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बारिश के दगा देने से सूख रहीं फसलें
Updated Mon, 11 Sep 2017 12:23 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। बारिश के दगा दे जाने से फसलें सूख रही हैं। धान तो धान, असिंचित ज्वार, बाजरा, अरहर और तिल की फसलें भी सूख रही हैं। फसलों की हालत देखकर किसानों की आंखों में आंसू आ जाते हैं।
इस बार बारिश के मौसम की शुरुआत में अच्छी बारिश होने से किसानों को बेहतर पैदावार की आस जगी थी, लेकिन मौसम के दगा दे जाने से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। तेज धूप और भीषण गर्मी से धान की फसलों का रंग बदल गया है। ये हरी से पीली दिखाई देने लगी हैं। कुछ फसलों की पत्तियां भी सूखने लगी हैं।
सिंचाई के बाद भी इनमें सुधार नहीं हो रहा है। जाफरगंज प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के बारा, करोरा, खदरी, धौरहरा, विजयीपुर, बरवा, खूंटाझाल, धौकलपुर, सैबसी, बिंदौर, मौहरी और तिरहार क्षेत्र के गांव के किसानों की फसलें सूखने लगी हैं। किसान रामनारायन निषाद, बाबू वर्मा ने बताया कि यमुना नदी किनारे के खेतों में सिंचाई का कोई साधन नहीं है।
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अरहर, ज्वार, बाजरा, तिल की फसल बोई गई है। बारिश न होने से अब फसलें सूखने लगी हैं। किसान शैलेंद्र और कैलाश निषाद ने बताया कि पिछले साल अच्छी बारिश हुई थी तो बढ़िया पैदावार हो गई थी। उसके पहले दो साल भीषण सूखा में बुआई किया गया बीज भी नहीं मिला है।
विजयीपुर प्रतिनिधि के अनुसार एक सप्ताह पहले हल्की बूंदाबांदी से फसलों में हरियाली आ गई थी। अब फिर से सूखने लगी हैं। क्षेत्र के चंदापुर, गढ़ा, अवधूतपुर, धाना और खलवा गांव में तिल, ज्वार, बाजरा, उर्द, अरहर की फसल बोई जाती है। तेज धूप व भीषण गर्मी से फसलें सूखने लगी हैं।
फसलों को रोग से ऐसे करें बचाव
चंद्रशेखर आजाद कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि अच्छी फसल के लिए अधिकतम 30-31 तापमान रहना चाहिए, लेकिन इस समय 36 के आसपास तापमान है। ऐसे में धान की फसल में जड़ सड़न, खैरा रोग की बीमारी लगती है। जड़ सड़न में किसान डाइथिन एम-45 का छिड़काव करें। खैरा रोग में जिंक व यूरिया खाद का छिड़काव करें। तेज धूप में धान की फसल को हल्की सिंचाई करनी चाहिए। खेत में पानी नहीं भरा रहना चाहिए। असिंचित फसलों में भी हल्की सिंचाई कर सकते हैं। मौसम अभी एक सप्ताह तक ऐसे ही गर्म रहेगा, फिर शुष्क होगा।
बारिश के दगा देने से सूख रहीं फसलें
धान की फसल में लगा खैरा व जड़ सड़ने का रोग
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फतेहपुर। बारिश के दगा दे जाने से फसलें सूख रही हैं। धान तो धान, असिंचित ज्वार, बाजरा, अरहर और तिल की फसलें भी सूख रही हैं। फसलों की हालत देखकर किसानों की आंखों में आंसू आ जाते हैं।
इस बार बारिश के मौसम की शुरुआत में अच्छी बारिश होने से किसानों को बेहतर पैदावार की आस जगी थी, लेकिन मौसम के दगा दे जाने से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। तेज धूप और भीषण गर्मी से धान की फसलों का रंग बदल गया है। ये हरी से पीली दिखाई देने लगी हैं। कुछ फसलों की पत्तियां भी सूखने लगी हैं।
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सिंचाई के बाद भी इनमें सुधार नहीं हो रहा है। जाफरगंज प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के बारा, करोरा, खदरी, धौरहरा, विजयीपुर, बरवा, खूंटाझाल, धौकलपुर, सैबसी, बिंदौर, मौहरी और तिरहार क्षेत्र के गांव के किसानों की फसलें सूखने लगी हैं। किसान रामनारायन निषाद, बाबू वर्मा ने बताया कि यमुना नदी किनारे के खेतों में सिंचाई का कोई साधन नहीं है।
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अरहर, ज्वार, बाजरा, तिल की फसल बोई गई है। बारिश न होने से अब फसलें सूखने लगी हैं। किसान शैलेंद्र और कैलाश निषाद ने बताया कि पिछले साल अच्छी बारिश हुई थी तो बढ़िया पैदावार हो गई थी। उसके पहले दो साल भीषण सूखा में बुआई किया गया बीज भी नहीं मिला है।
विजयीपुर प्रतिनिधि के अनुसार एक सप्ताह पहले हल्की बूंदाबांदी से फसलों में हरियाली आ गई थी। अब फिर से सूखने लगी हैं। क्षेत्र के चंदापुर, गढ़ा, अवधूतपुर, धाना और खलवा गांव में तिल, ज्वार, बाजरा, उर्द, अरहर की फसल बोई जाती है। तेज धूप व भीषण गर्मी से फसलें सूखने लगी हैं।
फसलों को रोग से ऐसे करें बचाव
चंद्रशेखर आजाद कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि अच्छी फसल के लिए अधिकतम 30-31 तापमान रहना चाहिए, लेकिन इस समय 36 के आसपास तापमान है। ऐसे में धान की फसल में जड़ सड़न, खैरा रोग की बीमारी लगती है। जड़ सड़न में किसान डाइथिन एम-45 का छिड़काव करें। खैरा रोग में जिंक व यूरिया खाद का छिड़काव करें। तेज धूप में धान की फसल को हल्की सिंचाई करनी चाहिए। खेत में पानी नहीं भरा रहना चाहिए। असिंचित फसलों में भी हल्की सिंचाई कर सकते हैं। मौसम अभी एक सप्ताह तक ऐसे ही गर्म रहेगा, फिर शुष्क होगा।
बारिश के दगा देने से सूख रहीं फसलें
धान की फसल में लगा खैरा व जड़ सड़ने का रोग