सिख विरोधी दंगा: एसआईटी ने कानपुर में तीन और आरोपियों को किया गिरफ्तार, छह सिखों की हुई थी हत्या
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सिख विरोधी दंगों की जांच कर रही एसआईटी ने बुधवार को तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी दो हत्याकांड में आरोपी हैं जिसमें पांच सिखों को मौत के घाट उतारकर शव जला दिए गए थे। दोपहर बाद एसआईटी ने आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। जहां से वह जेल भेजे गए।
31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के विरोध में सिख विरोधी दंगे भड़के थे। शहर में 127 सिखों की हत्या हुई थी। शासन ने साढ़े तीन साल पहले जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। एसआईटी डीआईजी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि दादा नगर इलाके में दो हत्याकांड हुए थे।
जिसमें सरदार भगत सिंह, जोगेंद्र सिंह, शीला रानी, दलजीत सिंह व सतनाम सिंह की दंगाइयों ने हत्या कर दी थी। जांच के दौरान आरोपियों के नाम सामने आए जिसमें से दादा नगर निवासी 65 वर्षीय कमल किशोर मिश्रा व 70 वर्षीय उनके बड़े भाई राज किशोर मिश्रा के साथ योगेंद्र विहार नौबस्ता निवासी 56 वर्षीय गोविंद तिवारी को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया। केसों की विवेचना जारी है।
राजनीतिक दबाव भी डलवाया
आरोपी दोनों सगे भाई एक राजनीतिक पार्टी से जुड़े हुए हैं। इसलिए वह एसआईटी पर दबाव बनाने का भी प्रयास कर रहे थे। कई नेताओं से फोन कराया जिससे उनकी गिरफ्तारी न हो। हालांकि उच्चाधिकारियों के आदेश पर केस के विवेचक व अन्य अफसरों ने गिरफ्तारी की और जेल भेजा।
अब तक की कार्रवाई
11 केसों की विवेचना कर रही है एसआईटी
96 आरोपियों को चिह्नित किया था
22 आरोपियों की मौत चुकी है
40 को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है एसआईटी
01 आरोपी की जेल में हो चुकी है मौत
34 आरोपी अब भी फरार हैं