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चर्च मामले में चार निलंबित, अभी और भी निशाने पर

Sun, 10 Jun 2018 12:32 AM IST
Updated Sun, 10 Jun 2018 12:32 AM IST
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चर्च मामले में चार निलंबित, अभी और भी निशाने पर
फतेहपुर। शहर के देवीगंज में चर्च की बेशकीमती जमीन को मनमाने तरीके से बेचने-खरीदने के मामले में अफसर और भूमाफिया दोनों की सांसें अटक गई हैं। कोतवाली में एफआईआर के बाद अब अफसरों के निलंबन का सिलसिला शुरू है। अब तक कोतवाल, कानूनगो, दो लेखपाल निलंबित हो चुके हैं। तत्कालीन सब रजिस्ट्रार के
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निलंबन की संस्तुति की गई है। माना जा रहा है कि अभी कई अफसरों पर गाज गिरेगी। कुछ के आरोप पत्र भी जिला प्रशासन तैयार करने में लगा हुआ है।


नायब तहसीलदार रमेश चंद्र पांडेय की ओर से दी गई तहरीर पर रिपोर्ट लिखी गई है। उसमें कहा गया है कि यूनियन मिशनरी सोसाइटी व एहतमाम उत्तर प्रदेश सरकार जरिए फतेहपुर कलेक्टर के नाम अंकित जमीन पर भूमाफिया फर्जी तरीके से काबिज हैं। अधिकारियों की मिलीभगत से इसे बेचा व खरीदा गया। जमीन के अभिलेखों
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के हेराफेरी के दौरान जिले में तैनात रहे उपनिबंधक सदर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, 19 क्रेता, विक्रेता और अन्य दोषी कर्मी जो मामले में लिप्त हैं, सभी पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाए। कोतवाली में एफआईआर दर्ज होने के बाद इस मामले में शहर कोतवाल आरके सिंह, कानूनगो राजेंद्र सिंह पटेल, लेखपाल राजेंद्र प्रसाद सिंह
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यादव व लेखपाल ओम प्रकाश विश्वकर्मा को निलंबित कर दिया गया है। तत्कालीन सब रजिस्ट्रार धर्मेंद्र चौधरी के निलंबन की संस्तुति उनके विभाग को की गई है। जिले में 55 वर्ष में सदर तहसील में तैनात हुए लेखपाल, कानूनगो, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और उपजिलाधिकारियों की सूची बनाई जा रही है। प्रथम दृष्टया प्रशचासन की ओर से कोतवाली में एफआईआर कराने के बाद ऐसे दागी अफसरों को चिन्हित किया जा रहा है,

जिन्होंने भूमाफियाओं से सांठगांठ करके चर्च की जमीन का बंदरबांट किया। प्रकरण में शनिवार को भी दागी अधिकारियों और कर्मचारियों की तलाश जारी रही। विभागीय सूत्रों की मानें तो तकरीबन 27 नायब, 33 तहसीलदार, सात उपजिलाधिकारी और लगभग दो दर्जन से अधिक उप निबंधक कार्रवाई की जद में है। अधिकारी पड़ताल में लगे हैं ताकि 1963 से अब तक तैनात अधिकारियों के चर्च की जमीन के संबंध में उत्तरदायित्व निर्धारित किए जा सकें। पुलिस की विवेचना भी इन्हीं बिंदुओं तक पहुंचनी है, जिससे पता चल सके, किस अधिकारी की जमीन के मसले में क्या भूमिका रही।

चर्च की विवादित जमीन के प्रकरण में पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराएं 419 व 420 तथा कूटरचना की धाराएं 467, 468 व 471 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज की है।

कृषि राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप उर्फ धुन्नी सिंह ने मुख्यमंत्री को शिकायत कर बताया था कि शहर के देवीगंज में मिशनरी की जमीन कस्बा फतेहपुर की खाता संख्या 576 के गाटा संख्या 2244 और 2252 और भिखारीपुर खाता संख्या 10 के गाटा नंबर 20 की भूमि को राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर बेच दिया गया है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि यह जमीन वूमेंस यूनियन मिशनरी सोसाइटी ए एहतमाम उत्तर प्रदेश सरकार जरिए कलेक्टर फतेहपुर के अधिकार में थी। जिसे अफसरों व भूमाफिया ने सांठगांठ करके बेचा।

चर्च की जमीन विवादित होने का प्रकरण उजागर होने और इससे जुड़े लोगों पर कार्रवाई होने से स्थानीय बाशिंदे चिंतित हैं। यहां के बाशिंदे इस बात से चिंतित हैं कि उनके साथ क्या होने वाला है। जिस विवादित जमीन की बता हो रही है मौजूदा समय यहां कई हास्पिटल, होटल और कार्मिशियल भवन संचालित हैं। साथ ही तकरीबन डेढ़ सौ से अधिक घर बने हैं। कार्रवाई के मुताबिक चर्च की जमीन के सभी अवैध कब्जे हटाए जाएंगे। जिससे कई लोग घर से बेघर हो सकते हैं। स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।


समीक्षा बैठक में डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने एसडीएम सदर प्रेम प्रकाश तिवारी और एडीएम जेपी गुप्ता से चर्च प्रकरण में पूछताछ की। डीएम ने कहा कि यदि निर्माण अवैध हैं और अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत है तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने चर्च प्रकरण को समझने के बाद एफआईआर में पुलिस का सहयोग करने के निर्देश दिए और विवेचना में संबंधित अभिलेख देने को कहा।

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