औरैया दोहरा हत्याकांड: पूर्व एमएलसी के बेटे की फैसले पर टिप्पणी, सरकार पर साधा निशाना, लिखा- करारा जवाब देंगे
Auraiya Double Murder Case: औरैया के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में अदालत द्वारा पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत 10 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद राजनीति और सोशल मीडिया पर सरगर्मी बढ़ गई है। सजा के विरोध में पूर्व एमएलसी के बेटे डॉ. तिलकराज पाठक ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर फैसले को बेबुनियाद और पक्षपातपूर्ण करार दिया है।
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औरैया जिले में जिला न्यायालय में बुधवार को दोहरे हत्याकांड में आए फैसले के बाद गहमागहमी का माहौल सोशल मीडिया पर बना हुआ है। दोषी पाए गए पूर्व विधान परिषद सदस्य कमलेश पाठक समेत 10 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। फैसला आने के बाद कमलेश पाठक के बेटे डॉ. तिलकराज पाठक ने सोशल मीडिया पर इस आदेश को बेबुनियाद करार दिया।
इस टिप्पणी की जद में सरकार भी आ गई। डॉ. तिलकराज पाठक के फेसबुक अकाउंट से बुधवार रात एक पोस्ट की गई। इस पोस्ट को कोर्ट में सुनाए गए फैसले पर प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। उनकी पोस्ट पर लिखा गया कि यह गलत बेबुनियाद पक्षपातपूर्ण फैसला है। इसके बाद लिखा कि इसीलिए इस देश के मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के विरुद्ध जन आंदोलन खड़े हो जा रहे हैं।
जवाब अवश्य मिलेगा और करारा मिलेगा
वास्तविक माफियाओं को बीसों हत्याओं के मुकदमे में बाइज्जत बरी करवाने वाली सरकार का आत्मघाती भस्मासुर अभियोजन निर्दोषों को सजा कराने में अपनी पीठ खुद ही ठोक ले रहा है। जनता बखूबी जानती है कमलेश पाठक पर लगातार फर्जी मुकदमे और सजा कराने का उद्देश्य, समय पर इसका भी जवाब अवश्य मिलेगा और करारा मिलेगा। जाति धर्म संप्रदाय देखकर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई, फैसले कराने वाली सरकार वेंटीलेटर पर अपनी अंतिम सांसें गिन रही है। आज नहीं तो कल इनकी विदाई के बाद न्याय धरा पर उतरता जरूर दिखेगा। पोस्ट पर लिखी इन पंक्तियों को लेकर पूरे दिन चर्चा का बाजार गर्म रहा।
साथी अधिवक्ताओं ने सोशल मीडिया के जरिये दी प्रतिक्रियाएं
औरैया दोहरे हत्याकांड के बाद अधिवक्ताओं में भी नाराजगी बढ़ी थी। लखनऊ से बार काउंसिल के पदाधिकारी भी अधिवक्ता मंजुल चौबे व उसकी चचेरी बहन सुधा की हत्या पर नारायनपुर आए थे। बुधवार को सुनाए गए फैसले के बाद अधिवक्ताओं ने सोशल मीडिया के जरिये अपनी प्रतिक्रियाएं दी। एक अधिवक्ता ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि मित्र गया था, मित्रता नहीं।
श्रद्धांजलि तभी दूंगा जब इंसाफ होगा
वह कल भी थी, आज भी है और ताउम्र रहेगी। निजाम ये रहे या वो, कोई फर्क नहीं पड़ता। जो होगी सब देखी जाएगी। खुद से वादा किया था- श्रद्धांजलि तभी दूंगा जब इंसाफ होगा। आज लंबे संघर्ष के बाद न्याय हुआ और मेरा वादा पूरा हुआ। सत्यमेव जयते। भावपूर्ण श्रद्धांजलि अधिवक्ता मंजुल चौबे व बहन सुधा।