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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Auraiya Ke Lal Ka Kamaal: 6200 meters high peak of Fatah, appointed in Manipal, Sikkim

औरैया के लाल का कमाल: फतह की 6200 मीटर ऊंची चोटी, सिक्किम के मनीपाल में हैं नियुक्त

Wed, 08 Dec 2021 11:31 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Wed, 08 Dec 2021 11:31 AM IST
सार

सुबोध बताते हैं कि वह अब तक कई पर्वतों की चोटियों पर फतह हासिल कर चुके हैं। उनका सपना अब माउंट एवरेस्ट फतह करने का है। इसके लिए सरकार से भी अनुमति मांगी है।

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Auraiya Ke Lal Ka Kamaal: 6200 meters high peak of Fatah, appointed in Manipal, Sikkim
सुबोध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रोमांचक खेलों के शौकीन 31 वर्षीय बैंककर्मी सुबोध भदौरिया के जीवन की दिशा पहाड़ियों पर चढ़ने के एक प्रशिक्षण शिविर ने बदल दी। अपने जज्बे और जुनून से सुबोध ने पहाड़ की मुसीबतों को बौना साबित करते हुए पर्वतारोही की नई पहचान बना ली है। वे अब तक कई पर्वतों की चोटियों को फतह कर चुके हैं।
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इसी वर्ष अगस्त में सुबोध ने लद्दाख के 6240 मीटर ऊंचे जो जोंगो पर्वत की चोटी पर फतह हासिल करने में सफलता पाई है। वह जून 2022 में जम्मू कश्मीर स्थित 7135 मीटर ऊंची माउंट नन की चोटी फतह करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका सपना माउंट एवरेस्ट फतह करना है। वह वर्तमान में सिक्किम के मनीपाल स्थित केनरा बैंक की शाखा में कार्यरत हैं। 
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मूल रूप से सिखू बेल्हूपुर रहने वाले सुबोध विकास कुंज दिबियापुर में रहते हैं। उन्होंने 12वीं की पढ़ाई वर्ष 2006 में दिबियापुर के सरस्वती विद्या मंदिर से पूरी की। वर्ष 2014 में केनरा बैंक में ट्रेजरी ऑफिसर बने। एक टूर्नामेंट की तैयारी के लिए खिलाड़ियों की फिटनेस ट्रेनिंग ड्रिल के लिए सुबोध को पहाड़ियों पर जाना पड़ा। इसके बाद सुबोध को पहाड़ों पर चढ़ने का जुनून पैदा हुआ।
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उन्होंने पर्वतारोहण के लिए जवाहर माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट, पहलगाम से बेसिक और हिमालयन इंस्टीट्यूट से एडवांस कोर्स किया। अपने इस अनुभव पर उन्होंने पहाड़ों का जीवन शीर्षक से एक कविता भी लिखी। सुबोध बताते हैं कि वह अब तक कई पर्वतों की चोटियों पर फतह हासिल कर चुके हैं। उनका सपना अब माउंट एवरेस्ट फतह करने का है। इसके लिए सरकार से भी अनुमति मांगी है।
 

उनके मित्र मोहित तिवारी व बहनें संगीता, नीरजा, श्वेता, दीपा और ज्योति हमेशा उनका हौसला बढ़ाती हैं। मोहित ने बताया कि सुबोध के पिता स्वर्गीय जगदेव सिंह भदौरिया सहायल स्थित इंटर कालेज में अध्यापक रहे। सुबोध की पत्नी भी बैंक में ही काम करतीं हैं। मां दिबियापुर के विकास कुंज में रहती हैं।

सुबोध ने इन चोटियों को किया फतेह
बीसी रॉय पीक सिक्किम (5486.4 मीटर)
स्टोक कांगड़ी लद्दाख की पहाड़ी (6153 मीटर)
फ्रेंडशिप पीक, हिमाचल प्रदेश (5289 मीटर) 
कांग यास्ते लद्दाख (6180 मीटर)  
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