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जीका वायरस को लेकर कानपुर में अलर्ट: बुखार वाली गर्भवतियों की होगी मॉनिटरिंग
Mon, 25 Oct 2021 10:06 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 25 Oct 2021 10:06 PM IST
सार
कानपुर में जच्चा-बच्चा अस्पताल में आने वाले प्रत्येक गर्भवती से बुखार की हिस्ट्री पूछी जा रही है। उसकी डायग्नोसिस में बुखार का विशेष कॉलम हो गया है।
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जीका वायरस
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
जच्चा-बच्चा अस्पताल में आने वाली ऐसी गर्भवती महिलाएं, जिनके गर्भधारण के कुछ पहले या बाद में हल्के बुखार की हिस्ट्री रही है, उनकी मॉनीटरिंग की जाएगी। खासतौर पर गर्भस्थ शिशु पर ध्यान रखा जाएगा। बराबर अल्ट्रासाउंड के जरिये शिशु की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
अगर किसी को जीका का शक हुआ तो उसके लिए अलग से कार्ययोजना पर विचार किया जाएगा। जीका वायरस का संक्रमण डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर से फैलता है। नगर में एडीज मच्छर बहुतायत में हैं। जीका वायरस के संक्रमण से सबसे बड़ा खतरा गर्भस्थ शिशुओं को होता है।
अगर मां को संक्रमण हो गया तो यह वायरस शिशु के शरीर में पहुंच जाता है और उसके न्यूरो सिस्टम को प्रभावित कर देता है। बच्चे का सिर छोटा हो जाता है। कोशिकाएं नहीं बन पाती और उसके स्पाइनल कॉर्ड में सूजन आ जाती है, जिससे उसका मस्तिष्क प्रभावित होता है।
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जच्चा-बच्चा अस्पताल में आने वाले प्रत्येक गर्भवती से बुखार की हिस्ट्री पूछी जा रही है। उसकी डायग्नोसिस में बुखार का विशेष कॉलम हो गया है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर किरन पांडेय ने बताया कि अभी तक किसी महिला की जीका की जांच नहीं हुई है। इससे बुखार के आधार पर सतर्कता बरती जा रही है। इसके अलावा अगर किसी में जीका के लक्षण मिले तो उसकी जांच भी कराई जाएगी।
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अगर किसी को जीका का शक हुआ तो उसके लिए अलग से कार्ययोजना पर विचार किया जाएगा। जीका वायरस का संक्रमण डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर से फैलता है। नगर में एडीज मच्छर बहुतायत में हैं। जीका वायरस के संक्रमण से सबसे बड़ा खतरा गर्भस्थ शिशुओं को होता है।
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अगर मां को संक्रमण हो गया तो यह वायरस शिशु के शरीर में पहुंच जाता है और उसके न्यूरो सिस्टम को प्रभावित कर देता है। बच्चे का सिर छोटा हो जाता है। कोशिकाएं नहीं बन पाती और उसके स्पाइनल कॉर्ड में सूजन आ जाती है, जिससे उसका मस्तिष्क प्रभावित होता है।
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जच्चा-बच्चा अस्पताल में आने वाले प्रत्येक गर्भवती से बुखार की हिस्ट्री पूछी जा रही है। उसकी डायग्नोसिस में बुखार का विशेष कॉलम हो गया है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर किरन पांडेय ने बताया कि अभी तक किसी महिला की जीका की जांच नहीं हुई है। इससे बुखार के आधार पर सतर्कता बरती जा रही है। इसके अलावा अगर किसी में जीका के लक्षण मिले तो उसकी जांच भी कराई जाएगी।