औरैया टेसू-झेंझी पर्व: लोक संस्कृति की अनूठी बानगी, हल्दी-मेहंदी रस्म का आयोजन, डीजे की धुन पर थिरकीं महिलाएं
Auraiya News: अछल्दा विकास खंड के नगरिया गांव में दशहरे के बाद टेशू-झेंझी विवाह पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। गांव निवासी भूपेंद्र सिंह के पुत्र अंकित उर्फ गोलू के यहां झेंझी की हल्दी और मेहंदी की रस्म का भव्य आयोजन हुआ। इस दौरान पारंपरिक लोकगीतों की गूंज के बीच महिलाओं ने डीजे की धुनों पर जमकर नृत्य किया।
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शहरों में जहां पुराने रीति-रिवाज दम तोड़ रहे हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आज भी पुरानी परंपराओं को बनाए रखे हैं। औरैया के अछल्दा विकास खंड के नगरिया गांव में आज भी लोक संस्कृति की जड़ें गहरी हैं। यहां दशहरे के बाद मनाया जाने वाला टेशू-झेंझी विवाह पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शुक्रवार की रात गांव में एक अलग ही नजारा था। गांव निवासी भूपेंद्र सिंह के पुत्र अंकित उर्फ गोलू के घर झेंझी की हल्दी और मेहंदी की रस्म रखी गई।
घर आंगन से लेकर गली तक लोकगीतों से गूंज उठा। गांव की महिलाओं और युवतियों ने दुल्हन की तरह सजी झेंझी को हल्दी लगाई हाथों पर मेहंदी रचाई उसके बाद मंगल गीत गाते हुए आशीर्वाद दिया। रात बढ़ने के साथ ही माहौल में मस्ती घुल गई। डीजे पर बुंदेली गाने बजे तो महिलाएं खुद को रोक नहीं पाईं और जमकर नाचीं। सबसे आकर्षण का केंद्र रहा झेंझी नचाने की परंपरा। जब झेंझी को नचाया गया, तो देखने वालों की भीड़ लग गई।
धूमधाम से किया जाएगा टेसू झेंझी का विवाह
बुजुर्गों ने बताया कि यह केवल एक खेल नहीं है, बल्कि अटूट प्रेम, फसल की खुशहाली और गांव की एकता का प्रतीक है। गांव के लोगों का कहना है कि वे हर साल इसी तरह टेशू-झेंझी का ब्याह रचाते हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी पुरानी संस्कृति से जुड़ी रहे। आधुनिकता की चकाचौंध में भी ग्रामीणों ने अपनी इस विरासत को सहेज कर रखा है। परिजनों ने बताया कि हल्दी रस्म के बाद पूर्णिमा के दिन बड़ी धूमधाम से टेसू झेंझी का विवाह किया जाएगा। वहीं, ऐसी मान्यता है कि टेसू झेंझी के ब्याह के बाद सहालग का दौर शरू हो जाता है।