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अमर उजाला ‘फोकस प्वाइंट’ में जानें, क्या हैं बुद्धिजीवियों के बेबाक बोल...

Thu, 19 Jan 2017 09:56 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 19 Jan 2017 09:56 AM IST
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amarujala focus point meeting in kanpur
अमर उजाला में फोकस प्वाइंट ग्रुप डिस्कशन - फोटो : अमर उजाला
जिस शहर में लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हों, वहां इसके सुंदरीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये बरबाद करने का क्या औचित्य है। जनप्रतिनिधि चुनते समय हमें उनके शहर के प्रति नजरिये के बारे में जरूर जानना चाहिए। जनप्रतिनिधि शहर की मूलभूत समस्याओं से कितने वाकिफ हैं और पद पर रहते हुए विकास के लिए कितने सजग रहे। कानपुर अमर उजाला ऑफिस में बुधवार को प्रबुद्ध समाज के साथ चुनावी मुद्दों और मतदान जागरूकता के लिए आयोजित फोकस प्वाइंट में शहरवासियों ने अपनी राय बेबाकी के साथ रखी। 19 फरवरी को होने वाले चुनाव में वह किस उम्मीदों के साथ जनप्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे, इसी बानगी भी चर्चा के दौरान सामने आई। चर्चा से एक बात तो साफ है कि अब चुनावों में राजनीतिक दलों की जाति-धर्म, क्षेत्रवाद जैसे मुद्दों पर दाल नहीं गलने वाली है। शहर के सुनियोजित विकास की ठोस और व्यावहारिक कार्ययोजना पर ही बात बनेगी। चर्चा के अंत में सभी ने एक स्वर में मतदान करने और करवाने का संकल्प लिया।
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जानें क्या हैं सबके विचार...
प्रोफेसर डॉ. मीता जमाल ने कहा कि बेसिक से लेकर डिग्री स्तर तक योग्य शिक्षकों की भारी कमी है। चुने हुए विधायक सरकार पर इस बात का दबाव बनाएं कि योग्य और स्थायी शिक्षिकों की नियुक्ति की जाए। संविदा पर शिक्षिकों की नियुक्ति बंद होनी चाहिए।
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डीएवी पीजी कॉलेज के शिक्षक डॉ. जयशंकर पांडेय ने कहा कि शहर में सेंट्रल यूनिवर्सिटी की स्थापना की जानी चाहिए। इससे शहर के युवाओं को बेहतर शिक्षा के साथ रोजगार के भी अवसर मिलेंगे। निजी स्कूलों की फीस को भी तर्कसंगत बनाने की दिशा में विधायकों को प्रयास करने चाहिए।
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डॉ. पुष्कर पांडेय ने कहा कि शहर के युवाओं के बेहतर शिक्षा पाने के बाद भी नौकरी के लिए दिल्ली-मुंबई का रुख करना पड़ता है। शहर में रोजगारपरक पाठ्यक्रमों में और इजाफा किया जाना चाहिए। विधायकों को इसके लिए भी प्रयास करने होंगे।
श्रीगुरू सिंह सभा, लाटूश रोड के प्रधान हरविंदर सिंह लार्ड ने कहा कि कानपुरवासी अपने विधायकों से यही चाहते हैं कि वह शहर के प्रति सकारात्मक सोच रखे। इसी सोच के साथ शहर को विकास की दिशा दी जा सकती है। अतिक्रमण, जाम जैसी समस्याओं से लोगों को रोज दो-चार होना पड़ता है।
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आरएन बाजपेयी ने कहा कि शहर में सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल बनाने की बातें की जाती हैं। हकीकत यह है कि शहर में कई बार डायरिया जैसी बीमारियों से लोगों की जान चली जाती है, जिनके इलाज में महज 200 से 300 रुपये का ही खर्च होता है। चिकित्सा सुविधाएं और बढ़नी चाहिए।
