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दम तोड़ चुकी छह सहकारी समितियां फिर हुई जिंदा

Sat, 03 Oct 2020 12:39 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2020 12:39 AM IST
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6 cooperative societies dead, alive again
कानपुर देहात। जिले में बंद सहकारी समितियों को चालू कराने की कवायद चल रही है। दम तोड़ चुकी छह समितियों की सात-सात लाख रुपये की ऋण सीमा स्वीकृत कराकर उन्हें जिंदा कर दिया गया है। समितियों के खाता चालू होने पर अब वह खाद, बीज लें सकेंगी। इससे करीब 84 गांवों के किसानों को लाभ होगा, लेकिन अब किसानों को भुगतान नगद करना होगा।
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सहकारी समितियों का व्यापार जिला सहकारी बैंक के माध्यम से होता है। इसी बैंक में समिति का खाता होने के साथ व्यापार करने के लिए ऋण लिमिट होती है। अक्सर समितियां उधार खाद की बिक्री करके ऋण की अदायगी नहीं कर पाती है। इससे बैंक लिमिट बंद कर देती है। ऐसी स्थिति में समिति में ताला लटक जाता है। सीडीओ जोगिंदर सिंह के निर्देश पर सहायक आयुक्त सहकारिता अनूप कुमार द्विवेदी ने किसानों की सहूलियत के लिए बंद समितियों को चालू कराने की कवायद शुरू की है। उन्होंने अमरौधा ब्लॉक की बढ़ौली, डेरापुर की परौंख, रेरी व बढ़ागांव, रसूलाबाद की रतनपुर, सरवनखेड़ा की मनेथू समेत छह सहकारी समितियों की बैंक लिमिट चालू कराकर संचालन शुरू करा दिया है। हर समिति में औसत सात गांव जुड़े हैं। समितियों का संचालन शुरू से 84 गांवों के किसानों को लाभ होगा। इन समितियों के खाता खराब होने की वजह से वह बंद चल रहीं थीं। किसानों को खाद, बीज के लिए दुकानदारों के पास जाना पड़ता था। वहां निर्धारित दामों से अधिक में खरीद करनी पड़ती थी। साथ ही गुणवत्तायुक्त खाद नहीं मिल पाती है। इससे वह परेशान होते थे।
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अब सहकारिता विभाग ने खुद ली गारंटी
व्यापार में लेनदेन साफ न रखने पर अक्सर बैंक से सहकारी समितियों के रिश्ते खराब हो जाते हैं। इसका असर उन किसानों पर पड़ता है जो नगद देकर अच्छी गुणवत्ता के खाद, बीज समिति से खरीदना चाहते हैं। कुछ किसान उधार खाद, बीज लेते हैं फिर अदायगी नहीं कर पाते हैं। अब विभाग ने समितियों की खुद गारंटी लेनी शुरू की है। सहकारिता के विभाग के अफसर यह सुनिश्चित कराएंगे कि समिति से नगद बिक्री होगी। प्रतिदिन बिक्री की धनराशि का विवरण विभाग को देने के साथ रकम बैंक में जमा करनी होगी। बैंक का ऋण समय से लौटाया जाने पर अफसरों का फोकस रहेगा। विभाग की गारंटी के बाद बैंकों ने बंद समितियों के खाते चालू करने शुरू किए हैं।
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समितियां बंद होने से किसानों को परेशानी हो रही है। लगातार उच्चाधिकारियों से बात करके बंद समितियों को चालू कराने की कोशिश की जा रही है। छह समितियों की गारंटी लेकर ऋण सीमा स्वीकृत करा दी गई है। इससे 84 गांवों के किसान लाभान्वित होंगे। अन्य बंद समितियों को भी चालू कराने का प्रयास चल रहा है।
- अनूप कुमार, सहायक आयुक्त सहकारिता
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