{"_id":"585368244f1c1bdc3964a699","slug":"attack-on-black-money-through-power-of-attorney","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब पावर ऑफ अटॉर्नी से ब्लैक मनी पर अटैक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब पावर ऑफ अटॉर्नी से ब्लैक मनी पर अटैक
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 16 Dec 2016 10:31 AM IST
सार
-संपत्ति बेची तो मालिक के खाते में ही जाएगा पैसा
-जिस क्षेत्र में प्रॉपर्टी वहां निवास का प्रमाण भी जरूरी
विज्ञापन
डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अब पावर ऑफ अटॉर्नी अपने नाम कराकर संपत्ति बेची तो मालिक के खाते में ही पैसा जाएगा। यही नहीं जिस क्षेत्र में प्रॉपर्टी होगी वहां का निवास का प्रमाण भी देना होगा। इस तरह रियल इस्टेट में खपाई जाने वाली ब्लैक मनी पर एक अटैक और हुआ है।
महानिरीक्षक, निबंधन अनिल कुमार ने रजिस्ट्री दफ्तर में भेजे पत्र में कहा है कि पॉवर ऑफ अटार्नी के माध्यम से स्टांप चोरी रोकने के लिए 21 मई 2010 को दो शर्तों के साथ नई व्यवस्था लागू की गई थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट ने प्रेमपाल सिंह नागर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य के खिलाफ रिट में सात मार्च 2011 को स्टे कर दिया था। अब हाईकोर्ट ने उस स्टे को खत्म कर रिट निरस्त कर दी है।
इसलिए अब पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से जमीन रजिस्ट्री तभी कराई जाएगी जब बिक्री की राशि मूल मालिक के खाते में जमा की गई हो। यही नहीं पावर ऑफ अटॉर्नी की रजिस्ट्री तभी स्वीकार की जाएगी जब पावर ऑफ अटॉर्नी करने वाले व्यक्ति का निवास या संपत्ति उस सब रजिस्ट्रार के जोन में ही हो। इसके लिए निवास प्रमाणपत्र के रूप में मान्य सबूत देना होगा। एआईजी स्टांप देवेंद्र सिंह ने बताया कि अभी तक ब्लड रिलेशन में ही पावर ऑफ अटॉर्नी हो रही थी लेकिन अब कुछ शर्तो के साथ कोई भी किसी को पावर ऑफ अटॉर्नी कर सकता है। नए आदेश के अनुसार व्यवस्था लागू कर दी गई है।
विज्ञापन
इस तरह होता था खेल
अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित का कहना है कि बिल्डर और प्रॉपर्टी डीलर किसान या अन्य व्यक्ति को उसकी जमीन का पैसा देकर अपने नाम पावर ऑफ अटॉर्नी करा लेते थे। इसके बाद अपने हिसाब से जमीन बेचकर रजिस्ट्री करते रहते थे। इससे स्टांप का नुकसान होता था। नियमानुसार पहले बिल्डर को किसान से अपने नाम रजिस्ट्री करानी और फिर बेचने पर खरीदने वाले के नाम रजिस्ट्री करनी चाहिए। पावर ऑफ अटॉर्नी से जमीन बेचने पर किसान, बिल्डर और फिर तीसरे को बिक्री में नंबर दो का पैसा चलता था। अब नए नियम से मूल मालिक के खाते में पैसा ट्रांसफर की शर्त से इस पर अंकुश लगेगा।
विज्ञापन
महानिरीक्षक, निबंधन अनिल कुमार ने रजिस्ट्री दफ्तर में भेजे पत्र में कहा है कि पॉवर ऑफ अटार्नी के माध्यम से स्टांप चोरी रोकने के लिए 21 मई 2010 को दो शर्तों के साथ नई व्यवस्था लागू की गई थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट ने प्रेमपाल सिंह नागर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य के खिलाफ रिट में सात मार्च 2011 को स्टे कर दिया था। अब हाईकोर्ट ने उस स्टे को खत्म कर रिट निरस्त कर दी है।
विज्ञापन
इसलिए अब पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से जमीन रजिस्ट्री तभी कराई जाएगी जब बिक्री की राशि मूल मालिक के खाते में जमा की गई हो। यही नहीं पावर ऑफ अटॉर्नी की रजिस्ट्री तभी स्वीकार की जाएगी जब पावर ऑफ अटॉर्नी करने वाले व्यक्ति का निवास या संपत्ति उस सब रजिस्ट्रार के जोन में ही हो। इसके लिए निवास प्रमाणपत्र के रूप में मान्य सबूत देना होगा। एआईजी स्टांप देवेंद्र सिंह ने बताया कि अभी तक ब्लड रिलेशन में ही पावर ऑफ अटॉर्नी हो रही थी लेकिन अब कुछ शर्तो के साथ कोई भी किसी को पावर ऑफ अटॉर्नी कर सकता है। नए आदेश के अनुसार व्यवस्था लागू कर दी गई है।
विज्ञापन
इस तरह होता था खेल
अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित का कहना है कि बिल्डर और प्रॉपर्टी डीलर किसान या अन्य व्यक्ति को उसकी जमीन का पैसा देकर अपने नाम पावर ऑफ अटॉर्नी करा लेते थे। इसके बाद अपने हिसाब से जमीन बेचकर रजिस्ट्री करते रहते थे। इससे स्टांप का नुकसान होता था। नियमानुसार पहले बिल्डर को किसान से अपने नाम रजिस्ट्री करानी और फिर बेचने पर खरीदने वाले के नाम रजिस्ट्री करनी चाहिए। पावर ऑफ अटॉर्नी से जमीन बेचने पर किसान, बिल्डर और फिर तीसरे को बिक्री में नंबर दो का पैसा चलता था। अब नए नियम से मूल मालिक के खाते में पैसा ट्रांसफर की शर्त से इस पर अंकुश लगेगा।