{"_id":"617bec1649bc7a42df649cc9","slug":"800-commercial-vehicles-registration-cancelled-in-six-months","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल ने किया कबाड़: छह महीने में 800 कामर्शियल वाहनों के पंजीकरण निरस्त कराए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल ने किया कबाड़: छह महीने में 800 कामर्शियल वाहनों के पंजीकरण निरस्त कराए
Fri, 29 Oct 2021 06:27 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 29 Oct 2021 06:27 PM IST
सार
कोरोना काल में लगे लॉकडाउन की वजह से ट्रक लंबे समय तक खड़े रहे। इससे उनमें खराबी आ गई। उन्हें बनवाने से अच्छा सरेंडर करना ही उचित लगा। इसी महीने वाहन सरेंडर करने वाले कुछ मोटर मालिक तो डीजल के बढ़े दामों की वजह से भी पीछे हट गए।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना काल के दौरान मची तबाही का असर मोटर मालिकों पर भी पड़ा। पिछले छह महीने में 800 कामर्शियल वाहनों के पंजीयन निरस्त कराए गए हैं। मतलब इन लोगों ने वाहन चलवा पाने से हाथ खड़े कर दिए। ऐसा पहली बार हुआ है, जब इतने कम समय में इतने ज्यादा कामर्शियल वाहनों के पंजीयन निरस्त कराए गए हों।
मोटर मालिकों का कहना है कि कोरोना काल में लगे लॉकडाउन की वजह से ट्रक लंबे समय तक खड़े रहे। इससे उनमें खराबी आ गई। उन्हें बनवाने से अच्छा सरेंडर करना ही उचित लगा। इसी महीने वाहन सरेंडर करने वाले कुछ मोटर मालिक तो डीजल के बढ़े दामों की वजह से भी पीछे हट गए।
सामान्य तौर पर किसी भी कामर्शियल वाहन को उनकी पहली पंजीकरण अवधि 15 साल बीत जाने के बाद ही मोटर मालिक पंजीकरण निरस्त कराते थे। क्योंकि 15 साल पुराने कामर्शियल वाहनों का दोबारा पंजीकरण कराना नुकसान का सौदा होता है। इसमें खर्च बहुत आता था।
विज्ञापन
लेकिन पिछले छह महीने में जिन वाहनों का पंजीकरण निरस्त हुआ है, उनमें 50 प्रतिशत वाहन आठ से 10 साल पुराने थे। कोरोना काल में गाड़ियों के न चलने और बाद में कम चलने से कलपुर्जे खराब हो गए और डीजल महंगा हो जाने से भी मोटर मालिकों का नुकसान हो रहा था।
एक अप्रैल से अब तक करीब आठ सौ कामर्शियल वाहनों का पंजीकरण निरस्त कराया गया है। छह महीने में इतनी बड़ी संख्या में पहली बार इतने पंजीकरण निरस्त हुए हैं। मोटर मालिकों ने उन वाहनों की चेसिस प्लेट भी जमा करा दी है।
सुधीर कुमार वर्मा, एआरटीओ प्रशासन, कानपुर नगर
विज्ञापन
मोटर मालिकों का कहना है कि कोरोना काल में लगे लॉकडाउन की वजह से ट्रक लंबे समय तक खड़े रहे। इससे उनमें खराबी आ गई। उन्हें बनवाने से अच्छा सरेंडर करना ही उचित लगा। इसी महीने वाहन सरेंडर करने वाले कुछ मोटर मालिक तो डीजल के बढ़े दामों की वजह से भी पीछे हट गए।
विज्ञापन
सामान्य तौर पर किसी भी कामर्शियल वाहन को उनकी पहली पंजीकरण अवधि 15 साल बीत जाने के बाद ही मोटर मालिक पंजीकरण निरस्त कराते थे। क्योंकि 15 साल पुराने कामर्शियल वाहनों का दोबारा पंजीकरण कराना नुकसान का सौदा होता है। इसमें खर्च बहुत आता था।
