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Kanpur News: रोगी का एआई अवतार कराएगा बेड़ा पार

Sun, 09 Feb 2025 01:52 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 09 Feb 2025 01:52 AM IST
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AI avatar of the patient will help the fleet cross
GSVM Medical College and IIT will work together on the project
कानपुर। मनोरोगी का आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) प्रारूप अवतार ही उसका काउंसलर बनेगा। वह रोगी से यह जानकारी भी लेगा कि उसने दवा खाई कि नहीं, गलतियों पर फटकार भी लगाएगा और काउंसलिंग भी करेगा। इस प्रोजेक्ट पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का मनोरोग विभाग और आईआईटी मिलकर काम करेंगे।
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शनिवार को इस संबंध में जीएसवीएम में प्रोजेक्ट की प्रस्तुति दी गई। साथ ही रोगी की जांच से यह भी पता लग जाएगा कि उसे कौन सी दवा जल्दी फायदा करेगी। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि अमेरिका में अवतार का इस्तेमाल पहले से हो रहा है। अब यहां भी किया जाएगा।प्राचार्य ने बताया कि आईआईटी के कॉग्नेटिव साइंसेस के साथ एआई प्रारूप पर प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। अवतार का इस्तेमाल अवसाद, एंजाइटी आदि मर्ज के रोगियों के पर किया जाएगा।
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यह प्रयोग पहले 30 रोगियों पर किया जाएगा। ऐसे में रोगी को काउंसलिंग के लिए बार-बार डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उसका अवतार ही उसे सचेत करता रहेगा। शुरुआत में अवसाद के रोगियों का अवतार आधारित इलाज होगा। इसके बाद इसका दायरा बढ़ा दिया जाएगा। रोगी का अपना एआई प्रारूप ही उसका फॉलोअप कर लेगा।
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अवतार के पास रोगी के बारे में सभी जानकारी होगी
प्राचार्य ने बताया कि अवतार के पास रोगी के बारे में सभी जानकारी रहेगी। रोग के लक्षण, समस्याओं आदि के बारे में उसे पता रहेगा। वह रोगी की काउंसलिंग उसी आधार पर करेगा। इसके साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिये यह भी पता किया जाएगा कि रोगी को अवसाद, एंजाइटी में कौन सी दवा जल्दी और अधिक फायदा करेगी। अभी रोगी में दवा का असर चार से छह सप्ताह के बाद दिखता है लेकिन एआई चिह्नित दवा जल्दी असर करेगी।

प्रोजेक्ट में शामिल होंगे 120 रोगी
इस प्रोजेक्ट में 120 रोगियों को शामिल किया जा रहा है। इसमें रोगी को दवा दी जाएगी, साथ ही सॉफ्टवेयर रोगी की स्थिति की समीक्षा करेगा। जिस दवा का जल्दी असर होगा, उसे रोगी के लिए उपयुक्त माना जाएगा। शनिवार को मेडिकल कॉलेज में प्रोजेक्ट की प्रस्तुति की दौरान प्राचार्य, मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी, आईआईटी के कॉग्नेटिव साइंसेस की प्रगति बाला सुब्रमण्यम और उनकी टीम मौजूद रही।
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