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Kanpur News: 16 लाख की आबादी में एक लाख को भी जागरूक नहीं कर सकीं आशा, एएनएम

Tue, 11 Aug 2026 01:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Tue, 11 Aug 2026 01:24 AM IST
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Asha workers and ANMs failed to create awareness among a population of 1.6 million.
कानपुर देहात। संचारी रोगों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाया गया दस्तक अभियान समयाविधि बढ़ाए जाने के बाद भी परवान नहीं चढ़ सका है। 30 दिन में आशा व एएनएम कुल आबादी 16,37,667 में से महज 94,019 लोगों को ही जागरूक कर सकीं हैं। जो तय लक्ष्य का महज 5.74 फीसदी है। जिम्मेदारों के अभियान में रुचि न दिखाने का असर बरसात के साथ संचारी रोगों को तेजी से बढ़ा सकता है।
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जनपद में बारिश के साथ हर बार फैलने वाले डेंगू, मलेरिया व अन्य संचारी रोगों के रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक जुलाई से 10 जुलाई तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान व 11 जुलाई से 30 जुलाई तक दस्तक अभियान चलाया जाना था। दस्तक अभियान में स्वास्थ्य कर्मियों को लोगों के दरवाजों पर जाकर उनमें टीबी, फायलेरिया, बुखार सहित अन्य बीमारियों की जानकारी लेकर ई-कवच पोर्टल पर फीड करना था।
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दस्तक अभियान में जिम्मेदारों के रुचि न लेने पर विभाग की ओर से अभियान की समयाविधि बढ़ाकर सोमवार तक संचालित किया गया। इसके बाद भी अभियान गति नहीं पकड़ सका है। सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति पुखरायां नगर पालिका की है। यहां पोर्टल पर दर्ज 6,550 लोगों में से किसी के दरवाजे पर दस्तक नहीं दी गई। जबकि सबसे ज्यादा डेरापुर सीएचसी में स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों की बीमारियों की जानकारी जुटाने के साथ जागरूक किया। यहां तय लक्ष्य 1,29,146 में से 14,486 लोगों के यहां दस्तक देकर पोर्टल फीडिंग की गई। यह भी लक्ष्य के सापेक्ष महज 11.22 फीसदी है।
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621 आशा व एएनम ने नहीं की पोर्टल पर फीडिंग
जनपद में दस्तक अभियान को सफल बनाने के लिए 2028 आशा व एनएनम को लोगों के घरों में जाकर उनकी बीमारियों की जानकारी कर पोर्टल पर फीड करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें महज 1421 आशा कार्यकर्ता व एएनएम ने धरातल पर पहुंचकर कार्य किया। जबकि 621 आशा व एएनएम ने ई-कवच पोर्टल पर एक भी व्यक्ति के दरवाजे पर पहुंचकर दस्तक देने की जानकारी फीड़ नहीं की।
...................11947 रोगी भी मिले
दस्तक अभियान के दौरान एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं को जांच के दौरान 11,947 लोग बुखार, टीबी, फायलेरिया सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित मिले। इसमें डेरापुर ब्लॉक के कर्मियों ने सबसे ज्यादा 2,592 रोगी खोजे। वहीं, सरवनखेड़ा ब्लॉक में सबसे कम 321 रोगी मिले। इनका आशा व एएनम ने रोगों के हिसाब से नजदीकी जन आरोग्य मंदिर, पीएचसी, सीएचसी में उपचार करवाया। पोर्टल पर डाटा फीड होने से डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों को इन मरीजों को ट्रैक कर फॉलोअप करने में परेशानी नहीं होगी।
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बयान
दस्तक अभियान का डाटा ई-कवच पोर्टल पर फीड़ करने में रुचि न दिखाने वाली आशा व एएनएम की रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी गई है। उनके स्तर से कार्य में लापरवाही करने वाली कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. डीके सिंह, नोडल संचारी रोग

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दस्तक अभियान में आशा कार्यकर्ता व एएनएम ने घर-घर जाकर लोगों का विवरण जुटाने के साथ जागरूक किया है। कई आशा कार्यकताएं सेवानिवृत्त हो चुकीं हैं। कुछ की मौत हो चुकी है, कुछ एएनएम का स्थानांतरण हो चुका है जबकि उनकी आईडी ई-कवच पोर्टल पर दर्ज हैं। जमीनी स्तर पर बड़ी आबादी का सर्वे करने व कई आशा कार्यकर्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट पर फीडिंग में परेशानी होने की बात सामने आई है। 31 जुलाई तक महज 36 फीसदी कर्मचारियों ने फीडिंग की थी। इसको 10 दिन में बढ़ाकर 70 फीसदी पर पहुंचाया गया है। जल्द फीडिंग का कार्य पूरा किया जाएगा। - मारुति दीक्षित, जिला मलेरिया अधिकारी
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