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‘बुनकरों की दशा सुधारने को सर्वे जल्द’
Kanpur
Updated Wed, 13 Feb 2013 05:31 AM IST
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कानपुर। ‘ग्रामीण क्षेत्रों में रेशम उद्योग द्वारा बड़े पैमाने पर रोजगार देने की कार्य योजना तैयार हो चुकी है। इसके लिए बुनकरों की दशा सुधारने को जल्द सर्वे कराया जाएगा।’ ये बातें वस्त्र एवं रेशम उद्योग मंत्री शिव कुमार बेरिया ने अर्मापुर पीजी कालेज में मंगलवार को ‘उत्तर प्रदेश में लघु उद्योगों के विकास की संभावनाएं एवं रेशम उद्योग’ विषय पर आयोजित सेमिनार में कहीं।
बेरिया ने कहा कि आज के दौर मेंरेशम वस्त्रों का खासा चलन है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र को विस्तार देने के लिए बड़े कार्यक्रम तैयार किए हैं। सेमिनार में आर्थिक ब्यूरो के चेयरमैन और विभागाध्यक्ष डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि लघु उद्योगों में न्यूनतम लागत पर अधिकतम रोजगार मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अब तक 43,580 लघु उद्योग स्थापित हो चुके हैं जिसमें 20,200 लघु उद्योगों की दशा दयनीय है। इन उद्योगों की दशा सुधारने के लिए आर्थिक व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वक्त आ गया है कि प्रो. अमर्त्य सेन की पूंजी प्रधान तकनीक को अपनाए जाएं। आर्डिनेंस फैक्ट्रीज के महाप्रबंधक वीरेंद्र गांधी ने कहा कि अब प्रदेश में उद्योगों की बड़े पैमाने पर स्थापना की आवश्यकता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे उद्योग स्थापित किए जाएं जो शहरी क्षेत्रों में स्थापित नहीं हो सके हैं। प्राचार्य डॉ. जीएल श्रीवास्तव ने मंत्री शिवकुमार बेरिया का स्वागत किया। प्रबंध समिति की सचिव रंजिता रश्मि ने धन्यवाद दिया। सेमिनार में डॉ. धीरेंद्र सिंह, डीएन वर्मा, डॉ. केएन मिश्रा, एनके राय, डॉ. अखिलेश कुमार दीक्षित, डॉ. संगीत सितानी, डॉ. रति शुक्ला, डॉ. मेघना मिश्रा आदि मौजूद थीं। सेमिनार का संचालन डॉ. कल्पना सिंह ने किया।
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बेरिया ने कहा कि आज के दौर मेंरेशम वस्त्रों का खासा चलन है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र को विस्तार देने के लिए बड़े कार्यक्रम तैयार किए हैं। सेमिनार में आर्थिक ब्यूरो के चेयरमैन और विभागाध्यक्ष डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि लघु उद्योगों में न्यूनतम लागत पर अधिकतम रोजगार मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अब तक 43,580 लघु उद्योग स्थापित हो चुके हैं जिसमें 20,200 लघु उद्योगों की दशा दयनीय है। इन उद्योगों की दशा सुधारने के लिए आर्थिक व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वक्त आ गया है कि प्रो. अमर्त्य सेन की पूंजी प्रधान तकनीक को अपनाए जाएं। आर्डिनेंस फैक्ट्रीज के महाप्रबंधक वीरेंद्र गांधी ने कहा कि अब प्रदेश में उद्योगों की बड़े पैमाने पर स्थापना की आवश्यकता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे उद्योग स्थापित किए जाएं जो शहरी क्षेत्रों में स्थापित नहीं हो सके हैं। प्राचार्य डॉ. जीएल श्रीवास्तव ने मंत्री शिवकुमार बेरिया का स्वागत किया। प्रबंध समिति की सचिव रंजिता रश्मि ने धन्यवाद दिया। सेमिनार में डॉ. धीरेंद्र सिंह, डीएन वर्मा, डॉ. केएन मिश्रा, एनके राय, डॉ. अखिलेश कुमार दीक्षित, डॉ. संगीत सितानी, डॉ. रति शुक्ला, डॉ. मेघना मिश्रा आदि मौजूद थीं। सेमिनार का संचालन डॉ. कल्पना सिंह ने किया।
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