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जीएसटी डेस्क से नहीं मिल पा रही व्यापारियों को मदद
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:47 AM IST
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उन्नाव। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के बारे में व्यापारियों व आम जनमानस को विस्तार से जानकारी देने के लिए विभाग की ओर से हेल्प डेस्क बनाई गई है। मौजूदा समय में यह डेस्क आरामगाह बनी है। ऐसे में जीएसटी के बारे में जानकारी लेने पहुंच रहे लोग मायूस होकर लौटने को मजबूर हैं। लोगों को हेल्प डेस्क से मदद नहीं मिल पा रही है।
जीएसटी के प्रभावी होने से करीब एक पखवाड़ा पूर्व ही वस्तु एवं सेवाकर कार्यालय में व्यापारियों व आम लोगों को जीएसटी के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए एक हेल्प डेस्क मनाई गई थी। इसमें लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर जीएसटी के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे थे। लेकिन जीएसटी के प्रभावी होते ही इस हेल्प डेस्क का जैसे महत्व ही खत्म हो गया है। इस समय यह आरामगाह बनी हुई है।
यहां बैठकर विभागीय कर्मचारी भी अपना खाली समय बिताते हैं। बांगरमऊ के हार्डवेयर कारोबारी सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि उनका पंजीयन वैट में था। अब उन्हें जीएसटी में माइग्रेशन करवाना है। वह इसमें आवश्यक जानकारी के लिए यहां आए थे, लेकिन किसी ने सही जानकारी नहीं दी तो वह लौट आए।
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उन्होंने बताया कि अब किसी वकील से ही मिलकर जानकारी प्राप्त करेंगे। वहीं शुक्लागंज के मनोज सिंह ने कहा कि उनका मिठाई का कारोबार है। वह जीएसटी में नया पंजीयन कराने के बारे में जानकारी करने कार्यालय गए थे। लेकिन उन्हें किसी से कोई जानकारी नहीं मिली। बल्कि उन्हें वकील से बात करने की सलाह दी गई।
नोडल अफसर का तबादला : जिले के लोगों को जीएसटी के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए एडिश्नल कमिश्नर वीके मिश्रा को जिले का नोडल अफसर बनाया गया था। उन्हें 15 जुलाई तक इस काम की जिम्मेदारी दी गई थी कि जिले के व्यापारियों व अधिवक्ताओ के अलावा विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों तक को जीएसटी को लेकर कोई समस्या हो तो वह इसका निदान करेंगे। लेकिन उनका भी विभाग की ओर से ट्रांसफर कर दिया गया। अब जिले को जीएसटी की जानकारी देने को नोडल अफसर की भी दरकार है।
-मायूस होकर लौट रहे जानकारी लेने पहुंचने वाले व्यापारी
-जीएसटी प्रभावी होने से पहले विभाग की ओर से बनी थी हेल्प डेस्क
अमर उजाला ब्यूरो
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जीएसटी के प्रभावी होने से करीब एक पखवाड़ा पूर्व ही वस्तु एवं सेवाकर कार्यालय में व्यापारियों व आम लोगों को जीएसटी के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए एक हेल्प डेस्क मनाई गई थी। इसमें लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर जीएसटी के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे थे। लेकिन जीएसटी के प्रभावी होते ही इस हेल्प डेस्क का जैसे महत्व ही खत्म हो गया है। इस समय यह आरामगाह बनी हुई है।
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यहां बैठकर विभागीय कर्मचारी भी अपना खाली समय बिताते हैं। बांगरमऊ के हार्डवेयर कारोबारी सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि उनका पंजीयन वैट में था। अब उन्हें जीएसटी में माइग्रेशन करवाना है। वह इसमें आवश्यक जानकारी के लिए यहां आए थे, लेकिन किसी ने सही जानकारी नहीं दी तो वह लौट आए।
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उन्होंने बताया कि अब किसी वकील से ही मिलकर जानकारी प्राप्त करेंगे। वहीं शुक्लागंज के मनोज सिंह ने कहा कि उनका मिठाई का कारोबार है। वह जीएसटी में नया पंजीयन कराने के बारे में जानकारी करने कार्यालय गए थे। लेकिन उन्हें किसी से कोई जानकारी नहीं मिली। बल्कि उन्हें वकील से बात करने की सलाह दी गई।
नोडल अफसर का तबादला : जिले के लोगों को जीएसटी के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए एडिश्नल कमिश्नर वीके मिश्रा को जिले का नोडल अफसर बनाया गया था। उन्हें 15 जुलाई तक इस काम की जिम्मेदारी दी गई थी कि जिले के व्यापारियों व अधिवक्ताओ के अलावा विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों तक को जीएसटी को लेकर कोई समस्या हो तो वह इसका निदान करेंगे। लेकिन उनका भी विभाग की ओर से ट्रांसफर कर दिया गया। अब जिले को जीएसटी की जानकारी देने को नोडल अफसर की भी दरकार है।
-मायूस होकर लौट रहे जानकारी लेने पहुंचने वाले व्यापारी
-जीएसटी प्रभावी होने से पहले विभाग की ओर से बनी थी हेल्प डेस्क
अमर उजाला ब्यूरो