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बांदा की 100 सहकारी समितियों में चुनाव की सरगर्मियां तेज
Updated Sat, 23 Sep 2017 12:11 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। शासन की ओर से सहकारिता चुनाव के लिए हरी झंडी मिलते ही जिले में राजनैतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है। यहां सक्रिय 100 समितियों के चुनाव होने हैं। अपने खेमे के अधिक से अधिक डायरेक्टर निर्वाचित कराकर कोऑपरेटिव चेयरमैन का पद हथियाने की गोटें बैठाई जाने लगी हैं। चुनाव सात अक्तूबर को होना है।
प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश सहकारी समितियों के चुनाव की घोषणा कर दी है। जिले में प्रारंभिक समितियों के चुनाव की प्रक्रिया सात अक्तूबर से शुरू होगी और 17 अक्तूबर तक नए सचिवों की घोषणा कर दी जाएगी। सहकारिता विभाग ने शुल्क जमा कराकर सदस्यता पक्के करने की कवायद शुरू कर दी है। जिले की 100 सहकारी समितियों में निर्धारित 1250 रुपये शुल्क जमाकर अब तक 90 हजार सदस्य वोट डालने के हकदार बन चुके हैं।
प्रत्येक सोसाइटी में 10-11 सदस्य हैं। उधर, चुनावी बिगुल बजते ही राजनीतिक खेमा भी सहकारी समितियों के प्रारंभिक चुनाव में ही अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में हैं। ताकि कोआपरेटिव चेयरमैन का पद पर काबिज हो सकें। अभी तक यह सीट सपा के पाले में रही है। वर्ष 2014 में गठित हुई उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी समिति निर्वाचन आयोग ने निबंधन एवं सहकारी समितियां कोआपरेटिव को चुनाव संबंधी निर्देश जारी किए हैं। इसके पहले ये चुनाव रजिस्ट्रार कराते रहे हैं।
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23 अक्तूबर से 6 नवंबर तक जिला कोआरेटिव चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया चलेगी। फिलहाल सहकारिता विभाग सहकारी समितियों की चुनाव की तैयारियों में जुटा है। सहायक निबंधक वीरेंद्र बाबू दीक्षित ने बताया कि आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है। स्टाफ को समिति से जुड़े लोगों से सदस्यता शुल्क जमा कराने के लिए जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रारंभिक चुनाव 7 अक्तूबर को हैं। इससे पहले तैयारियां पूरी की जानी हैं।
जिले की सहकारी समितियां इन दिनों उर्वरक वितरण का व्यवसाय कर रही हैं। समितियां पहले अन्य व्यवसाय भी करती रही हैं। लेकिन इधर करीब दो दशक से इनके दूसरे व्यवसाय तकरीबन बंद हो गए हैं। जिमें की 100 समितियों में 80 वेतनभोगी व 20 उपभोक्ता समितियां हैं। इसके अलावा क्रय-विक्रय समिति, महिला पैक्स समिति भी संचालित हैं।
-7 अक्तूबर से शुरू होगी निर्वाचन प्रक्रिया
-90 हजार से ज्यादा सदस्य चुनेंगे प्रतिनिधि
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बांदा। शासन की ओर से सहकारिता चुनाव के लिए हरी झंडी मिलते ही जिले में राजनैतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है। यहां सक्रिय 100 समितियों के चुनाव होने हैं। अपने खेमे के अधिक से अधिक डायरेक्टर निर्वाचित कराकर कोऑपरेटिव चेयरमैन का पद हथियाने की गोटें बैठाई जाने लगी हैं। चुनाव सात अक्तूबर को होना है।
प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश सहकारी समितियों के चुनाव की घोषणा कर दी है। जिले में प्रारंभिक समितियों के चुनाव की प्रक्रिया सात अक्तूबर से शुरू होगी और 17 अक्तूबर तक नए सचिवों की घोषणा कर दी जाएगी। सहकारिता विभाग ने शुल्क जमा कराकर सदस्यता पक्के करने की कवायद शुरू कर दी है। जिले की 100 सहकारी समितियों में निर्धारित 1250 रुपये शुल्क जमाकर अब तक 90 हजार सदस्य वोट डालने के हकदार बन चुके हैं।
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प्रत्येक सोसाइटी में 10-11 सदस्य हैं। उधर, चुनावी बिगुल बजते ही राजनीतिक खेमा भी सहकारी समितियों के प्रारंभिक चुनाव में ही अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में हैं। ताकि कोआपरेटिव चेयरमैन का पद पर काबिज हो सकें। अभी तक यह सीट सपा के पाले में रही है। वर्ष 2014 में गठित हुई उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी समिति निर्वाचन आयोग ने निबंधन एवं सहकारी समितियां कोआपरेटिव को चुनाव संबंधी निर्देश जारी किए हैं। इसके पहले ये चुनाव रजिस्ट्रार कराते रहे हैं।
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23 अक्तूबर से 6 नवंबर तक जिला कोआरेटिव चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया चलेगी। फिलहाल सहकारिता विभाग सहकारी समितियों की चुनाव की तैयारियों में जुटा है। सहायक निबंधक वीरेंद्र बाबू दीक्षित ने बताया कि आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है। स्टाफ को समिति से जुड़े लोगों से सदस्यता शुल्क जमा कराने के लिए जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रारंभिक चुनाव 7 अक्तूबर को हैं। इससे पहले तैयारियां पूरी की जानी हैं।
जिले की सहकारी समितियां इन दिनों उर्वरक वितरण का व्यवसाय कर रही हैं। समितियां पहले अन्य व्यवसाय भी करती रही हैं। लेकिन इधर करीब दो दशक से इनके दूसरे व्यवसाय तकरीबन बंद हो गए हैं। जिमें की 100 समितियों में 80 वेतनभोगी व 20 उपभोक्ता समितियां हैं। इसके अलावा क्रय-विक्रय समिति, महिला पैक्स समिति भी संचालित हैं।
-7 अक्तूबर से शुरू होगी निर्वाचन प्रक्रिया
-90 हजार से ज्यादा सदस्य चुनेंगे प्रतिनिधि