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Kanpur News: पक्के के आवेदन फाइलों में कैद, तीन दिन में ढहे 82 से अधिक कच्चे घर
Sat, 05 Sep 2026 01:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 05 Sep 2026 01:19 AM IST
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कानपुर देहात/सरवनखेड़ा। जनपद में तीन दिन की बारिश में 82 से अधिक कच्चे घर ढह गए। दो घर गिरी के मामलों में तीन मासूमों की मौत हो चुकी है। इधर पक्के घर के आवेदन फाइलों में कैद हैं।
शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में गरीबों के लिए पक्के घर की योजना है लेकिन लंबी जांच व एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक फाइलों के घूमने से जरूरतमंद परेशान होते हैं। आवेदन के बाद कई मामलों में साल बीतने के बाद भी जांच अटकी है। जर्जर घर में डर के बीच रह रहे परिवारों में अब जानें जा रही हैं। सवाल यह है कि बीते साल बारिश में घर गिरी की घटनाएं हुईं। तब तहसील प्रशासन ने जांच कराई। इसके बाद भी गरीबों के सिर पर पक्की छत नसीब नहीं हो सकी है। घर गिरी में मुआवजे के नाम पर किसी को चार हजार रुपये तो किसी को आठ हजार रुपये मिले। इस बार तीन दिन की बारिश में कई घर गिर गए। अब परिवारों को अपना आशियाना बनाने के लिए फिर जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
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फोटो- 9 कच्चे घर की ढही छत दिखाती तिलौंची की उर्मिला। संवाद
दृश्य एक :
आवास के लिए नाम भेजा पर नहीं मिली कॉलोनी
तिलौंची निवासी अनिकेत श्रमिक हैं। भूमिहीन हैं और रहने के लिए कच्चा मकान है। पिछले वर्ष कच्ची छत ढह गई थी। उसी को ठीक कर अब परिवार गुजर कर रहा है। बीते दिनों बारिश में पुरानी धन्नी टूटने से कमरे का एक हिस्सा ढह गया। अनिकेत की पत्नी उर्मिला कहती हैं कि मलबे में गृहस्थी दब गई। ग्राम प्रधान अर्चना गौतम ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास योजना की कॉलोनी के लिए अनिकेत का नाम भेजा गया था लेकिन अभी तक कॉलोनी नहीं मिली। घर गिरी में चार हजार रुपये मुआवजा दिया गया।
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फोटो- 17 कच्चा मकान दिखाते जसवापुर के सुरेश कुमार। संवाद
दृश्य दो :
पात्रता सूची में नाम, पक्की छत का इंतजार
जसवापुर गांव निवासी सुरेश कुमार कुशवाहा के पास एक बीघा खेत है। घर कच्चा है। वह पत्नी राम दुलारी व बेटे रामजी के साथ कच्चे घर में रहते हैं। पिछले वर्ष कच्चे घर की छत ढह गई थी। तब लेखपाल ने सर्वे किया था लेकिन कॉलोनी नहीं मिली। अब बारिश में फिर से कच्ची छत ढह गई है। छत गिरने से लकड़ी जलाकर चूल्हे पर खाना बना पाना मुश्किल हो रहा है। रात जागते कट रही है। ग्राम प्रधान पूजा यादव ने बताया की सुरेश का नाम आवास पात्रता सूची में है। हालांकि उसे अभी कॉलोनी नहीं मिली है।
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फोटो- 2- मकान ढहने से मलबे में दबा सामान निकालता गृहस्वामी। स्रोत ग्रामीण
ढह गया घर, अब किराये पर गुजर बसर
राजपुर। कई दिन से हो रही बारिश के कारण कच्चे मकान गिरने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार सुबह कस्बे के आंबेडकर नगर में रवि कौशल का कच्चा घर ढह गया। रवि कौशल कहते हैं कि लगातार बारिश से घर में पहले दरारें पड़ी। इसके बाद घर ढह गया। तीन दिन पहले पड़ोस में किराये पर घर लेकर परिवार के साथ आ गए थे तो हादसा बच गया। मलबे में गृहस्थी का कुछ सामान दब गया। उसने बताया कि कॉलोनी के लिए आवेदन किया था। सर्वे के बाद कॉलोनी आवंटन हुआ है लेकिन अभी किस्त नहीं मिली है। सिकंदरा तहसीलदार सुप्रिया याज्ञिक ने बताया कि क्षेत्रीय लेखपाल से ढह घर की रिपोर्ट मांगी गई है। ईओ राजपुर ईओ नीति त्रिपाठी ने बताया कि लंबित आवेदनों की जांच कराई जाएगी। (संवाद)
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सात हजार से अधिक शहरी कॉलोनी आवेदनों की जांच लंबित
कानपुर देहात। अकबरपुर, रनियां व रूरा निकाय में शहरी आवास के सात हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। हालात ये हैं कि कई आवेदन तो एक साल पुराने हैं। आवेदक तहसील व नगर पंचायत के कार्यालयों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। लेखपाल नगर पंचायत कार्यालय जाने को टरकाते हैं, तो नगर निकाय कर्मी तहसील में प्रक्रिया लंबित होने की बहानेबाजी कर गुमराह करते हैं। (संवाद)
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बयान.....
