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श्रमिक की मौत, परिजनों ने फैक्ट्री गेट पर किया हंगामा
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:47 AM IST
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बिछिया (उन्नाव)। फैक्ट्री में काम करते समय घायल हुए श्रमिक की पांच दिन बाद सोमवार देर शाम हालत बिगड़ गई। परिजनों ने रात में एक झोलाछाप से उसका इलाज कराया और मंगलवार सुबह उसे जिला अस्पताल ले गए, मगर उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव लेकर फैक्ट्री पहुंचे और गेट पर हंगामा कर दिया। घंटो चले हंगामे के बाद फैक्ट्री प्रबंधक ने तीन लाख रुपये देने की बात कही, तब परिजन माने।
अजगैन थानाक्षेत्र के सोनिक गांव निवासी आजाद राठौर पुत्र रामप्रसाद दही चौकी साइट-दो स्थित जगदंबे आयरन फैक्ट्री में मजदूरी करता था। पांच दिन पहले सरिया की लोडिंग करते समय उसे चोट लग गई थी। तब से उसे लगातार बुखार आ रहा था, लेकिन परिवार का पेट भरने के लिए वह दवा खाकर काम पर आ रहा था।
सोमवार शाम को फैक्ट्री में काम करते समय उसकी हालत बिगड़ गई। वह किसी तरह घर पहुंचा तो परिजनों ने गांव के पास ही एक झोलाछाप को दिखाया। मंगलवार सुबह हालत बिगड़ने पर परिजन सुबह करीब नौ बजे आजाद को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डाक्टरों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने का प्रयास किया, लेकिन परिजन हंगामा करते हुए शव लेकर चले गए।
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शव लेकर परिजन फैक्ट्री पहुंचे और गांव वालों को बुलाकर हंगामा व नारेबाजी शुरू कर दी। मृतक के परिजन पांच लाख रुपये मुआवजा की मांग कर रहे थे। फैक्ट्री प्रबंधन के लोग आजाद की मौत घर पर होने और हल्की चोट लगने की घटना पांच दिन पहले होने की बात कह मुआवजा देने से इनकार कर दिया।
बाद में बिछिया के पूर्व ब्लाक प्रमुख केके सिंह ने फैक्ट्री के प्रबंधक एमएम सिंह से मृतक के परिजनों से वार्ता कराई। काफी देर तक चली खींचतान के बाद फैक्ट्री प्रबंधक ने तीन लाख रुपये मुआवजा देने की हामी भरी। मृतक की पत्नी श्वेता को एक लाख रुपये नगद दे दो लाख रुपये बैंक खाते में देने का वादा किया।
इसके बाद परिजन शव लेकर घर चले गए। इस दौरान मौजूद रहे शहर कोतवाली एसएसआई रंधा सिंह ने शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कही लेकिन परिजन तैयार नहीं हुए। मृतक के भाई राकेश ने बताया कि भाई के तीन छोटे बच्चे अमन (8), अंजली (6) और आगेश चार साल हैं।
-पांच लाख मांगे, तीन लाख मिलने पर माने, दही चौकी स्थित आयरन मिल की घटना
अमर उजाला ब्यूरो
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अजगैन थानाक्षेत्र के सोनिक गांव निवासी आजाद राठौर पुत्र रामप्रसाद दही चौकी साइट-दो स्थित जगदंबे आयरन फैक्ट्री में मजदूरी करता था। पांच दिन पहले सरिया की लोडिंग करते समय उसे चोट लग गई थी। तब से उसे लगातार बुखार आ रहा था, लेकिन परिवार का पेट भरने के लिए वह दवा खाकर काम पर आ रहा था।
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सोमवार शाम को फैक्ट्री में काम करते समय उसकी हालत बिगड़ गई। वह किसी तरह घर पहुंचा तो परिजनों ने गांव के पास ही एक झोलाछाप को दिखाया। मंगलवार सुबह हालत बिगड़ने पर परिजन सुबह करीब नौ बजे आजाद को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डाक्टरों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने का प्रयास किया, लेकिन परिजन हंगामा करते हुए शव लेकर चले गए।
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शव लेकर परिजन फैक्ट्री पहुंचे और गांव वालों को बुलाकर हंगामा व नारेबाजी शुरू कर दी। मृतक के परिजन पांच लाख रुपये मुआवजा की मांग कर रहे थे। फैक्ट्री प्रबंधन के लोग आजाद की मौत घर पर होने और हल्की चोट लगने की घटना पांच दिन पहले होने की बात कह मुआवजा देने से इनकार कर दिया।
बाद में बिछिया के पूर्व ब्लाक प्रमुख केके सिंह ने फैक्ट्री के प्रबंधक एमएम सिंह से मृतक के परिजनों से वार्ता कराई। काफी देर तक चली खींचतान के बाद फैक्ट्री प्रबंधक ने तीन लाख रुपये मुआवजा देने की हामी भरी। मृतक की पत्नी श्वेता को एक लाख रुपये नगद दे दो लाख रुपये बैंक खाते में देने का वादा किया।
इसके बाद परिजन शव लेकर घर चले गए। इस दौरान मौजूद रहे शहर कोतवाली एसएसआई रंधा सिंह ने शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कही लेकिन परिजन तैयार नहीं हुए। मृतक के भाई राकेश ने बताया कि भाई के तीन छोटे बच्चे अमन (8), अंजली (6) और आगेश चार साल हैं।
-पांच लाख मांगे, तीन लाख मिलने पर माने, दही चौकी स्थित आयरन मिल की घटना
अमर उजाला ब्यूरो