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21 जनवरी ः सर्दी ने 13 साल का रिकार्ड तोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Fri, 22 Jan 2016 02:17 AM IST
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21 जनवरी को दिन की सर्दी ने पिछले 13 सालों का रिकार्ड तोड़ दिया। दिन का पारा लुढ़ककर 12.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। बुधवार को दिन का पारा 19.0 डिग्री सेल्सियस था।
इससे पहले 21 जनवरी 2003 में दिन का पारा 8.2 डिग्री सेल्सियस रहा था। मौसम विज्ञानियों के अनुसार अगले चार दिन तक कड़ाके की सर्दी पड़ेगी। उत्तराखंड से आने वाली बर्फीली हवाओं ने शहर में गलन भरी सर्दी बढ़ा दी। दिनभर धूप नहीं निकली। सुबह कोहरा और धुंध भी रही। गुरुवार को अधिकतम और न्यूनतम पारे के बीच का अंतर महज 2.7 डिग्री सेल्सियस रह गया।
न्यूनतम पारा 9.5 डिग्री सेल्सियस रहा। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी प्रो. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि दिन में नमी बढ़ गई है, इस वजह से गलन ज्यादा है। अगले चार दिनों तक बादलों के बीच कड़ाके की ठंड पड़ेगी। बूंदाबांदी भी हो सकती है।
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मछलियों को सबसे ज्यादा नुकसानः शीतलहर का प्रभाव पशु-पक्षियों पर भी पड़ेगा। सबसे ज्यादा खतरा मछलियों का होगा। उनके शरीर पर लाल चकत्ते पड़ सकते हैं, जिसे अलसेटिव सिंड्रोम कहते हैं। यदि चकत्ते पड़ रहे हों तो प्रति हेक्टेयर तालाब में दो किलोग्राम पोटैशियम परमैग्नेट का छिड़काव कर दें।
छह जनवरी को टूटा था ‘गर्मी’ का रिकार्ड
इस बार सर्दी ने अजब-गजब रंग दिखाए हैं। शुरुआत में ही जाड़ा देरी से आया फिर ऐसा रंग दिखाया कि लोगों को गर्मी का एहसास होने लगा। फिर मौसम पलटा।
मटर, सरसों को नुकसान
वातावरण की नमी से मटर, सरसों की फसलों को नुकसान संभव है। मौसम विज्ञानी के मुताबिक मटर में तलासिता और बुकनी रोग लगने का खतरा है। यदि पत्ती पर रोग दिखे तो 0.5 फीसदी मकोजेब और जिरम का छिड़काव करें।
21 दिसंबर 2015 की रात का पारा 0.8 डिग्री सेल्सियस हो गया और यह 21 दिसंबर की रात ने 44 साल की सबसे सर्द रात का रिकार्ड तोड़ा। कृषि विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 21 दिसंबर को इतनी सर्द रात वर्ष 1971 के बाद से नहीं रही। वहीं 6 जनवरी 2016 को अधिकतम पारे ने रिकार्ड बनाया। इस दिन अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक चढ़ गया था। 6 जनवरी को इतना पारा 1971 के बाद से कभी नहीं रहा।
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इससे पहले 21 जनवरी 2003 में दिन का पारा 8.2 डिग्री सेल्सियस रहा था। मौसम विज्ञानियों के अनुसार अगले चार दिन तक कड़ाके की सर्दी पड़ेगी। उत्तराखंड से आने वाली बर्फीली हवाओं ने शहर में गलन भरी सर्दी बढ़ा दी। दिनभर धूप नहीं निकली। सुबह कोहरा और धुंध भी रही। गुरुवार को अधिकतम और न्यूनतम पारे के बीच का अंतर महज 2.7 डिग्री सेल्सियस रह गया।
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न्यूनतम पारा 9.5 डिग्री सेल्सियस रहा। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी प्रो. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि दिन में नमी बढ़ गई है, इस वजह से गलन ज्यादा है। अगले चार दिनों तक बादलों के बीच कड़ाके की ठंड पड़ेगी। बूंदाबांदी भी हो सकती है।
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मछलियों को सबसे ज्यादा नुकसानः शीतलहर का प्रभाव पशु-पक्षियों पर भी पड़ेगा। सबसे ज्यादा खतरा मछलियों का होगा। उनके शरीर पर लाल चकत्ते पड़ सकते हैं, जिसे अलसेटिव सिंड्रोम कहते हैं। यदि चकत्ते पड़ रहे हों तो प्रति हेक्टेयर तालाब में दो किलोग्राम पोटैशियम परमैग्नेट का छिड़काव कर दें।
छह जनवरी को टूटा था ‘गर्मी’ का रिकार्ड
इस बार सर्दी ने अजब-गजब रंग दिखाए हैं। शुरुआत में ही जाड़ा देरी से आया फिर ऐसा रंग दिखाया कि लोगों को गर्मी का एहसास होने लगा। फिर मौसम पलटा।
मटर, सरसों को नुकसान
वातावरण की नमी से मटर, सरसों की फसलों को नुकसान संभव है। मौसम विज्ञानी के मुताबिक मटर में तलासिता और बुकनी रोग लगने का खतरा है। यदि पत्ती पर रोग दिखे तो 0.5 फीसदी मकोजेब और जिरम का छिड़काव करें।
21 दिसंबर 2015 की रात का पारा 0.8 डिग्री सेल्सियस हो गया और यह 21 दिसंबर की रात ने 44 साल की सबसे सर्द रात का रिकार्ड तोड़ा। कृषि विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 21 दिसंबर को इतनी सर्द रात वर्ष 1971 के बाद से नहीं रही। वहीं 6 जनवरी 2016 को अधिकतम पारे ने रिकार्ड बनाया। इस दिन अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक चढ़ गया था। 6 जनवरी को इतना पारा 1971 के बाद से कभी नहीं रहा।