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में आए आवेदनों में पात्रता की जांच के बाद ईओ व एसडीएम के हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण पत्र प्राप्त किए जाते हैं। 1032 लाभार्थियों को पहली किस्त जारी की जा रही है। सत्यापन में अटके आवेदनों की समीक्षा की जाएगी। - अमित कुमार, एडीएम प्रशासन/ प्रभारी अधिकारी नगर निकाय
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शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में गरीबों के लिए पक्के घर की योजना है लेकिन लंबी जांच व एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक फाइलों के घूमने से जरूरतमंद परेशान होते हैं। आवेदन के बाद कई मामलों में साल बीतने के बाद भी जांच अटकी है। जर्जर घर में डर के बीच रह रहे परिवारों में अब जानें जा रही हैं। सवाल यह है कि बीते साल बारिश में घर गिरी की घटनाएं हुईं। तब तहसील प्रशासन ने जांच कराई। इसके बाद भी गरीबों के सिर पर पक्की छत नसीब नहीं हो सकी है। घर गिरी में मुआवजे के नाम पर किसी को चार हजार रुपये तो किसी को आठ हजार रुपये मिले। इस बार तीन दिन की बारिश में कई घर गिर गए। अब परिवारों को अपना आशियाना बनाने के लिए फिर जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
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फोटो- 9 कच्चे घर की ढही छत दिखाती तिलौंची की उर्मिला। संवाद
दृश्य एक :
आवास के लिए नाम भेजा पर नहीं मिली कॉलोनी
तिलौंची निवासी अनिकेत श्रमिक हैं। भूमिहीन हैं और रहने के लिए कच्चा मकान है। पिछले वर्ष कच्ची छत ढह गई थी। उसी को ठीक कर अब परिवार गुजर कर रहा है। बीते दिनों बारिश में पुरानी धन्नी टूटने से कमरे का एक हिस्सा ढह गया। अनिकेत की पत्नी उर्मिला कहती हैं कि मलबे में गृहस्थी दब गई। ग्राम प्रधान अर्चना गौतम ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास योजना की कॉलोनी के लिए अनिकेत का नाम भेजा गया था लेकिन अभी तक कॉलोनी नहीं मिली। घर गिरी में चार हजार रुपये मुआवजा दिया गया।
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फोटो- 17 कच्चा मकान दिखाते जसवापुर के सुरेश कुमार। संवाद
दृश्य दो :
पात्रता सूची में नाम, पक्की छत का इंतजार
जसवापुर गांव निवासी सुरेश कुमार कुशवाहा के पास एक बीघा खेत है। घर कच्चा है। वह पत्नी राम दुलारी व बेटे रामजी के साथ कच्चे घर में रहते हैं। पिछले वर्ष कच्चे घर की छत ढह गई थी। तब लेखपाल ने सर्वे किया था लेकिन कॉलोनी नहीं मिली। अब बारिश में फिर से कच्ची छत ढह गई है। छत गिरने से लकड़ी जलाकर चूल्हे पर खाना बना पाना मुश्किल हो रहा है। रात जागते कट रही है। ग्राम प्रधान पूजा यादव ने बताया की सुरेश का नाम आवास पात्रता सूची में है। हालांकि उसे अभी कॉलोनी नहीं मिली है।
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फोटो- 2- मकान ढहने से मलबे में दबा सामान निकालता गृहस्वामी। स्रोत ग्रामीण
ढह गया घर, अब किराये पर गुजर बसर
राजपुर। कई दिन से हो रही बारिश के कारण कच्चे मकान गिरने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार सुबह कस्बे के आंबेडकर नगर में रवि कौशल का कच्चा घर ढह गया। रवि कौशल कहते हैं कि लगातार बारिश से घर में पहले दरारें पड़ी। इसके बाद घर ढह गया। तीन दिन पहले पड़ोस में किराये पर घर लेकर परिवार के साथ आ गए थे तो हादसा बच गया। मलबे में गृहस्थी का कुछ सामान दब गया। उसने बताया कि कॉलोनी के लिए आवेदन किया था। सर्वे के बाद कॉलोनी आवंटन हुआ है लेकिन अभी किस्त नहीं मिली है। सिकंदरा तहसीलदार सुप्रिया याज्ञिक ने बताया कि क्षेत्रीय लेखपाल से ढह घर की रिपोर्ट मांगी गई है। ईओ राजपुर ईओ नीति त्रिपाठी ने बताया कि लंबित आवेदनों की जांच कराई जाएगी। (संवाद)
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सात हजार से अधिक शहरी कॉलोनी आवेदनों की जांच लंबित
कानपुर देहात। अकबरपुर, रनियां व रूरा निकाय में शहरी आवास के सात हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। हालात ये हैं कि कई आवेदन तो एक साल पुराने हैं। आवेदक तहसील व नगर पंचायत के कार्यालयों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। लेखपाल नगर पंचायत कार्यालय जाने को टरकाते हैं, तो नगर निकाय कर्मी तहसील में प्रक्रिया लंबित होने की बहानेबाजी कर गुमराह करते हैं। (संवाद)
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बयान.....
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में आए आवेदनों में पात्रता की जांच के बाद ईओ व एसडीएम के हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण पत्र प्राप्त किए जाते हैं। 1032 लाभार्थियों को पहली किस्त जारी की जा रही है। सत्यापन में अटके आवेदनों की समीक्षा की जाएगी। - अमित कुमार, एडीएम प्रशासन/ प्रभारी अधिकारी नगर निकाय