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पंजीकृत 329 विद्यार्थियों में सिर्फ 32 कर रहे आनलाइन पढ़ाई

Tue, 19 Jan 2021 01:05 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jan 2021 01:05 AM IST
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32 hi online ker rahe padhai
उच्च प्राथमिक विद्यालय पिटाकपुर में पढ़ाते शिक्षक। - फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में आनलाइन शिक्षा व्यवस्था दम तोड़ रही है। सोमवार को डेरापुर बीआरसी परिसर स्थित संविलियन विद्यालय और राजपुर ब्लाक के पिटाकपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय की पड़ताल की गई। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बने व्हाट्स एप ग्रुप सक्रिय नहीं मिले। बच्चों की शिक्षा को लेकर न तो अभिभावक जागरूक दिख रहे हैं और न ही शिक्षक रुचि ले रहे हैं। 329 बच्चों में केवल 32 आनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं।
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डेरापुर बीआरसी परिसर स्थित प्राथमिक विद्यालय में 128, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में 87, उच्च प्राथमिक विद्यालय में 49 बच्चे पंजीकृत हैं। कुल 264 बच्चों की आनलाइन पढ़ाई के लिए व्हाट्स ग्रुप बने हैं। इसमें 60 विद्यार्थी जुड़े हैं लेकिन 20 विद्यार्थी ही ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था में भाग ले रहे हैं। यहां हेड मास्टर राकेश सचान, सहायक शिक्षक शैलेंद्र कुमार, शिवनारायन, प्रीती विश्वकर्मा, सपना सोनी तैनात हैं।
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हेड मास्टर राकेश सचान ने बताया काफी संख्या में बच्चों के अभिभावकों के पास एंड्रायड फोन नहीं हैं। इससे समस्या आ रही है। व्हाट्स एप ग्रुपों में लगातार शिक्षण सामग्री भेजी जा रही है। ऑनलाइन उत्तर आने पर जांच की जाती है। कहाकि बच्चों के अभिभावकों को फोन करके पढ़ाई के लिए जागरूक किया जाता है। लगातार लापरवाही करने वाले बच्चों के घर जाकर भी उनसे संपर्क किया जाता है।
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इसी तरह से राजपुर ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय पिटाकपुर में पंजीकृत 65 बच्चों में सिर्फ 12 ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बाकी बच्चों की पढ़ाई ठप है। यहां हेड मास्टर अंजनी कुमार, सहायक अध्यापक सुरेश चंद्र कटियार, अनुदेशक अनुपम देवी की तैनाती है। अभिभावकों को स्कूल के व्हाट्स एप ग्रुपों से जोड़ा गया है लेकिन वह बच्चों की शिक्षा में रुचि नहीं ले रहे हैं। संसाधनों के अभाव में बड़ी संख्या में बच्चे आनलाइन शिक्षा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

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ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था के तहत अभिभावकों के मोबाइल पर बच्चों को काम दिया जा रहा है, उत्तरों की नियमित जांच की जाती है। जहां संसाधनों की कमी है वहां के अभिभावकों को बारी-बारी से स्कूल बुलाकर बच्चों को काम देने की व्यवस्था है। इसकी मॉनीटरिंग हो रही है।
सुनील दत्त, बीएसए
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