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सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों को निदेशक का इंतजार
Kanpur
Updated Sun, 11 Aug 2013 05:35 AM IST
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कानपुर। प्रदेश के सरकारी और अनुदानित इंजीनियरिंग कॉलेज कार्यवाहक निदेशक के सहारे चल रहे हैं। इससे शोध, शैक्षिक और संस्थान के विकास का कामकाज प्रभावित हो रहा है। एचबीटीआई, यूपीटीटीआई, अंबेडकर इंस्टीट्यूट में भी कार्यवाहक निदेशक काम कर रहे हैं। यह सिलसिला पिछले डेढ़ साल से चल रहा है।
स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत खुले बिजनौर, आजमगढ़, बांदा और अंबेडकर नगर इंजीनियरिंग कॉलेज भी कार्यवाहक निदेशक के सहारे हैं। इन कॉलेजों की स्थापना 2010 में हुई थी लेकिन अभी तक स्थायी निदेशक की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। कॉलेज भी दूसरे सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के कैंपस में संचालित किए जा रहे हैं। एचबीटीआई कानपुर में संचालित बिजनौर इंजीनियरिंग कॉलेज के पास अपनी भूमि, भवन, टीचिंग, नान टीचिंग स्टाफ नहीं है। यही वजह है कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मान्यता नहीं मिल सकी है। बिना मान्यता के संबंधित इंजीनियरिंग कॉलेज की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। यदि स्थायी निदेशक होता तो मान्यता का संकट खत्म हो सकता था। सूत्रों ने बताया कि एचबीटीआई के स्थायी निदेशक की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार कराए गए थे लेकिन मामला हाईकोर्ट में फंस गया है। यूपीटीटीआई के स्थायी निदेशक की नियुक्ति को लेकर जारी एक विज्ञापन निरस्त हो चुका है। नियुक्ति का दूसरा आवेदन मांगा गया है लेकिन साक्षात्कार की अगली तारीख तय नहीं हो सकी है। अंबेडकर इंस्टीट्यूट में भी कार्यवाहक निदेशक तैनात हैं।
नहीं आ रहे रजिस्ट्रार, भास्कर
कानपुर। नियुक्ति से जुड़ी पत्रावली और शैक्षिक दस्तावेज गायब होने के मामले में एफआईआर होने से एचबीटीआई के टीचर, रजिस्ट्रार की मुश्किल बढ़ गई है। नामजद मेकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के टीचर डॉ. जितेंद्र भास्कर 18 जून से संस्थान नहीं आ रहे हैं। लगातार छुट्टी बढ़ा रहे हैं। ठीक यही हाल रजिस्ट्रार नरेश कुमार का है। वह एफआईआर होने से पहले फरवरी, मार्च से ही संस्थान कम आ-जा रहे थे लेकिन अब आना बंद हो गया है। रजिस्ट्रार भी छुट्टी पर छुट्टी पर बढ़ा रहे हैं। इससे जरूरी कामकाज बाधित चल रहा है।
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स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत खुले बिजनौर, आजमगढ़, बांदा और अंबेडकर नगर इंजीनियरिंग कॉलेज भी कार्यवाहक निदेशक के सहारे हैं। इन कॉलेजों की स्थापना 2010 में हुई थी लेकिन अभी तक स्थायी निदेशक की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। कॉलेज भी दूसरे सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के कैंपस में संचालित किए जा रहे हैं। एचबीटीआई कानपुर में संचालित बिजनौर इंजीनियरिंग कॉलेज के पास अपनी भूमि, भवन, टीचिंग, नान टीचिंग स्टाफ नहीं है। यही वजह है कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मान्यता नहीं मिल सकी है। बिना मान्यता के संबंधित इंजीनियरिंग कॉलेज की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। यदि स्थायी निदेशक होता तो मान्यता का संकट खत्म हो सकता था। सूत्रों ने बताया कि एचबीटीआई के स्थायी निदेशक की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार कराए गए थे लेकिन मामला हाईकोर्ट में फंस गया है। यूपीटीटीआई के स्थायी निदेशक की नियुक्ति को लेकर जारी एक विज्ञापन निरस्त हो चुका है। नियुक्ति का दूसरा आवेदन मांगा गया है लेकिन साक्षात्कार की अगली तारीख तय नहीं हो सकी है। अंबेडकर इंस्टीट्यूट में भी कार्यवाहक निदेशक तैनात हैं।
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नहीं आ रहे रजिस्ट्रार, भास्कर
कानपुर। नियुक्ति से जुड़ी पत्रावली और शैक्षिक दस्तावेज गायब होने के मामले में एफआईआर होने से एचबीटीआई के टीचर, रजिस्ट्रार की मुश्किल बढ़ गई है। नामजद मेकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के टीचर डॉ. जितेंद्र भास्कर 18 जून से संस्थान नहीं आ रहे हैं। लगातार छुट्टी बढ़ा रहे हैं। ठीक यही हाल रजिस्ट्रार नरेश कुमार का है। वह एफआईआर होने से पहले फरवरी, मार्च से ही संस्थान कम आ-जा रहे थे लेकिन अब आना बंद हो गया है। रजिस्ट्रार भी छुट्टी पर छुट्टी पर बढ़ा रहे हैं। इससे जरूरी कामकाज बाधित चल रहा है।
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