Bangladeshi Citizen Case: वसूली के खेल में आया एडीसीपी का नाम, अफसरों का जांच भी कराने से इनकार
बांग्लादेशी नागरिक से वसूली में एडीसीपी का नाम सामने आते ही, पुलिस महकमा खामोश हो गया है। मामले को अफसर दबा रहे हैं, न जांच के आदेश दिए न ही कोई सवाल-जवाब किया गया है। वहीं, जिस बिचौलिए का नाम आया है, उसी ने बांग्लादेशी को पकड़वाया है।
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कानपुर में बांग्लादेशी नागरिक से सांठगांठ कर वसूली के खेल में एक एडीसीपी और एक इंस्पेक्टर का नाम आने के बाद पूरा महकमा खामोश है। आरोपों की जांच भी कराने से इनकार कर दिया है। सवाल है कि आखिर इतने गंभीर प्रकरण में कमिश्नरी पुलिस के अफसर ऐसा रवैया क्यों अपना रहे हैं।
दरअसल, 11 दिसंबर को पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान व उसके परिवार को गिरफ्तार किया था। वह अवैध रूप से शहर में रह रहे थे। फर्जी दस्तावेज भी बना लिए थे। आरोपी जेल में बंद हैं। इस बीच दो दिन पहले सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
एक खबर में दावा किया गया है कि पुलिस को डॉ. रिजवान के बारे में करीब एक साल से जानकारी थी। मामला दबाए रखने के लिए एक एडीसीपी व इंस्पेक्टर उससे वसूली करते रहे। इसमें एक हत्यारोपी पुलिस का मुखबिर बिचौलिया बना था।
मामला पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। गंभीर मामला होने के बावजूद पुलिस अफसरों का कहना है कि इसमें वह फिलहाल जांच नहीं कराएंगे। वहीं, मामला सामने आने पर पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड ने कहा था कि पूरे मामले में जो तथ्य सामने आएंगे, उनकी समीक्षा कराई जाएगी। कुछ निकलता है, तो कार्रवाई की जाएगी।
आखिर फिर इतने दिन खामोश क्यों रहा बिचौलिया
डॉ. रिजवान के बारे में जिसकी मदद से खुलासा हुआ और वह जेल भेजा गया उसकी जानकारी बिचौलिये को लंबे समय से थी। डॉ. रिजवान के अलावा अन्य परिजनों के भी संपर्क में था। सवाल है कि इतने समय से वह खामोश क्यों था।
आखिर ऐसा क्या हुआ जो अचानक से उसने पुलिस की मदद की। इसके पीछे ही बड़ा झोल नजर आ रहा है। हालांकि सच्चाई से तभी पर्दा उठ सकता है, जब जांच हो। बता दें कि बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान मोहम्मद के अपराध करने के बाद भी उसे बचाने वालों की शहर में कमी नहीं है।
यह अलग बात है कि कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा। रिजवान और उसके परिवार के पकड़े जाने की घटना में कई नए तथ्य सामने आए हैं। उन्हीं में से एक तथ्य है कि रिजवान के छोटे बेटे को पुलिस ने इंपीरियल स्टेट बिल्डिंग से पकड़ा था। इतना ही नहीं उसे छुड़वाने के लिए एक बड़े अफसर ने प्रयास भी किया था।
2016 में रिजवान की पत्नी हिना बच्चों के साथ शहर आ गई थी। हिना की बहन इंपीरियल स्टेट बिल्डिंग में रह रही हैं। उसने हिना और उसके परिवार को अपने पास वाला फ्लैट दिलवा दिया। वहां से हिना व उसका परिवार वुडलैंड अपार्टमेंट और उसके बाद सन 2019 में इंपीरियल हाइट्स अपार्टमेंट आर्यनगर में शिफ्ट हो गया था।
पुलिस को जब बांग्लादेशी के बारे में पता चला तो छापेमारी और दबाव पड़ना शुरू हुआ। इंपीरियल स्टेट और वुडलैंड अपार्टमेंट में पुलिस छापेमारी कर चुकी थी। इसी दौरान हिना का बहनोई शहर के एक बड़े रेस्टोरेंट कारोबारी के संपर्क में आया। उसने मामला सुनने के बाद उसे एक लोहा कारोबारी के पास भेज दिया। लोहा कारोबारी ने पूरा मामला सुना। मगर उसके बाद पुलिस को सूचना दे दी गई।