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Kanpur News: कथावाचकों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
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इटावा। गलत जाति बताकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपी कथावाचकों की अग्रिम जमानत अर्जी बुधवार को एडीजे-7 राखी चौहान ने खारिज कर दी है। अब कथावाचकों के अधिवक्ता हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
21 जून को महेवा के दांदरपुर गांव में कथा का आयोजन कराया गया था। यहां देर रात कथावाचक मुकट मणी यादव और संत प्रसाद पर जाति छिपाने का आरोप लगाकर गांव के लोगों ने मारपीट करने के साथ ही सिर भी मुड़वा दिया था। इस मामले में पुलिस ने कथावाचकों की तहरीर पर गांव के दो नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
इसके बाद मुख्य यजमान की तहरीर पर दोनों कथावाचकों के खिलाफ फर्जी आधार कार्ड दिखाकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के हो सके इसलिए एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने विवेचन स्थानांतरित करने का आग्रह किया था।
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इसे मानते हुए शासन ने विवेचना झांसी को सौंप दी थी। झांसी एसएसपी ने विवेचना पूंछ थाना प्रभारी निरीक्षक जेपी पाल को सौंपी थी। इस मुकदमे की सुनवाई बुधवार को कोर्ट संख्या एडीजे-7 राखी चौहान ने की। कथावाचकों की ओर से अधिवक्ता मनोज शाक्य और योगेश राजू यादव ने अपना पक्ष रखा, जबकि दूसरी तरफ से एडीजीसी अजीत तोमर की ओर से अपना पक्ष रखा गया। विवेचक की ओर से दोनों आधार कार्ड की कराई गई जांच रिपोर्ट भी पेश की गई। इसके आधार पर बताया गया कि दोनों आधार कार्ड मुकट मणी यादव के ही हैं।
जिनमें से एक में नाम अग्निहोत्री दिखाया गया है। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि कथावाचक ने आर्थिक लाभ लेने के लिए गलत नाम का दस्तावेज बनवाया था इसलिए घटना हुई। उन्होंने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। योगेश राजू यादव ने बताया कि अब वह लोग हाईकोर्ट में अपील करेंगे। वहीं एडीजीसी अजीत तोमर ने बताया कि कथावाचकों की ओर से विवेचना में सहयोग न करने पर न्यायालय ने नाराजगी जाहिर की है। पुलिस को जल्द उन्हें गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं।
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21 जून को महेवा के दांदरपुर गांव में कथा का आयोजन कराया गया था। यहां देर रात कथावाचक मुकट मणी यादव और संत प्रसाद पर जाति छिपाने का आरोप लगाकर गांव के लोगों ने मारपीट करने के साथ ही सिर भी मुड़वा दिया था। इस मामले में पुलिस ने कथावाचकों की तहरीर पर गांव के दो नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
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इसके बाद मुख्य यजमान की तहरीर पर दोनों कथावाचकों के खिलाफ फर्जी आधार कार्ड दिखाकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के हो सके इसलिए एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने विवेचन स्थानांतरित करने का आग्रह किया था।
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इसे मानते हुए शासन ने विवेचना झांसी को सौंप दी थी। झांसी एसएसपी ने विवेचना पूंछ थाना प्रभारी निरीक्षक जेपी पाल को सौंपी थी। इस मुकदमे की सुनवाई बुधवार को कोर्ट संख्या एडीजे-7 राखी चौहान ने की। कथावाचकों की ओर से अधिवक्ता मनोज शाक्य और योगेश राजू यादव ने अपना पक्ष रखा, जबकि दूसरी तरफ से एडीजीसी अजीत तोमर की ओर से अपना पक्ष रखा गया। विवेचक की ओर से दोनों आधार कार्ड की कराई गई जांच रिपोर्ट भी पेश की गई। इसके आधार पर बताया गया कि दोनों आधार कार्ड मुकट मणी यादव के ही हैं।
जिनमें से एक में नाम अग्निहोत्री दिखाया गया है। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि कथावाचक ने आर्थिक लाभ लेने के लिए गलत नाम का दस्तावेज बनवाया था इसलिए घटना हुई। उन्होंने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। योगेश राजू यादव ने बताया कि अब वह लोग हाईकोर्ट में अपील करेंगे। वहीं एडीजीसी अजीत तोमर ने बताया कि कथावाचकों की ओर से विवेचना में सहयोग न करने पर न्यायालय ने नाराजगी जाहिर की है। पुलिस को जल्द उन्हें गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं।