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अकबरपुर लोकसभा: महाराजपुर में परिसीमन संग बदला भाजपा का भाग्य, सपा को बढ़त की आस...जानें क्या कहते हैं मतदाता

Fri, 10 May 2024 01:42 PM IST
हिमांशु अवस्थी पुनीत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
पुनीत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 10 May 2024 01:42 PM IST
सार

Kanpur News: पिछले दो विधानसभा चुनावों में भाजपा को महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र में 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं। राजनैतिक परिदृश्य से देखा जाए, तो वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इलाके का परिसीमन क्या बदला भाजपा का भाग्य ही बदल गया।

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Akbarpur Lok Sabha, BJPs fortunes changed with delimitation in Maharajpur, SP hopeful of lead
महाराजपुर विधानसभा में चौपाल लगाकर चुनाव पर चर्चा करते व्यापारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश के औद्योगिक विकास की बात हो या धर्म और आस्था की, अकबरपुर लोकसभा की महाराजपुर विधानसभा दोनों ही क्षेत्रों में नई इबारत लिख रही है। यहां बसे रूमा औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं यहां के विकास की कहानी कह रहा है। यहां बसे बौद्ध धर्म की आस्था के केंद्र विपश्यना और हिंदुओं की भक्ति का गढ़ श्री बालाजी मंदिर सलेमपुर की शक्तियां भक्तों के मन को सुकून देती है। राजनैतिक परिदृश्य से देखा जाए, तो वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इलाके का परिसीमन क्या बदला भाजपा का भाग्य ही बदल गया।

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कभी जीत को तरस रही भाजपा ने इसे भगवा का गढ़ बना दिया। इसी गढ़ की बदौलत भाजपा उम्मीदवार जीत की हैट्रिक लगाने का सपना संजो रहे हैं। अमर उजाला ने जब इस क्षेत्र के मतदाताओं की थाह लेने की कोशिश की तो पता चला कि यहां के मतदाताओं के मन में कई किंतु-परंतु जुड़े हैं। शहरी क्षेत्र की तस्वीर तो कुछ साफ दिखी लेकिन ग्रामीण मतदाताओं के मन और जुबान में फर्क साफ नजर आया। वह कई मुद्दों पर सरकार की तारीफ भी करते हैं लेकिन वोट देने की बात पर कुछ टाल मटोल करते नजर आते हैं।

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2007 तक भाजपा जीती नहीं, परिसीमन के बाद से पा रही आधे से ज्यादा वोट
वर्ष 2012 परिसीमन से पहले इस विधानसभा क्षेत्र का अधिकतर इलाका सरसौल विधानसभा में आता था। तब भाजपा 1991 से लेकर 2007 तक के चुनावों में कभी जीत न सकी। परिसीमन बदलने के बाद इस सीट के सियासी समीकरण ऐसे बदले कि 2012 से अबतक हुए तीन विधानसभा चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता सतीश महाना बड़े मार्जिन से ही जीते।

महाना को 61 फीसदी वोट देकर जिता दिया
भाजपा ने वर्ष 2012 के पहले चुनाव में करीब 38 फीसदी वोट हासिल किए। इस चुनाव में बसपा को 24.34 फीसदी वोट मिले थे जबकि सपा को 23 फीसदी मत हासिल हुए। कांग्रेस को महज आठ फीसदी वोट से संतोष करना पड़ा था। 2017 के चुनाव में जहां सपा और बसपा को करीब सात फीसदी से ज्यादा वोटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं भाजपा को करीब 18 फीसदी का फायदा हुआ और महाना 55 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल इस सीट से दूसरी बार विधायक बने। 2022 में हुए चुनाव में यहां की जनता से महाना को 61 फीसदी वोट देकर जिता दिया।

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लोकसभा में भी कमल ने किया कमाल
विधानसभा की ही तरह लोकसभा चुनाव में भाजपा के कमल ने जबकर वोट बटोरे। 2014 में जहां भाजपा प्रत्याशी देवेन्द्र सिंह भोले ने यहां से अजेय बढ़त बनाई थी। इस बार भी सतीश महाना जिस तरह खुलकर उनका साथ दे रहे हैं, वह उनके लिए कम से कम राहत की बात है। हालांकि सपा प्रत्याशी राजाराम पाल के साथ इस बार कांग्रेस के हाथ का साथ है। ऐसे में वह भी पिछड़े व ग्रामीण इलाकों में किसी कमाल की उम्मीद कर रहे हैं।

बाहर साल बाद भी कई क्षेत्र में नहीं पहुंचा विकास
परिसीमन के बाद बने इस विधानसभाक्षेत्र में सफीपुर, चकेरी, हंसपुरम, आवास विकास, गांधीग्राम, हरजेंदर नगर, सनिगवां, चंदारी, यशोदानगर, बंसत विहार, बिनगवां, जरौली, कर्रही, पशुपतिनगर और नौबस्ता जैसे इलाके आते हैं। क्षेत्र के कई हिस्सों में बारह साल बाद भी विकास पहुंच से दूर है। कुछ इलाकों में जल निगम की लाइन नहीं पहुंची है। गांधीग्राम जैसे इलाके के एक बड़े क्षेत्र में सीवर लाइन ही नहीं पड़ी है। कर्रही बाजार में अतिक्रमण और टूटी सड़कें बड़ी समस्या है।

सवर्ण या दलित बनेंगे जीत के आधार
4.60 लाख मतदाताओं वाली इस विधाानसभा सीट में सबसे ज्यादा 1.46 लाख सवर्ण मतदाता हैं। ये संख्या किसी भी प्रत्याशी को जीत का सेहरा पहनाने के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि भाजपा और बसपा दोनों के ही प्रत्याशी सवर्ण हैं, ऐसे में सर्वणों के पास अपनी पसंद का प्रत्याशी चुनने का विकल्प मौजूद है। ,

ओबीसी के करीब 78 हजार मतदाता हैं
करीब 90 हजार दलित मतदाता हैं ,जो परंपरागत तौर पर तो बसपा का वोट कैडर माना जाता है लेकिन देखना यह है कि इस बार इनका झुकाव किस दल की ओर रहेगा। सपा ने इस बार यहांं से पाल बिरादरी के नामी चेहरे पर दांव लगाया है। वहीं, सीट पर ओबीसी के करीब 78 हजार मतदाता हैं, जिनको अपना बनाने और बताने में भाजपा-सपा दोनों ही कोई कसर नहीं छोड़ रही। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है कि ऊंट किस करवट बैठेगा।

जानें क्या बोले मतदाता

  • मोदी सरकार का काम बहुत अच्छा है। लोगों को मुफ्त राशन दे रहे हैं लेकिन इससे बेहतर होता कि वह लोगों को रोजगार देते।  -राकेश तिवारी
  • राम मंदिर सरकार की बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए सरकार बधाई की पात्र है। अब बस युवाओं की नौकरी के लिए ध्यान दें तो ज्यादा बेहतर रहेगा।  -अशोक महेश्वरी
  • इस बार मुकाबला शानदार है। सपा-कांग्रेस के एक साथ आने से माहौल काफी बदला है। हालांकि भाजपा की जीत की उम्मीद सबसे ज्यादा है।  -हिमांशु शुक्ला
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