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एमडी के फर्जी साइन से 40 प्रस्ताव पास
अमर उजाला ब्यूूराे कानपुर
Updated Thu, 04 Dec 2014 02:23 AM IST
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उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लि. (यूपीएसआईडीसी) के अधिकारियों ने एक और नए कारनामे को अंजाम दिया है। यहां विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंडों के रेस्टोरेशन, लीज ट्रांसफर और एलॉटमेंट की लगभग 40 फाइलों को प्रबंध निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर से निपटा दिया गया।
इस घपले की जानकारी प्रबंध निदेशक को मिली तो उन्होंने निगम के मुख्य विजिलेंस अधिकारी को जांच सौपी है।यूपीएसआईडीसी के भूखंडों में रिस्टोरेशन यानी पुर्नजीवीकरण की प्रक्रिया भूखंड के नियमानुसार उपयोग, पूरा मूल्य न जमा करने आदि के चलते रद हुए भूखंडों के संबंध में की जाती है।
इसके लिए भूखंड का आवंटन रद होने के तीस दिन के भीतर आवेदन करना होता है। इसका परीक्षण कराया जाता है, यदि सब कुछ सही पाया जाता है तो एक निश्चित लेवी लेकर इसे रिस्टोर कर दिया जाता है।
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इसी तरह किसी भूखंड को यदि किसी अन्य के पक्ष में ट्रांसफर करना है तो उसके लिए आवेदन के साथ आवंटी का हलफनामा लगाना होता है। साथ ही वह अपनी लीज सरेंडर करता है।
इसकी भी एक निर्धारित शुल्क जमा की जाती है। इसके लिए संबंधित फाइल पर प्रबंध निदेशक का अनुमोदन आवश्यक होता है। सूत्रों के मुताबिक कानपुर में जैनपुर ग्रोथ सेंटर, इंडस्ट्रियल एरिया जैनपुर, पनकी औद्योगिक क्षेत्र, चकेरी और रूमा औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 40 मामले ऐसे हैं, जिनमें इन्हीं कार्यों के लिए बनी फाइल में प्रबंध निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर से अनुमोदन कर दिया गया।
यही नहीं इन्हीं क्षेत्रों में कुछ भूखंडों के आवंटन में भी प्रबंध निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पूरे घपले की खबर प्रबंध निदेशक मनोज सिंह को मिली तो उन्होंने पूर्व क्षेत्रीय प्रबंधक आरएस पाठक के कार्यकाल में हुए रिस्टोरेशन, एलॉटमेंट और ट्रांसफर के मामलों को खंगालने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही पूरे मामले की जांच निगम के चीफ विजिलेंस ऑफिसर को भी दी गई है। उन्हें इसके लिए एक माह का वक्त दिया गया है।
लगभग चालीस मामलों में मेरे फर्जी हस्ताक्षर होने की जानकारी मिली है। इस पर बीते दो वर्षों में रिस्टोरेशन, लीज ट्रांसफर और एलॉटमेंट के सभी प्रकरणों की सूची बनवाई जा रही है।
साथ ही चीफ विजिलेंस ऑफिसर को भी पूरे मामले की जांच महीने भर में पूरी करने को कहा है। मामले सामने आने के बाद हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से हस्ताक्षर का मिलान भी कराया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मनोज सिंह, प्रबंध निदेशक (यूपीएसआईडीसी)
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इस घपले की जानकारी प्रबंध निदेशक को मिली तो उन्होंने निगम के मुख्य विजिलेंस अधिकारी को जांच सौपी है।यूपीएसआईडीसी के भूखंडों में रिस्टोरेशन यानी पुर्नजीवीकरण की प्रक्रिया भूखंड के नियमानुसार उपयोग, पूरा मूल्य न जमा करने आदि के चलते रद हुए भूखंडों के संबंध में की जाती है।
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इसके लिए भूखंड का आवंटन रद होने के तीस दिन के भीतर आवेदन करना होता है। इसका परीक्षण कराया जाता है, यदि सब कुछ सही पाया जाता है तो एक निश्चित लेवी लेकर इसे रिस्टोर कर दिया जाता है।
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इसी तरह किसी भूखंड को यदि किसी अन्य के पक्ष में ट्रांसफर करना है तो उसके लिए आवेदन के साथ आवंटी का हलफनामा लगाना होता है। साथ ही वह अपनी लीज सरेंडर करता है।
इसकी भी एक निर्धारित शुल्क जमा की जाती है। इसके लिए संबंधित फाइल पर प्रबंध निदेशक का अनुमोदन आवश्यक होता है। सूत्रों के मुताबिक कानपुर में जैनपुर ग्रोथ सेंटर, इंडस्ट्रियल एरिया जैनपुर, पनकी औद्योगिक क्षेत्र, चकेरी और रूमा औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 40 मामले ऐसे हैं, जिनमें इन्हीं कार्यों के लिए बनी फाइल में प्रबंध निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर से अनुमोदन कर दिया गया।
यही नहीं इन्हीं क्षेत्रों में कुछ भूखंडों के आवंटन में भी प्रबंध निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पूरे घपले की खबर प्रबंध निदेशक मनोज सिंह को मिली तो उन्होंने पूर्व क्षेत्रीय प्रबंधक आरएस पाठक के कार्यकाल में हुए रिस्टोरेशन, एलॉटमेंट और ट्रांसफर के मामलों को खंगालने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही पूरे मामले की जांच निगम के चीफ विजिलेंस ऑफिसर को भी दी गई है। उन्हें इसके लिए एक माह का वक्त दिया गया है।
लगभग चालीस मामलों में मेरे फर्जी हस्ताक्षर होने की जानकारी मिली है। इस पर बीते दो वर्षों में रिस्टोरेशन, लीज ट्रांसफर और एलॉटमेंट के सभी प्रकरणों की सूची बनवाई जा रही है।
साथ ही चीफ विजिलेंस ऑफिसर को भी पूरे मामले की जांच महीने भर में पूरी करने को कहा है। मामले सामने आने के बाद हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से हस्ताक्षर का मिलान भी कराया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मनोज सिंह, प्रबंध निदेशक (यूपीएसआईडीसी)