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अपराजिता: बच्चों को अभिभावकों से मिले सेक्स एजूकेशन, गूगल से सवालों के जवाब तलाशने का मौका न दें

Sun, 11 Oct 2020 11:21 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 11 Oct 2020 11:21 AM IST
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Aparajita: Children get sex education from parents
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
अगर आपका बच्चा रेप, सेक्स या फिर शरीर में आ रहे बदलावों के बारे में चर्चा करता है तो ध्यान रहे उसकी बातों का जवाब उसे आपके माध्यम से मिले न कि गूगल से। अभिभावकों से मिले जवाबों से बच्चा पूरी तरह से संतुष्ट होगा साथ ही उसके क्रास क्वेश्चन और मन में चल रही उथल-पुथल को भी आप समझ लेंगे।
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यह बात अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स की ओर से सेक्स एजूकेशन पर गुरुवार को आयोजित वेबिनार में मुख्य वक्ता आईआईटी कानपुर के ह्यूमेनिटीज और सोशल साइंस के विभागाध्यक्ष और साइकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर बृजभूषण ने कही। उन्होंने कहा कि कहा कि अभी भी कई भारतीय परिवारों में सेक्स एजूकेशन पर बात करना मर्यादा का उल्लंघन माना जाता है, लेकिन अब समय आ गया है, इन विचारों को बदलने का।
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टीवी के एड को देखकर बच्चे के मन में उठे सवालों के जवाब दें न कि झटके से चैनल बदल दें। उन्होंने कहा कि अगर पहली बार में बच्चे के पूछे गए सवाल पर आप झेंपेंगे या टालेंगे तो वह गूगल की ओर रुख करेगा। ऐसा करना काफी घातक होगा। उन्होंने सेक्स एजूकेशन को कोर्स में शामिल करने से मना करने वाले कई राज्यों के बारे में बताया।
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साथ ही कहा कि कैसे 2007 में जब गुजरात में एक ऐसी व्यवस्था लागू हुई, जिसके माध्यम से छात्रों से कहा कि बिना नाम लिखे वह मन में उठ रहे प्रश्नों को पूछें तो 10 और 12 साल की उम्र के बच्चों ने शारीरिक बदलाव व सेक्स जिज्ञासाओं के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार ने सेक्स एजूकेशन के बजाए जेंडर एजूकेशन के रूप में इसे लागू किया है। वहीं, वेबिनार में शामिल लॉट्स ऑफ लर्निंग संस्था की संस्थापक स्नेहा शाह गुप्ता ने कहा कि कई अभिभावक यह सोचते हैं कि बड़ा होगा तो अपने आप सीख जाएगा, अभी यह उम्र नहीं है बात करने की।

यहीं से अभिभावक गलती करना शुरू कर देते हैं। छोटे से ही अगर बच्चों को सही व गलत की जानकारी नहीं दी गई तो वे राह भटक जाएंगे। सही शब्दकोश के साथ बच्चों को हर जानकारी दें। वेबिनार में मुख्य रूप से आकांक्षा जैन, ज्योति, वंदना मिश्रा, कविता दीक्षित, प्रभा पांडेय, रिचा अग्रवाल, सुषमा चौहान, अनु गोयल, डॉ. अनुपम जैन आदि शामिल हुईं।  


 

वेबिनार में पूछे गए सवाल
सवाल- दो से तीन साल के बच्चों को आखिर किस तरह से सेक्स एजूकेशन दी जाए। - ज्योति, छात्रा
जवाब- छोटे बच्चों के साथ भी रेप जैसी घटनाएं हो रही है। ऐसे में जरूरी है कि उनको उनकी ही भाषा में ही सेक्स एजूकेशन दी जाए। इस जगह, उस जगह जैसे शब्दों के इस्तेमाल की जगह सूसू प्लेस, पॉटी प्लेस जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें।

सवाल- घर में छोटे बच्चे हैं। ऐसे में खेल- खेल में बच्चे कुछ गलत न कर जाएं इसका डर लगा रहता है क्योंकि सोशल मीडिया के माध्यम से कई बातें उनके कानों में जाती है। - सीए रिचा अग्रवाल, रोटरी एलीट अध्यक्ष
जवाब- सोशल मीडिया, एड आदि के माध्यम से कई चीजों के बारे में बच्चों को पता चल रहा है लेकिन उसकी जानकारी उनको नहीं है। ऐसे में जरूरी है बचपन से ही बच्चों की हरकतों पर अभिभावक खासा ध्यान रखें। भाई को बहन से कैसे पेश आना है और बहन को भाई से कैसे व्यवहार करना है, इसके लिए शुरू से गाइड करें। 

सवाल - किस उम्र से बच्चों को शारीरिक बदलाव के बारे में बताना चाहिए। सुषमा चौहान, समाजसेविका
जवाब- जब बच्चा चीजों को समझने लगे तो धीरे- धीरे कर उनको बदलाव से रूबरू कराए। खासकर टीन एज में शरीर में काफी बदलाव आता है। ऐसे में बच्चे के मन में यह सवाल जरूर होता है कि  उसके  शरीर में जो बदलाव आ रहे हैं वो सामान्य है कि असामान्य। ऐसे में बच्चा इंटरनेट के माध्यम से जानकारी लेने कि कोशिश करता है जो उनके लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

सवाल - क्या बच्चों को अभी से हर चीज की जानकारी देना गलत नहीं होगा? क्या वो रास्ता नहीं भटकेंगे, क्योंकि हमारे में जमाने मेें इतनी ज्यादा रेप की घटनाएं नहीं होती थी। -  प्रभा पांडेय, शेफ
जवाब- पहले भी रेप जैसी घटनाएं होती थी। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले सामने नहीं आती थी। अब लड़कियों व उनके घरवालों ने आवाज उठाना सीख लिया है। पहले 13- 14 साल की उम्र में शादी कर दी जाती थी। अब समाज में बदलाव आया है। ऐसे में जरूरी है कि बदलते समाज के साथ अभिभावकों को बच्चों को भी उनकी ही भाषा में समझाना चाहिए।

सवाल- क्या कोई विशेष उम्र होती है जिसमें बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए।- अनु गोयल, सीनियर आर्टिस्ट
जवाब- वैसे तो कोई विशेष उम्र नहीं होती है लेकिन टीन एज में इन बातों पर खासा ध्यान देना चाहिए।  टीन एज में बच्चा बदलाव की ओर बढ़ रहा होता है। ऐसे में एक राह तय करना जरूरी है जिसमें वो चीजों की जानकारी बाहरी लोगों व इंटरनेट से न लेकर आप से ही जुटाए। 
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