बिकरू कांड: आश्रितों की नौकरी का नहीं हुआ निदान, आश्रित नहीं पास कर पाए शारीरिक परीक्षा, जानें परिजन क्या बोले
Kanpur News: बिकरू कांड के तीन शहीदों के आश्रितों की नौकरी शारीरिक दक्षता में चार साल से फंसी हुई है। बता दें कि तीन आश्रित शारीरिक परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं। वहीं, चौथा आश्रित पढ़ाई पूरी होने के बाद अब आवेदन करेगा। परिजनों का कहना है कि शहीद के आश्रितों के लिए नौकरी के नियमों में कुछ नरमी बरती जाए।
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दो जुलाई 2020 की रात हुए बिकरू कांड के चार साल पूरे हो गए हैं। इस कांड में आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। इनमें चार आश्रितों को तो नौकरी मिल चुकी है, लेकिन चार अभी भी नौकरी के इंतजार में हैं। तीन तो ऐसे हैं जिनकी नौकरी शारीरिक दक्षता की परीक्षा न पास कर पाने की वजह से फंसी है।
वहीं एक आश्रित उम्र पूरी होने पर अब आवेदन करेगा। आश्रितों व परिजनों का कहना है कि उन्हें भी वह परीक्षा पास करने को कहा जा रहा, जो सभी करते हैं। शहीदों के आश्रित हैं, तो उनको नौकरी के रूप में सम्मान मिलना चाहिए। वहीं अफसरों का कहना है कि नियमानुसार शारीरिक परीक्षा तो पास करनी ही होगी।
सुल्तान सिंह की पत्नी की पीड़ा
बिकरू कांड में मूलरूप से मऊरानीपुर झांसी के रहने वाले सुल्तान सिंह भी शहीद हुए थे। पत्नी उर्मिला सिंह ने बताया कि वह बिठूर के सरकारी आवास में बेटी अग्रिमा के साथ रहती हैं। उन्हें पुलिस में सीधी भर्ती का मौका नहीं दिया। उन्होंने 2021 में एसआई पद के लिए आवेदन किया, लेकिन लखनऊ में हुई दौड़ पास नहीं कर पाईं।
गर्भाशय का हुआ ऑपरेशन तो कैसे पास कर पाएंगे दौड़
उनका कहना है कि गर्भाशय का ऑपरेशन हुआ है, ऐसे में वे दौड़ कैसे पूरी कर पाएंगी। आश्रित के नाते उन्हें सीधे नौकरी मिलनी चाहिए। बताया कि घटना के समय तीन साल की रही बेटी अब बिठूर के एक स्कूल में चौथी में पढ़ती है। गांव में ज्यादा खेती नहीं है। ससुर हरिप्रसाद साधु की तरह रहते हैं। जेठ ज्ञान सिंह अपने परिवार के साथ गांव में चक्की चलाते हैं। पति की पेंशन ही जीवन का सहारा है।
दरोगा महेश यादव के बेटे ने किया आवेदन
विकास दुबे से मोर्चा लेने में शिवराजपुर थाने के दरोगा महेश यादव भी शहीद हो गए थे। उनके बेटे विकास यादव ने एसआई के लिए आवेदन किया है। विकास ने बताया कि दौड़ की परीक्षा होनी है। इसके लिए वे रोजाना दौड़ की तैयारी करते हैं।
दौड़ की तैयारी कर रहा हूं, उम्मीद है कि निकाल लूंगा
उम्मीद है कि दौड़ निकाल लेंगे तो नौकरी मिल जाएगी। हालांकि अन्य आवेदकों की तरह उन्हें भी दौड़ लगानी पड़ेगी, इसका मलाल है। बताया कि छह साल के छोटे भाई विराट और मां सुमन के साथ लखनऊ के सैनिक नगर में रहते हैं।
सिपाही जितेंद्र के भाई ने दोबारा किया आवेदन
सिपाही जितेन्द्र के परिजनों को भी मृतक आश्रित कोटे में नौकरी का इंतजार है। मूल रूप से गांव बरारी रिफाइनरी मथुरा के रहने वाले जितेन्द्र के भाई ने एक बार फिर नौकरी के लिए आवेदन किया है। पहले वह मेडिकल और फिटनेस की कसौटी पर खरे नहीं उतरे थे। उनके घर वालों की मांग थी कि नौकरी देने के लिए नियमों में कुछ नरमी बरती जानी चाहिए। परिवार को उम्मीद है कि इस बार उसे नौकरी मिल जाएगी।
शहीद एसआई नेबूलाल का बेटा करेगा आवेदन
शहीद एसआई नेबूलाल की पत्नी श्यामदेवी ने बेटे हिमांशु कुमार की शैक्षणिक योग्यता पूरी न होने के चलते नौकरी के लिए समय मांगा था। प्रयागराज के हंडिया भीटी में रहने वाले बाबा कालिका प्रसाद के साथ रह रहे बेटे हिमांशु कुमार ने बताया कि वह पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। अब नौकरी के लिए आवेदन करेंगे।
जिस पद के लिए मृतक आश्रितों ने आवेदन किया है, उस पद के लिए होने वाली परीक्षा को पास करना होगा। हालांकि सभी आवेदकों को पढ़ाई से लेकर शारीरिक परीक्षा के लिए तैयार किया जा रहा है। परीक्षा पास करते ही सभी को नौकरी मिल जाएगी। -विपिन मिश्रा, एडिशनल पुलिस कमिश्नर, मुख्यालय/अपराध