांच तीन माह से बंद है। इससे पहले दो माह में भेजे गए 180 सैंपल की रिपोर्ट भुगतान न हो पाने की वजह से लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में अटकी पड़ी है। इससे क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ रहा है।
रनियां में खानचंदपुर-मटियामऊ मार्ग पर डंप किए गए क्रोमियम के 20 साल से ज्यादा खुले में पड़े रहने व बाद में किस्तों में हुए निस्तारण से खानचंदपुर सहित करीब 11 स्थानों का भूजल दूषित हुआ। इससे लोगों के शरीर में क्रोमियम, मर्करी व फ्लोराइड जैसे घातक तत्व का असर दिखने लगा। एनजीटी ने प्रभावित क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति की जांच करवाने व प्रभावी उपचार देकर लोगों को क्रोमियम के खतरे से बचाने के निर्देश दिए थे।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक माह अभियान चलाकर 90 लोगों के रक्त व पेशाब के नमूने लेकर डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट लखनऊ में जांच करवाई जा रही थी। स्वास्थ्य विभाग के पास बजट न होने से मई व जून माह में जांच के लिए भेजे गए सैंपल का भुगतान नहीं हो सका है। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग करीब तीन माह बीत जाने के बाद भी इन सैंपल की जांच रिपोर्ट नहीं मंगवा पा रहा है। वहीं, विभाग की ओर से जुलाई माह से सैंपलिंग का कार्य भी बंद कर दिया गया है। जांचें रुक जाने से स्वास्थ्य टीम को लोगों में क्रोमियम की स्थिति पता कर उपचार देने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बोले ग्रामीण
समय से जांच होने के बाद लोगों को उपचार दिए जाने से लोगों का बचाव हो पाएगा। पूर्व में भेजे गए सैंपल की जांच रिपोर्ट नहीं आई है और प्रतिमाह होने वाली सैंपलिंग भी बंद कर दी गई है। ग्रामीणों को जांच रिपोर्ट नहीं दी जाती थी लेकिन अब जांच न होने से लोगों पर आने वाले खतरा क्षेत्र में काम करने वाली स्वास्थ्य टीम को भी पता नहीं चल पा रहा है। -अरुण पाल, खानचंद्रपुर
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पूर्व में जिन लोगों में मानक से अधिक क्रोमियम निकल चुका है, उनकी दोबारा जांच कर पता लगाया जाना चाहिए कि क्रोमियम का स्तर बढ़ा है या घटा है लेकिन विभाग अभी तक गांव के प्रत्येक व्यक्ति की जांच नहीं करवा पाया है। पूर्व की तरह बीच में ही जांच बंद कर दी गई। इसे दोबारा शुरू किया जाए। - हरिश्चंद्र, खानचंद्रपुर
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एक जांच में खर्च करना पड़ता है एक हजार रुपये
सीएमओ डॉ. जय गोविंद ने बताया कि क्रोमियम जैसे भारी तत्वों की जांच के लिए अत्याधुनिक लैब की आवश्यकता होती है। जिले में जांच की सुविधा न होने पर क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र से लोगों के लिए जाने वाले सैंपल की जांच डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में करवाई जाती है। एक सैंपल की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग को करीब एक हजार रुपये खर्च करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक करीब 1028 लोगों की जांच करवाई जा चुकी है। इसमें से 947 लोगों के खून में मानक से अधिक क्रोमियम, 48 में मर्करी व 25 में फ्लोराइड मिल चुका है। जबकि मई व जून माह में लिए गए सैंपल की रिपोर्ट अभी विभाग को नहीं मिली है।
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बयान.....
