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Bangladeshi Citizen Case: रिजवान पर था अधिकारी का हाथ, बेटे को बचाने का किया था प्रयास, जांच में हुआ खुलासा

Sat, 31 Dec 2022 09:48 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 31 Dec 2022 09:48 AM IST
सार

रिजवान का सबसे छोटा बेटा फरार था। उसके बारे में जानकारी मिली कि वह इंपीरियल स्टेट बिल्डिंग में मौजूद है। पुलिस ने वहां रेड मारी। सटीक जानकारी न होने पर पुलिस बगल वाले का घर खटखटाने लगी। तब जाकर नाबालिग बच्चा मिला, उसे जब थाने लाया गया तो डीसीपी स्तर के एक अधिकारी ने उसे बचाने का प्रयास किया।

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Bangladeshi Citizen Case: Officer hand was on Dr. Rizwan, tried to save son, revealed in investigation
डॉ. रिजवान मोहम्मद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान मोहम्मद के अपराध करने के बाद भी उसे बचाने वालों की शहर में कमी नहीं है। यह अलग बात है कि कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा। रिजवान और उसके परिवार के पकड़े जाने की घटना में कई नए तथ्य सामने आए हैं। उन्हीं में से एक तथ्य है कि रिजवान के छोटे बेटे को पुलिस ने इंपीरियल स्टेट बिल्डिंग से पकड़ा था।

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इतना ही नहीं उसे छुड़वाने के लिए एक बड़े अफसर ने प्रयास भी किया। हालांकि वह किशोर को तो नहीं बचा सके मगर जिसके यहां से वह पकड़ा गया था उसे गिरफ्तारी से बचा लिया था। 2016 में रिजवान की पत्नी हिना बच्चों के साथ शहर आ गई थी। हिना की बहन इंपीरियल स्टेट बिल्डिंग में रह रही हैं। उसने हिना और उसके परिवार को अपने पास वाला फ्लैट दिलवा दिया।

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वहां से हिना व उसका परिवार वुडलैंड अपार्टमेंट और उसके बाद सन 2019 में इंपीरियल हाइट्स अपार्टमेंट आर्यनगर में शिफ्ट हो गया था। पुलिस को जब बांग्लादेशी के बारे में पता चला तो छापेमारी और दबाव पड़ना शुरू हुआ। इंपीरियल स्टेट और वुडलैंड अपार्टमेंट में पुलिस छापेमारी कर चुकी थी। इसी दौरान हिना का बहनोई शहर के एक बड़े रेस्टोरेंट कारोबारी के संपर्क में आया। उससे मदद मांगी। उसने मामला सुनने के बाद उसे एक लोहा कारोबारी के पास भेज दिया। लोहा कारोबारी ने पूरा मामला सुना। मगर उसके बाद पुलिस को सूचना दे दी गई।

छोटे बेटे को छुड़वाने की फिराक में थे अधिकारी
सूत्रों के मुताबिक, रिजवान का सबसे छोटा बेटा फरार था। उसके बारे में जानकारी मिली कि वह इंपीरियल स्टेट बिल्डिंग में मौजूद है। पुलिस ने वहां रेड मारी। सटीक जानकारी न होने पर पुलिस बगल वाले का घर खटखटाने लगी। तब जाकर नाबालिग बच्चा मिला, उसे जब थाने लाया गया तो डीसीपी स्तर के एक अधिकारी ने उसे बचाने का प्रयास किया। अधिकारी किसी भी हालत में बच्चे को जेल भेजने के पक्ष में नहीं था। साथ ही जिसके यहां बच्चा मिला था उसे अधिकारी ने अपनी प्रतिष्ठा लगाकर जेल जाने से बचा लिया। मगर बच्चा नौबस्ता स्थित बच्चा जेल भेज दिया गया।

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तथ्यों की समीक्षा, फिर कार्रवाई
पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड ने बताया कि महकमे के एक अधिकारी और इंस्पेक्टर पर इस मामले में वसूली करने के आरोप लगे हैं। पूरे मामले में जो तथ्य सामने आए हैं, उनकी समीक्षा कराई जाएगी। कुछ निकलता है तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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