विज्ञापन
लेकिन पिछले छह महीने में जिन वाहनों का पंजीकरण निरस्त हुआ है, उनमें 50 प्रतिशत वाहन आठ से 10 साल पुराने थे। कोरोना काल में गाड़ियों के न चलने और बाद में कम चलने से कलपुर्जे खराब हो गए और डीजल महंगा हो जाने से भी मोटर मालिकों का नुकसान हो रहा था।
एक अप्रैल से अब तक करीब आठ सौ कामर्शियल वाहनों का पंजीकरण निरस्त कराया गया है। छह महीने में इतनी बड़ी संख्या में पहली बार इतने पंजीकरण निरस्त हुए हैं। मोटर मालिकों ने उन वाहनों की चेसिस प्लेट भी जमा करा दी है।
सुधीर कुमार वर्मा, एआरटीओ प्रशासन, कानपुर नगर
केस : एक
दर्शनपुरवा के रहने वाले रंजीत सिंह ने 2012 में ट्रक खरीदा। 2019 तक चलवाया। सब कुछ अच्छा चल रहा था। 2020 में कोरोना आ गया। लॉकडाउन होने से चक्का जाम हो गया। इसके बाद आंशिक लॉकडाउन में भी व्यापारिक गतिविधियां जोर नहीं पकड़ पाईं और ट्रक खड़ा रहा। ट्रक खड़ा रहने से तमाम खराबियां आ गईं। बनवाने में बहुत खर्च बताया गया। तब उन्होंने अपने ट्रक यूपी-78-सीएन 3977 का पंजीकरण छह अक्तूबर को निरस्त करा दिया। रंजीत कहते हैं कि डीजल महंगा होने से इस काम में अब बचत भी नहीं रह गई है।
केस : दो
चकरपुर के अभिषेक जैन ने अपने चार ट्रकों का पंजीयन निरस्त करा दिया है। इन्होंने अगस्त में यूपी 78-डीएन-3334, डीएन-3336, डीएन-3338 और डीएन-3339 का पंजीयन शुल्क निरस्त करा दिया। इन चारों ट्रकों ने कोरोना के पहले ही 10 साल पूरे किए थे। इसके बाद कोरोना आ गया और वाहन कम चले। अभिषेक जैन ने बताया कि खड़े-खड़े ट्रकों में इतनी खराबी आ गई थी कि पंजीयन निरस्त करना ही उचित लगेगा। 15 साल पूरे होने के पहले ही पंजीकरण निरस्त कराकर चेसिस नंबर भी आरटीओ में जमा कर दिया गया है।
दर्शनपुरवा के रहने वाले रंजीत सिंह ने 2012 में ट्रक खरीदा। 2019 तक चलवाया। सब कुछ अच्छा चल रहा था। 2020 में कोरोना आ गया। लॉकडाउन होने से चक्का जाम हो गया। इसके बाद आंशिक लॉकडाउन में भी व्यापारिक गतिविधियां जोर नहीं पकड़ पाईं और ट्रक खड़ा रहा। ट्रक खड़ा रहने से तमाम खराबियां आ गईं। बनवाने में बहुत खर्च बताया गया। तब उन्होंने अपने ट्रक यूपी-78-सीएन 3977 का पंजीकरण छह अक्तूबर को निरस्त करा दिया। रंजीत कहते हैं कि डीजल महंगा होने से इस काम में अब बचत भी नहीं रह गई है।
केस : दो
चकरपुर के अभिषेक जैन ने अपने चार ट्रकों का पंजीयन निरस्त करा दिया है। इन्होंने अगस्त में यूपी 78-डीएन-3334, डीएन-3336, डीएन-3338 और डीएन-3339 का पंजीयन शुल्क निरस्त करा दिया। इन चारों ट्रकों ने कोरोना के पहले ही 10 साल पूरे किए थे। इसके बाद कोरोना आ गया और वाहन कम चले। अभिषेक जैन ने बताया कि खड़े-खड़े ट्रकों में इतनी खराबी आ गई थी कि पंजीयन निरस्त करना ही उचित लगेगा। 15 साल पूरे होने के पहले ही पंजीकरण निरस्त कराकर चेसिस नंबर भी आरटीओ में जमा कर दिया गया है।