Amar Ujala Samvad: रमेश अवस्थी ने दिए जनता के सवालों के जवाब, कहा- जनता को शहर के विकास का मॉडल बनाने का हक
Kanpur News: अमर उजाला संवाद में भाजपा प्रत्याशी रमेश अवस्थी ने लोगों के सवालों के जवाब दिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे पत्रकारिता के पेश में आने से पहले राजनीति से जुड़े थे। डिग्री कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। पारिवारिक पृष्ठभूमि में जनसंघ की सोच मिली।
विस्तार
कानपुर महानगर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी रमेश अवस्थी का कहना है कि उन्होंने कानपुर को बचपन से देखा है। कानपुर की खासियतें भी पता हैं और खामियां भी उनके जेहन में हैं। वह कानपुर का संपूर्ण विकास चाहते हैं। अवस्थी मंगलवार शाम अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में आए और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कानपुर को लेकर अपना विजन और तौर-तरीकों के बारे में भी बताया।
कहा कि कानपुर का जो भी विकास होगा, उसका एजेंडा और मॉडल यहां की जनता ही तैयार करेगी। रमेश अवस्थी ने गंभीर मसलों पर अपना नजरिया पेश किया, तो यह भी साफ किया कि वे पत्रकारिता के पेश में आने से पहले राजनीति से जुड़े थे। डिग्री कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। पारिवारिक पृष्ठभूमि में जनसंघ की सोच मिली। उन सवालों का भी जवाब दिया, जिनमें उन्हें बाहरी कहा जा रहा था। संवाद के दौरान यह एजेंडा भी स्पष्ट किया कि हर जनप्रतिनिधि अपने स्तर के काम कराए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
कानपुर के औद्योगिक विकास के क्या करेंगे? -विजय त्रिपाठी, उप्र विद्युत मजदूर संघ
जवाब: कानपुर के विकास के लिए बिजली, पानी, सड़क, सुरक्षा रोजगार और उद्योग का मॉडल कानपुर के लोग ही बनाएंगे। इसके लिए एक टोल फ्री नंबर जारी कर सभी की राय ली जाएगी। पूर्व आईएएस और सेवानिवृत इंजीनियर की टीम इस काम में लगाई जाएगी। शहर की समस्याओं को अब जुगाड़ नहीं स्थायी समाधान से हल करेंगे। इसे पूरा करने के लिए जनता का साथ चाहिए।
शहर को क्रासिंग और जाम से मुक्त कराने के लिए क्या करेंगे? -हरि त्रिपाठी, सामाजिक कार्यकर्ता
जवाब: जाम और अतिक्रमण प्रदेश और पूरे देश की समस्या है। लोगों को जाम से मुक्त कराने के लिए फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। पार्किंग का स्थान तय किया जाएगा, ताकि बाजारों और मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण न हो पाए। ये दोनों समस्याएं मेरे एजेंडे में शामिल हैं, इन्हें प्राथमिकता से हल कराएंगे।
पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर प्रयास क्यों नहीं किया जाता? -मुन्ना हजारिया, कर्मचारी नेता
जवाब: कुछ मुद्दे नीतिगत होते हैं, उन्हें हल करना सांसद स्तर पर नहीं हो सकता है। इसके लिए सरकार नीति बनाती है। उसी के आधार पर फैसले लिए जाते हैं। मैं जीतने के बाद यहां के कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखते हुए उनके मुद्दे सरकार तक जरूर पहुंचाऊंगा।
वित्तविहीन कॉलेजों के शिक्षकों के वेतन के लिए क्या कदम उठाएंगे? -अखंड प्रताप सिंह, शिक्षक नेता
जवाब: ऐसे सभी शिक्षकों का जो भी संगठन हो वे मुझे ज्ञापन दें, उनकी समस्याओं को हल कराने के लिए कुलपति से लेकर प्रधानमंत्री तक उनकी बात पहुंचाने की जिम्मेदारी मेरी है।
धर्मांतरण कराने के आरोप लगाकर इसाइयों को सताया जाता है, इसे कैसे रोकेंगे? -मरियम मैर्कटिस, समाजसेवी
जवाब: धर्मांतरण नहीं कराएंगे तो कोई परेशान नहीं करेगा, ये मेरी गारंटी है। कोई संस्था या पुलिस इसके लिए परेशान नहीं कर सकती।
परिषदीय स्कूलों की हालत सुधारने के लिए क्या कदम उठाएंगे? -अमित खत्री, कानपुर सिंधी समाज के उपाध्यक्ष
जवाब: सरकारी स्कूलों की दशा पिछले कुछ सालों से सुधर रही है। जहां पर कमी हैं, वहां कायाकल्प कराया जाएगा। आने वाले समय में सरकारी स्कूलों को इस तरह तैयार करेंगे कि मध्यम वर्ग के लोग अपने बच्चों का दाखिला कराएं।
महाविद्यालयों में दोहरी वेतनमान प्रणाली चल रही है। इसे कैसे हल कराएंगे? -अरुणेश अवस्थी, डीबीएस कॉलेज
जवाब: जो समस्याएं यहां से हल हो सकेंगी, उसे खुद करूंगा। जो केंद्र या प्रेदश स्तर से हल होंगी, उन्हें प्रदेश सरकार से हल कराने की भरपूर कोशिश होगी। आप निश्चिंत रहिये, आम लोगों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आपकी क्या कार्ययोजना है? -विनोद शुक्ला, लॉ कालेज संचालक
जवाब: मेरा फोकस केवल शिक्षा और स्वास्थ्य नहीं है। मेरा सपना विकसित कानपुर बनाने का है। इसके लिए शहर की समस्याओं को पहचानकर उनका निदान कराने की पूरी कार्ययोजना बनाई जाएगी।
भाजपा की कर्मचारी विरोधी छवि बन रही है, इसे कैसे दूर करेंगे? -विष्णु अवतार पांडेय, केस्को कर्मचारी नेता
जवाब: कर्मचारियों की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा। उनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। भाजपा सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। हम सबका ध्यान रखने वाले लोग हैं।
स्वतंत्रा सेनानियों के उत्तराधिकारियों को पेंशन दिलाने के लिए क्या कदम उठाएंगे? -सर्वेश कुमार पांडेय निन्नी
जवाब: मैं सांसद चुना जाऊंगा, तो इसके लिए पूरा प्रयास करेंगे कि स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों को पेंशन मिले और वह आसानी से अपना जीवन यापन कर सकें।