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ट्रांसगंगा में सभी आवेदकों को प्लॉट

Wed, 20 Apr 2016 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 20 Apr 2016 01:28 AM IST
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All applicants in Tronsganga Plot
यूपीएसआईडीसी में लाटरी के दौरान हंगामा करते आवेदक - फोटो : amar ujala
कानपुर। यूपीएसआईडीसी की महत्वाकांक्षी परियोजना ट्रांसगंगा सिटी में सभी आवेदकों को प्लॉट आवंटित कर दिए गए। यूपीएसआईडीसी ने 15 अगस्त 2015 को ट्रांसगंगा सिटी आवासीय योजना लांचकर 711 आवासीय प्लाटों के लिए आवेदन मांगे थे। लोगों के दिलचस्पी न लेने पर तीन बार इसकी तारीख बढ़ाई गई। 20 नवंबर को आखिरी तारीख तक विभाग के पास कुल 1683 आवेदन जमा हुए थे। लॉटरी में देरी की वजह से 174 लोगों ने योजना में हिस्सा लेने से इनकार किया और रिफंड के लिए आवेदन किया। 14 लोगों के प्रपत्र सही नहीं होने के कारण रिजेक्ट कर दिए गए। शेष 1495 लोगों के लिए लॉटरी निकाली जानी थी। इसमें भी आरक्षण व्यवस्था लागू की गई थी। इस लिहाज से कुल 711 प्लाटों में करीब 400 प्लाटों का ही आवंटन संभव था। इससे करीब 1100 आवेदकों के करीब 25 करोड़ रुपये (प्लाट की कीमत के हिसाब से जमा की गई अग्रिम राशि) वापस करने पड़ते। इधर, रातो रात अफसरों ने योजना बनाई कि सभी को प्लाट आवंटित कर दिए जाएं तो 25 करोड़ रुपये रिफंड नहीं करने पड़ेंगे।
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एकमुश्त जमा करने वालों ने किया हंगामा
लॉटरी प्रक्रिया के दौरान जब यह घोषणा की गई कि सभी आवेदकों को प्लॉट दिए जाएंगे तो एकमुश्त पैसा जमा करने वाले आवेदकों ने हंगामा किया। लोगों ने कहा कि जब सभी को प्लॉट दिए जाने थे तो उनसे पूरा पैसा क्यों जमा कराया गया? उनका पैसा वापस किया जाए वह भी किस्तों में भुगतान करेंगे। इस पर अफसरों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। अफसरों ने तर्क दिया कि पूरा पैसा जमा करने की योजना पहले की है, जबकि सभी को प्लॉट आवंटित करने की योजना बाद में बनी। इस पर एकमुश्त पैसा जमा करने वालों ने विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। कहा कि पैसा लेकर सभी आवेदकों को प्लॉट दे दिए गए। कहा कि ट्रांसगंगा में विकास होने में पांच से 10 साल लगेंगे। ऐसे में उनके लाखों रुपये फंस गए हैं।
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आवेदकों ने अध्यक्ष को घेरा
ट्रांसगंगा के आवासीय प्लाटों की लॉटरी प्रक्रिया रात आठ बजे रोक देने पर आवेदकों ने जमकर हंगामा किया। मंच पर चढ़कर अधिकारियों को बुरा भला कहा। अध्यक्षता कर रहीं रिटायर्ड जज पूनम श्रीवास्तव से सवाल किया कि दो बजे का समय देने के बाद लॉटरी प्रक्रिया शाम चार बजे क्यों शुरू हुई? लॉटरी प्रक्रिया रोके जाने पर वह हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहीं? रात आठ बजे तक 120 वर्ग मीटर श्रेणी के करीब 250 आवेदकों की लॉटरी निकल सकी थी। पब्लिक का हंगामा देखकर यूपीएसआईडीसी के रीजनल मैनेजर अजीत सिंह, राकेश झा, ट्रांसगंगा के परियोजना अधिकारी समेत अन्य अफसर मंच छोड़कर चले गए, जबकि अध्यक्ष वहीं बैठी रहीं। हंगामा बढ़ने पर उन्होंने ही पब्लिक को शांत कराया। भरोसा दिलाया कि कल लॉटरी होने के बाद भी अनियमितता नहीं हो पाएगी। इस कहा कि बार बार आने जाने में उनका टाइम तो खराब हो रहा है। आज ही कई घंटे बैठने के बाद कुछ हाथ नहीं लगा। इस पर उन्होंने पब्लिक के सामने ही मटकों में सील लगवाई और अगले दिन सुबह से ही लॉटरी प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा दिया।
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न एमडी आए, न चीफ इंजीनियर
यूपीएसआईडीसी ने लॉटरी प्रक्रिया के लिए हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज को तो बुला लिया लेकिन इतनी महत्वाकांक्षी परियोजना की लॉटरी के दौरान वरिष्ठ अफसर गायब रहे। न तो एमडी मनोज सिंह शामिल हुए न ही चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा। लोग इसकी चर्चा करते रहे कि हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज का भी सम्मान नहीं रखा।
 
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