विभाग के पास बजट न होने के चलते मई व जून माह में लिए गए 180 नमूनों की जांच रिपोर्ट नहीं मिल सकी है। इसके चलते जुलाई माह से सैंपलिंग नहीं करवाई जा रही है। हालांकि क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों को उपचार देने के साथ निगरानी की जा रही है। क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में लगातार जांच करवाने के लिए शासन से 29 लाख के बजट के लिए पत्राचार किया गया है। बजट मिलते ही दोबारा सैंपलिंग कर जांचें शुरू करवाई जाएंगी। - डॉ. जय गोविंद सीएमओ
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रनियां में खानचंदपुर-मटियामऊ मार्ग पर डंप किए गए क्रोमियम के 20 साल से ज्यादा खुले में पड़े रहने व बाद में किस्तों में हुए निस्तारण से खानचंदपुर सहित करीब 11 स्थानों का भूजल दूषित हुआ। इससे लोगों के शरीर में क्रोमियम, मर्करी व फ्लोराइड जैसे घातक तत्व का असर दिखने लगा। एनजीटी ने प्रभावित क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति की जांच करवाने व प्रभावी उपचार देकर लोगों को क्रोमियम के खतरे से बचाने के निर्देश दिए थे।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक माह अभियान चलाकर 90 लोगों के रक्त व पेशाब के नमूने लेकर डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट लखनऊ में जांच करवाई जा रही थी। स्वास्थ्य विभाग के पास बजट न होने से मई व जून माह में जांच के लिए भेजे गए सैंपल का भुगतान नहीं हो सका है। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग करीब तीन माह बीत जाने के बाद भी इन सैंपल की जांच रिपोर्ट नहीं मंगवा पा रहा है। वहीं, विभाग की ओर से जुलाई माह से सैंपलिंग का कार्य भी बंद कर दिया गया है। जांचें रुक जाने से स्वास्थ्य टीम को लोगों में क्रोमियम की स्थिति पता कर उपचार देने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बोले ग्रामीण
समय से जांच होने के बाद लोगों को उपचार दिए जाने से लोगों का बचाव हो पाएगा। पूर्व में भेजे गए सैंपल की जांच रिपोर्ट नहीं आई है और प्रतिमाह होने वाली सैंपलिंग भी बंद कर दी गई है। ग्रामीणों को जांच रिपोर्ट नहीं दी जाती थी लेकिन अब जांच न होने से लोगों पर आने वाले खतरा क्षेत्र में काम करने वाली स्वास्थ्य टीम को भी पता नहीं चल पा रहा है। -अरुण पाल, खानचंद्रपुर
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पूर्व में जिन लोगों में मानक से अधिक क्रोमियम निकल चुका है, उनकी दोबारा जांच कर पता लगाया जाना चाहिए कि क्रोमियम का स्तर बढ़ा है या घटा है लेकिन विभाग अभी तक गांव के प्रत्येक व्यक्ति की जांच नहीं करवा पाया है। पूर्व की तरह बीच में ही जांच बंद कर दी गई। इसे दोबारा शुरू किया जाए। - हरिश्चंद्र, खानचंद्रपुर
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एक जांच में खर्च करना पड़ता है एक हजार रुपये
सीएमओ डॉ. जय गोविंद ने बताया कि क्रोमियम जैसे भारी तत्वों की जांच के लिए अत्याधुनिक लैब की आवश्यकता होती है। जिले में जांच की सुविधा न होने पर क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र से लोगों के लिए जाने वाले सैंपल की जांच डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में करवाई जाती है। एक सैंपल की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग को करीब एक हजार रुपये खर्च करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक करीब 1028 लोगों की जांच करवाई जा चुकी है। इसमें से 947 लोगों के खून में मानक से अधिक क्रोमियम, 48 में मर्करी व 25 में फ्लोराइड मिल चुका है। जबकि मई व जून माह में लिए गए सैंपल की रिपोर्ट अभी विभाग को नहीं मिली है।
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विभाग के पास बजट न होने के चलते मई व जून माह में लिए गए 180 नमूनों की जांच रिपोर्ट नहीं मिल सकी है। इसके चलते जुलाई माह से सैंपलिंग नहीं करवाई जा रही है। हालांकि क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों को उपचार देने के साथ निगरानी की जा रही है। क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में लगातार जांच करवाने के लिए शासन से 29 लाख के बजट के लिए पत्राचार किया गया है। बजट मिलते ही दोबारा सैंपलिंग कर जांचें शुरू करवाई जाएंगी। - डॉ. जय गोविंद सीएमओ