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Kanpur News: 5.17 करोड़ मिले, फिर भी 24 माह से टेंडर अटका
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कानपुर। रूमा औद्योगिक क्षेत्र में फैक्टरियों से निकलने वाले गंदे पानी के शोधन की समस्या दूर करने के लिए प्रस्तावित 20 करोड़ रुपये का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) जल निगम की प्रक्रिया में ही अटक गया है। 24 माह पहले निर्माण के लिए धनराशि मिलने के बावजूद अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। यूपीसीडा ने 13 नवंबर 2024 को 5.17 करोड़ रुपये की पहली किस्त जल निगम को जारी कर दी थी लेकिन प्लांट का निर्माण आज तक शुरू नहीं हो पाया।
रूमा औद्योगिक क्षेत्र में मौजूदा सीईटीपी की क्षमता 1.55 एमएलडी है लेकिन इसका संचालन महज 0.75 एमएलडी पर हो रहा है। फैक्टरियों की संख्या और उनसे निकलने वाले अपशिष्ट पानी के मुकाबले यह क्षमता कम है। इससे सभी इकाइयों के गंदे पानी का निर्धारित क्षमता के अनुसार शोधन नहीं हो पा रहा है। उद्यमियों की मांग पर तीन एमएलडी क्षमता का नया सीईटीपी बनाने की योजना तैयार हुई। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) खंड प्रथम को दी गई। जल निगम ने एस्टीमेट तैयार कर पहली निविदा आमंत्रित की लेकिन तकनीकी खामियां मिलने पर उसे निरस्त करना पड़ा। इसके बाद दोबारा एस्टीमेट और डीपीआर तैयार कर जांच के लिए मुख्यालय लखनऊ भेजी गई। इस प्रक्रिया में काफी समय बीत गया। शासन के निर्देश पर यूपीसीडा ने नवंबर 2024 में अग्रिम राशि जारी की। इसके बाद जल निगम ने नई निविदा जारी की। इसकी वित्तीय बिड अगस्त 2025 में खोली गई, लेकिन अब तक ठेकेदार तय नहीं हो सका है।
वर्जन
जल निगम नगरीय को डेढ़ वर्ष पहले ही 5.17 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई थी, लेकिन अभी तक टेंडर तय नहीं हो पाए हैं। इसी वजह से सीईटीपी का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। - आशीष तोमर, वरिष्ठ प्रबंधक, सिविल, यूपीसीडा
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- अंतिम टेंडर खुल गया है। जल्द ही वित्तीय बिड भी खुल जाएगी। इसके बाद ठेकेदार तय होते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - पंकज श्रीवास्तव, महाप्रबंधक, जल निगम
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रूमा औद्योगिक क्षेत्र में मौजूदा सीईटीपी की क्षमता 1.55 एमएलडी है लेकिन इसका संचालन महज 0.75 एमएलडी पर हो रहा है। फैक्टरियों की संख्या और उनसे निकलने वाले अपशिष्ट पानी के मुकाबले यह क्षमता कम है। इससे सभी इकाइयों के गंदे पानी का निर्धारित क्षमता के अनुसार शोधन नहीं हो पा रहा है। उद्यमियों की मांग पर तीन एमएलडी क्षमता का नया सीईटीपी बनाने की योजना तैयार हुई। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) खंड प्रथम को दी गई। जल निगम ने एस्टीमेट तैयार कर पहली निविदा आमंत्रित की लेकिन तकनीकी खामियां मिलने पर उसे निरस्त करना पड़ा। इसके बाद दोबारा एस्टीमेट और डीपीआर तैयार कर जांच के लिए मुख्यालय लखनऊ भेजी गई। इस प्रक्रिया में काफी समय बीत गया। शासन के निर्देश पर यूपीसीडा ने नवंबर 2024 में अग्रिम राशि जारी की। इसके बाद जल निगम ने नई निविदा जारी की। इसकी वित्तीय बिड अगस्त 2025 में खोली गई, लेकिन अब तक ठेकेदार तय नहीं हो सका है।
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वर्जन
जल निगम नगरीय को डेढ़ वर्ष पहले ही 5.17 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई थी, लेकिन अभी तक टेंडर तय नहीं हो पाए हैं। इसी वजह से सीईटीपी का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। - आशीष तोमर, वरिष्ठ प्रबंधक, सिविल, यूपीसीडा
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- अंतिम टेंडर खुल गया है। जल्द ही वित्तीय बिड भी खुल जाएगी। इसके बाद ठेकेदार तय होते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - पंकज श्रीवास्तव, महाप्रबंधक, जल निगम