फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Bangladeshi Citizen Case, ADCPs name came in the game of recovery, officers refused to investigate

Bangladeshi Citizen Case: वसूली के खेल में आया एडीसीपी का नाम, अफसरों का जांच भी कराने से इनकार

Sun, 01 Jan 2023 07:18 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 01 Jan 2023 07:18 AM IST
सार

बांग्लादेशी नागरिक से वसूली में एडीसीपी का नाम सामने आते ही, पुलिस महकमा खामोश हो गया है। मामले को अफसर दबा रहे हैं, न जांच के आदेश दिए न ही कोई सवाल-जवाब किया गया है। वहीं, जिस बिचौलिए का नाम आया है, उसी ने बांग्लादेशी को पकड़वाया है।

विज्ञापन
Bangladeshi Citizen Case, ADCPs name came in the game of recovery, officers refused to investigate
bangladeshi citizen case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में बांग्लादेशी नागरिक से सांठगांठ कर वसूली के खेल में एक एडीसीपी और एक इंस्पेक्टर का नाम आने के बाद पूरा महकमा खामोश है। आरोपों की जांच भी कराने से इनकार कर दिया है। सवाल है कि आखिर इतने गंभीर प्रकरण में कमिश्नरी पुलिस के अफसर ऐसा रवैया क्यों अपना रहे हैं।

विज्ञापन

दरअसल, 11 दिसंबर को पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान व उसके परिवार को गिरफ्तार किया था। वह अवैध रूप से शहर में रह रहे थे। फर्जी दस्तावेज भी बना लिए थे। आरोपी जेल में बंद हैं। इस बीच दो दिन पहले सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
विज्ञापन

एक खबर में दावा किया गया है कि पुलिस को डॉ. रिजवान के बारे में करीब एक साल से जानकारी थी। मामला दबाए रखने के लिए एक एडीसीपी व इंस्पेक्टर उससे वसूली करते रहे। इसमें एक हत्यारोपी पुलिस का मुखबिर बिचौलिया बना था।

विज्ञापन
विज्ञापन

मामला पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। गंभीर मामला होने के बावजूद पुलिस अफसरों का कहना है कि इसमें वह फिलहाल जांच नहीं कराएंगे। वहीं, मामला सामने आने पर पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड ने कहा था कि पूरे मामले में जो तथ्य सामने आएंगे, उनकी समीक्षा कराई जाएगी। कुछ निकलता है, तो कार्रवाई की जाएगी।

आखिर फिर इतने दिन खामोश क्यों रहा बिचौलिया
डॉ. रिजवान के बारे में जिसकी मदद से खुलासा हुआ और वह जेल भेजा गया उसकी जानकारी बिचौलिये को लंबे समय से थी। डॉ. रिजवान के अलावा अन्य परिजनों के भी संपर्क में था। सवाल है कि इतने समय से वह खामोश क्यों था।

आखिर ऐसा क्या हुआ जो अचानक से उसने पुलिस की मदद की। इसके पीछे ही बड़ा झोल नजर आ रहा है। हालांकि सच्चाई से तभी पर्दा उठ सकता है, जब जांच हो। बता दें कि बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान मोहम्मद के अपराध करने के बाद भी उसे बचाने वालों की शहर में कमी नहीं है।

यह अलग बात है कि कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा। रिजवान और उसके परिवार के पकड़े जाने की घटना में कई नए तथ्य सामने आए हैं। उन्हीं में से एक तथ्य है कि रिजवान के छोटे बेटे को पुलिस ने इंपीरियल स्टेट बिल्डिंग से पकड़ा था। इतना ही नहीं उसे छुड़वाने के लिए एक बड़े अफसर ने प्रयास भी किया था।

2016 में रिजवान की पत्नी हिना बच्चों के साथ शहर आ गई थी। हिना की बहन इंपीरियल स्टेट बिल्डिंग में रह रही हैं। उसने हिना और उसके परिवार को अपने पास वाला फ्लैट दिलवा दिया। वहां से हिना व उसका परिवार वुडलैंड अपार्टमेंट और उसके बाद सन 2019 में इंपीरियल हाइट्स अपार्टमेंट आर्यनगर में शिफ्ट हो गया था।

पुलिस को जब बांग्लादेशी के बारे में पता चला तो छापेमारी और दबाव पड़ना शुरू हुआ। इंपीरियल स्टेट और वुडलैंड अपार्टमेंट में पुलिस छापेमारी कर चुकी थी। इसी दौरान हिना का बहनोई शहर के एक बड़े रेस्टोरेंट कारोबारी के संपर्क में आया। उसने मामला सुनने के बाद उसे एक लोहा कारोबारी के पास भेज दिया। लोहा कारोबारी ने पूरा मामला सुना। मगर उसके बाद पुलिस को सूचना दे दी गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed