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प्लीज डॉक्टर, पांच मिनट देंगे!
Kanpur
Updated Tue, 14 Oct 2014 05:32 AM IST
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कानपुर। हैलट में एक मरीज बलवीर पेट में लगीं नली (पिग टेल) निकलवाने के लिए तीन दिन से मेडिसिन और सर्जरी विभाग के चक्कर लगा रहा है, लेकिन दोनों विभागों के डॉक्टर उसे एक - दूसरे के पास टरका रहे हैं। डॉक्टरों ने उसके बुजुर्ग माता, पिता की गुहार को भी अनसुना कर दिया। मरीज रैनबसेरा में दर्द से कराहने को मजबूर है। नली निकालने और ड्रेसिंग करने में बमुश्किल पांच-सात मिनट लगेंगे लेकिन डॉक्टरों के पास उसके लिए इतना समय भी नहीं है।
बलवीर (24) बांदा जिले के ग्राम मौदहा निवासी बाले सिंह का पुत्र है। वह दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता रहा है। बाले सिंह का आरोप है कि पिछले साल अगस्त में जमालपुर थाने की पुलिस ने बलवीर को थाने ले जाकर थर्ड डिग्री इस्तेमाल की थी। इससे उसके पेट में चोट लगी थी। बाद में बलवीर जमानत पर छूटा था। दो महीने पहले बलवीर के पेट में तकलीफ बढ़ी तो गांव के डॉक्टर को दिखाया। वहां से उसे हैलट रिफर कर दिया गया। 11 अगस्त को बलवीर को हैलट इमरजेंसी के मेडिसिन विभाग में डॉ. अशर्फी त्रिपाठी की यूनिट में भर्ती कराया गया। यहां पेट में अल्सर बताकर ऑपरेशन किया गया। डॉ. त्रिपाठी ने 19 अगस्त को उसकी छुट्टी कर दी। उसका बीएचटी नंबर 11832 है। उस समय उसके पेट में पस निकालने वाली दो नलियां लगी थीं। डॉक्टर ने एक - डेढ़ महीने बाद नली निकलवाने के लिए दोबारा बुलाया था। नौ अक्तूबर को बाले सिंह और उनकी पत्नी कौशिल्या दोपहर 12 बजे बेटे को लेकर हैलट इमरजेंसी के मेडिसिन विभाग पहुंचे। इमरजेंसी स्लिप बनवाने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने नली निकलवाने के लिए इमरजेंसी में ही सर्जरी विभाग भेजा, पर सर्जरी विभाग में नली नहीं निकाली गईं। दोनों विभागों के चक्कर लगाने के बाद कहा गया कि 10 अक्तूबर को आना। 10 अक्तूबर को सर्जरी विभाग की ओपीडी में डॉ. जीडी यादव ने देखा और उसे मेडिसिन विभाग रिफर कर दिया, पर पर्चा देखते ही मेडिसिन विभाग फिर सर्जरी विभाग में ही जाने को कहकर टरका दिया। इसी हालत में दोनों विभागों के चक्कर लगाते - लगाते परेशान बलवीर और उसके माता-पिता बेटे को इमरजेंसी के सामने रैन बसेरा में ले गए, जहां रविवार को भी बलवीर दर्द से कराहता रहा।
बलवीर को टरकाए जाने की जानकारी नहीं है। सोमवार को उसकी पिग टेल निकलवा दी जाएगी।
डॉ.आरके मौर्या, चिकित्सा अधीक्षक, हैलट
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बलवीर (24) बांदा जिले के ग्राम मौदहा निवासी बाले सिंह का पुत्र है। वह दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता रहा है। बाले सिंह का आरोप है कि पिछले साल अगस्त में जमालपुर थाने की पुलिस ने बलवीर को थाने ले जाकर थर्ड डिग्री इस्तेमाल की थी। इससे उसके पेट में चोट लगी थी। बाद में बलवीर जमानत पर छूटा था। दो महीने पहले बलवीर के पेट में तकलीफ बढ़ी तो गांव के डॉक्टर को दिखाया। वहां से उसे हैलट रिफर कर दिया गया। 11 अगस्त को बलवीर को हैलट इमरजेंसी के मेडिसिन विभाग में डॉ. अशर्फी त्रिपाठी की यूनिट में भर्ती कराया गया। यहां पेट में अल्सर बताकर ऑपरेशन किया गया। डॉ. त्रिपाठी ने 19 अगस्त को उसकी छुट्टी कर दी। उसका बीएचटी नंबर 11832 है। उस समय उसके पेट में पस निकालने वाली दो नलियां लगी थीं। डॉक्टर ने एक - डेढ़ महीने बाद नली निकलवाने के लिए दोबारा बुलाया था। नौ अक्तूबर को बाले सिंह और उनकी पत्नी कौशिल्या दोपहर 12 बजे बेटे को लेकर हैलट इमरजेंसी के मेडिसिन विभाग पहुंचे। इमरजेंसी स्लिप बनवाने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने नली निकलवाने के लिए इमरजेंसी में ही सर्जरी विभाग भेजा, पर सर्जरी विभाग में नली नहीं निकाली गईं। दोनों विभागों के चक्कर लगाने के बाद कहा गया कि 10 अक्तूबर को आना। 10 अक्तूबर को सर्जरी विभाग की ओपीडी में डॉ. जीडी यादव ने देखा और उसे मेडिसिन विभाग रिफर कर दिया, पर पर्चा देखते ही मेडिसिन विभाग फिर सर्जरी विभाग में ही जाने को कहकर टरका दिया। इसी हालत में दोनों विभागों के चक्कर लगाते - लगाते परेशान बलवीर और उसके माता-पिता बेटे को इमरजेंसी के सामने रैन बसेरा में ले गए, जहां रविवार को भी बलवीर दर्द से कराहता रहा।
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बलवीर को टरकाए जाने की जानकारी नहीं है। सोमवार को उसकी पिग टेल निकलवा दी जाएगी।
डॉ.आरके मौर्या, चिकित्सा अधीक्षक, हैलट