आईएमए अध्यक्ष  डॉ. प्रवीन कटियार ने कहा कि विधायकों को सबसे पहले तो अपनी विधानसभा में इतनी साफ-सफाई रखनी चाहिए कि बीमारियां फैलें ही नहीं। यदि कोई बीमारी होती भी है तो अस्पतालों में इतनी सुविधाएं हो कि लोगों को सहजता से सस्ता और बेहतर इलाज मिले। 
मो. तालिब ने कहा कि यह शहरवासियों का सौभाग्य है कि उनके पास ग्रीन पार्क जैसी धरोहर है, लेकिन उपेक्षा के कारण इसके जितना विकास होना चाहिए वह नहीं हुआ। इसकी दर्शक क्षमता आधी रह गई है। यदि सारे विधायक अपनी निधि से थोड़ा-थोड़ा काम करा दें, तो स्थिति सुधर जाएगी।
महिला शहर काजी डॉ. हिना जहीर नकवी ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा और सुरक्षा आज भी बड़े मुद्दे बने हुए हैं। विधायकों से यही अपेक्षा है कि वह इन मुद्दों पर प्रभावी कदम उठाएं। शहर का माहौल और सुविधाएं ऐसी हों कि बेटियां-महिलाएं खुद को सुरक्षित समझें।
हलीम कॉलेज प्रवक्ता प्रो. खान अहमद फारूख ने कहा कि शहर में साफ-सफाई हो। शैक्षिक वातावरण बेहतर बने। स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हों। चयनित विधायकों और सरकार से यही उम्मीद है कि वह इन मुद्दों पर विशेष रूप से काम करेंगे। 
बार एसोसिएशन महामंत्री योगेंद्र अवस्थी ने कहा कि विधायकों से यही उम्मीद है कि वह विकास के साथ सुनियोजित विकास की प्लानिंग बनाएं। ताकि किसी अफसर के ट्रांसफर होने पर भी वह प्लान लगातार जारी रहे। अभी तो अफसर के ट्रांसफर होते ही योजना अटक जाती है।
डीजी पीजी कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. साधना सिंह ने कहा कि शहर के जलाशयों, नदियों का संरक्षण हो। तालाबों पर कब्जे हो चुके हैं। पांडु नदी अतिक्रमण की वजह से विलुप्त हो रही है। इन्हें बचाने का प्रयास किसी विधायक ने नहीं किया। उच्च शिक्षण संस्थानों में पद खाली हैं। शिक्षा प्रभावित हो रही है। राजनेता इस पर ध्यान दें। 
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष  तरुण खेत्रपाल ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र का विकास किसी विधायक के एजेंडे में नहीं है। शहर में जीती गई सीट के आधार पर लखनऊ से विकास तय होता है। यह धारणा खत्म करनी होगी। औद्योगिक क्षेत्र में विकास का कोई एक बिंदु नहीं है, जिसे गिनाया जाए। समूचा उद्योग मूलभूत जरूरतों के लिए जूझ रहा है। यहां नए सिरे से बेहतरी की जरूरत है।
सौहार्द के साथ लगे ठहाके भी
फोकस ग्रुप में मौजूद कवि मुकेश श्रीवास्तव और कवियित्री शबाना नूर की चार लाइनों ने सांप्रदायिक सौहार्द के भाव के साथ लोगों को ठहाके लगाने को भी मजबूर कर दिया।

मुकेश ने ‘38 पड़े मुलायम, 220 गए अखिलेश में, अइसा सिर्फ घटित होता है अपने उत्तर प्रदेश में। लगता है छद्म रूप से नेताजी ही नचा रहे, जनता में जाने से पहले चाचाजी से बचा रहे।’ सुनाकर हंसाया तो शबाना ने ‘नए गुलों से हम अपना वतन सजाएंगे, मोहब्बतों का नया गुलिस्तां बनाएंगे। ये नफरतों के अंधेरे पनाह मांगेंगे, मोहब्बतों के चराग इसमें हम जलाएंगे।’ से सौहार्द की अलख जगाई।
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