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संभावनाएं अपार: बड़ी औद्योगिक इकाइयां कानपुर से पांच गुना, उद्यमियों ने शुरू की देहात का नाम बदलने की मुहिम

Wed, 25 Jun 2025 12:37 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 25 Jun 2025 12:37 PM IST
सार

Kanpur News: अमर उजाला संवाद में उद्यमियों ने विकास के साथ कानपुर देहात का नाम बदलने की मुहिम शुरू की है। उनका कहना है कि यहां लैंड बैंक और नियोजित विकास की अपार संभावनाएं हैं।

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Big industrial units are five times bigger than Kanpur entrepreneurs have started a campaign to change name
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में उद्यमियों ने उठाई आवाज - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर नगर से पांच गुना ज्यादा मध्यम आकार के 40 उद्योग। रनियां और जैनपुर जैसे विकसित औद्योगिक क्षेत्र। साथ ही टेक्सटाइल पार्क सहित विकसित किए जा रहे चार नए इंडस्टि्रयल एरिया। लैंड बैंक और नियोजित विकास की संभावनाएं अपार। नाम फिर भी कानपुर देहात। एक ऐसा जिला, जिसे बेहतर विकास के लिए कानपुर से काटकर बनाया गया, लेकिन नाम में पिछड़ेपन का प्रतीक चस्पा कर दिया गया। यह फांस जिले में उद्योग चला रहे उद्यमियों के साथ वहां के निवासियों को भी चुभ रही है।

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नाम क्यों न ग्रेटर कानपुर या फिर कुछ और हो, यह मांग उठती रही है और एक बार इसकी मांग उद्यमियों ने बुलंद की है। बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए भी कानपुर देहात में कुल 80 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए थे। जबकि, कानपुर नगर में यह आंकड़ा 69 हजार करोड़ रुपये का ही रहा। आंकड़े चौंकाते हैं, लेकिन इसके पीछे वजह भी है। सबसे बड़ी वजह यहां मौजूद अपार लैंड बैंक का होना है, जबकि कानपुर नगर में उद्योगों के लिए अब उपयुक्त जमीन खोजना मुश्किल हो चला है।

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25 साल बाद भी नियोजित विकास से अछूता
यहां चार नए औद्योगिक पार्क प्रस्तावित हैं या विकसित किए जा रहे हैं। इसमें कुंभी, दुआरे, सरवनखेड़ा और चपरघटा शामिल हैं। चपरघटा में टेक्सटाइल पार्क के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। कुंभी में सोलर पावर प्लांट के अलावा 60 एकड़ में उद्योग लगाए जाने हैं। दुआरी में 70 एकड़ में पार्क विकसित किया जा रहा है। नियोजित विकास की संभावना दूसरी बड़ी वजह है। जिला बनने के करीब 25 साल बाद भी कानपुर देहात में अभी नियोजित विकास से अछूता सा ही है।

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बस जरूरत है, इसका नाम बदलने की
स्कूल, स्वास्थ्य, मनोरंजन की पर्याप्त सुविधाएं अभी विकसित की जानी हैं। केडीए क्षेत्र में होने के बावजूद अभी प्राधिकरण ने यहां कोई आवासीय योजना नहीं शुरू की है। आवास विकास परिषद ने भी इसमें कोई पहल नहीं की। इसमें शक नहीं कि इन क्षेत्रों में शुरुआत होने पर यह जिला फर्राटा भरेगा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की तरह इसका भी देश और प्रदेश में स्थान होगा। बस जरूरत है, इसका नाम बदलने की। नाम के साथ चस्पा देहात शब्द को हटाने की। ऐसा नाम रखने की कि ऐसा न लगे जिला पिछड़ा हुआ है।

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राजनीतिक नेतृत्व की भी दरकार
तमाम संभावनाओं से भरपूर होने के बावजूद राजनीतिक कारणों से भी जिला मुख्यधारा से अलग-थलग है। यह ऐसा जनपद हैं, जहां चार लोकसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व है और चार विधानसभा क्षेत्र हैं। लेकिन, चारों लोकसभा क्षेत्र में कानपुर देहात की सिर्फ एक-एक विधान सभा ही आती है। अकबरपुर-रनियां क्षेत्र में बड़ा हिस्सा कानपुर नगर का है। इटावा लोकसभा क्षेत्र में सिर्फ सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र ही आता है। इसी तरह कन्नौज सीट में सिर्फ रसूलाबाद और जालौन सीट में भोगनीपुर विधानसभा क्षेत्र आता है। जाहिर है लोकसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अन्य जिलों में होने के कारण इन क्षेत्रों का कोई भी सांसद कानपुर देहात को प्राथमिकता ही नहीं देता और इसकी आवाज नहीं उठाता।

संभावनाएं अपार, फिर भी देहात

  • जिले में अपार लैंड बैंक, यमुना व सेंगुर नदी के करीब ग्राम समाज की जमीन बहुतायत में।
  • डिफेंस कॉरिडोर का हिस्सा भी जिले में आता, किसाननगर से गुजरेगी निर्माणाधीन रिंग रोड।
  • इटावा और झांसी जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ दिल्ली-कानपुर रेल मार्ग भी जिले से गुजरता।
  • नियोजित विकास की भरपूर संभावनाएं, अस्पताल, स्कूल और मनोरंजन स्थल की मांग।
  • चर्म उत्पाद, कपड़ा, दवाएं, एल्यूमीनियम बर्तन, ट्रैक्टर-ट्रॉली, तेल, आटा आदि का होता उत्पादन।
  • 2011 में आबादी 18 लाख थी, जो अब 20 लाख से अधिक, जिले में 10 ब्लॉक और छह तहसीलें।

1981 में बना था जिला
अप्रैल 23 सन् 1981 में कानपुर महानगर के 3142.88 वर्ग किमी क्षेत्र को अलग कर कानपुर देहात नाम से एक नया जिला बनाया गया। इस जिले में रनियां, जैनपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र के अलावा झींझक, रसूलाबाद और डेरापुर के इलाके भी गए, जहां उद्योगों की संख्या ठीकठाक है। इनका कुल क्षेत्रफल 40 वर्ग किमी से ज्यादा है। औद्योगिक क्षेत्र होने के साथ यह मुख्य रूप से कृषि प्रधान जिला है। यहां की मुख्य फसलें आलू, तेल के बीज, धान, गन्ना, गेहूं और दालें हैं। जिले की मुख्य नदियों में यमुना, पांडु और रिंद नदी शामिल हैं।

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