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विक्रम कोठारी पर फिर गिरी गाज, बैंक ऑफ इंडिया से लिया था 2468 करोड़ का लोन, जानबूझकर नहीं चुकाई रकम

Fri, 31 May 2019 10:32 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 31 May 2019 10:32 AM IST
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Bank of India announces industrialist Vikram Kothari as Willful Defaulter
विक्रम कोठारी की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद बैंक के बाद अब बैंक ऑफ इंडिया ने कानपुर के उद्योगपति विक्रम कोठारी को विलफुल डिफॉल्टर (जानबूझकर ऋण न चुकाने वाला) घोषित किया है। कोठारी ने अपनी चार कंपनियों के नाम से बैंक ऑफ इंडिया से 2468 करोड़ का लोन लिया था। वर्तमान में 1359 करोड़ रुपये बकाया है। बंधक संपत्तियों को कब्जे में लेने के बाद यह रकम शेष बची है। विलफुल डिफॉल्टर की श्रेणी में विक्रम कोठारी के बेटे राहुल कोठारी व पत्नी साधना कोठारी को शामिल किया है। 
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बैंक ऑफ इंडिया ने समाचार पत्रों में उनके फोटो प्रकाशित कर लोगों को आगाह किया है कि उनके साथ होने वाले किसी भी लेनदेन में सावधानी बरतें। इसकी सूचना रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी दी है। तिलक नगर निवासी विक्रम कोठारी ने अपनी कंपनी मैसर्स कोठारी फूड एंड फ्रेगरेंस प्रा.लि. के नाम से 15 जनवरी 2014 को बैंक ऑफ इंडिया की कस्तूरबा मार्ग शाखा से लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिये 300 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। इस कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस 63/2 सिटी सेंटर माल रोड दर्शाया।
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इसमें खुद विक्रम कोठारी, पत्नी साधना कोठारी, बेटा राहुल कोठारी और बहू अर्चना कोठारी कंपनी के निदेशक हैं। लोन के गारंटर के तौर पर भी इन चारों का नाम हैं। कंपनी की ओर से यह लोन समय पर जमा नहीं किया गया। 20 मई 2019 तक इस कंपनी पर 154 करोड़ 25 लाख मूलधन और वर्ष 2015 से 18.25 फीसदी की दर से ब्याज और अन्य खर्चे बकाया हैं।
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जमानत पर चल रहे कोठारी  

विक्रम कोठारी ने बैंक ऑफ इंडिया की इसी शाखा से रोटोमैक ग्लोबल प्रा.लि. फर्म के नाम पर कई खातों से कई बार लोन लिया। जनवरी, 2015 में यह रकम 1453 करोड़ रुपये थी। तब यह खाता एनपीए हो गया था। वर्तमान में इस कंपनी पर करीब 803 करोड़ रुपये मूलधन और 2015 से 18.25 फीसदी की दर से ब्याज और अन्य खर्चे बकाया हैं। इसमें कोठारी, पत्नी और बेटा निदेशक हैं।

इनकी तीसरी कंपनी क्राउन एल्वा पर इसी बैंक शाखा का मई 2015 में 252 करोड़ बकाया था। वसूली के बाद अब ये रकम 163 करोड़ और ब्याज बकाया है। इसमें भी कोठारी, पत्नी और बेटा निदेशक हैं। इनकी चौथी कंपनी मैसर्स रोटोमैक एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड पर भी पर इसी बैंक शाखा का मई, 2014 में 463 करोड़ बकाया था। वर्तमान में यह रकम 239 करोड़ रुपये और ब्याज बकाया है। 

बैंकों की बकायेदारी के मामले में सीबीआई ने विक्रम कोठारी और उनके बेटे को फरवरी 2017 में गिफ्तार किया था। कई महीने जेल में रहने के बाद दोनों को जमानत मिल गई है। विक्रम कोठारी फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।
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