अमर उजाला एक्सक्लूसिव: 16 माह में एक चौथाई से अधिक आबादी का चालान, फिर भी नहीं सुधरी है ट्रैफिक व्यवस्था
यातायात पर सीसीटीवी कैमरों से चौकस निगरानी का ही असर है कि 16 महीनों में ही नियमों का उल्लंघन करने वाले 11.52 लाख लोगों के चालान किए गए हैं। वहीं, शहरवासियों ने ई-चालान के 22 करोड़ 33 लाख रुपये का शमन शुल्क भी चुकाया है।
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कानपुर में ट्रैफिक पुलिस ई-चालान पर ई-चालान कर रही है, लेकिन शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। 16 माह के अंदर ट्रैफिक पुलिस की ओर से 11.52 लाख लोगों का ऑनलाइन चालान कर दिया गया, यानी शहर की लगभग एक चौथाई आबादी का चालान हुआ।
कुल 22 करोड़ 33 लाख रुपये शमन शुल्क जमा किया गया है। इनमें से ज्यादातर वो लोग हैं, जिन्होंने रॉन्ग साइड एंट्री, सड़क किनारे पार्किंग, नो एंट्री, तीन सवारी, ओवर लोडिंग, बगैर सीट बेल्ट व हेलमेट के सफर तय किया था। डीसीपी ट्रैफिक संकल्प शर्मा का कहना है कि ई-चालान के कारण लोगों में ट्रैफिक सेंस के प्रति जागरूकता बढ़ी है। अब बिना हेलमेट के बहुत ही कम लोग सड़क पर दिखते हैं।
शहर में ट्रैफिक सुधार की कवायद में ई-चालान सबसे बड़ा फैक्टर है। चौराहे पर मोबाइल लेकर खड़े होमगार्ड को भी देखकर लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करने से डरते हैं। हालांकि, ई-चालान की आड़ में वसूली भी बढ़ी है। हाल ही में आए जिले के प्रभारी मंत्री जितिन प्रसाद के सामने भाजपाइयों ने ही ई-चालान को वसूली का बड़ा कारण बताया था, जिस पर मंत्री ने गंभीरता से विचार करने को कहा था।
दरअसल, जून 2019 में शहर में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने मोबाइल से ई- चालान करना शुरू किया था। फरवरी 2020 से ट्रिपल सी के तहत शहर में लगे कैमरों से ई-चालान शुरू हुए थे। मार्च 2021 को पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद ट्रैफिक सुधारने के लिए धड़ल्ले से ई-चालान किए गए। पिछले सालों के मुकाबले चालानों की संख्या तीन गुना तक पहुंच गई। चालान की राशि से सरकारी खजाना भी बढ़ने लगा।
यदि इन 22 करोड़ 33 लाख के ई-चालान की बात करें, तो लोगों ने 10 करोड़, 29 लाख, 97 हजार रुपये ऑनलाइन जमा किए हैं। वहीं, 9 करोड़ रुपये कोर्ट में जमा किए गए हैं। इसके अलावा दो करोड़ 98 लाख रुपये ट्रैफिक कार्यालय और 3 लाख 37 हजार रुपये से अधिक ऑन स्पॉट शमन शुल्क चुकाया गया है। यह शुल्क राज्य सरकार के खाते में जाता है। वहीं, 2020 में लगभग ढाई लाख चालान ही किए गए थे।
फर्जी नंबर प्लेटों का चलन बढ़ा
ई-चालान के डर से फर्जी नंबर प्लेटों का चलन भी बढ़ गया है। ज्यादातर दो पहिया वाहन और यात्री वाहन फर्जी नंबर लगाकर चल रहे हैं। यही कारण है कि विभाग को एक साल के अंदर 50 से ज्यादा चालानों को निरस्त करना पड़ा, क्योंकि फोटो किसी और की थी प्लेट का नंबर किसी और वाहन का था।
ट्रैफिक नियमों का पालन करने में कानपुर टॉप थ्री में है, जिसके चलते लगातार चालान हो रहा है। लोगों को इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाएगी। - संकल्प शर्मा, डीसीपी यातायात